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वसुमतीयोगः
निर्माण नियम
चन्द्रमासँ उपचय भावोंमे (३, ६, १०, ११) सभटा शुभ ग्रह
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
वासुमति योग लेल चन्द्रमासँ उपचय भावोंमे सभटा प्राकृतिक शुभ ग्रह (बृहस्पति, शुक्र, बुध, चन्द्रमा) रहब आवश्यक अछि। ई कठोर शर्त एकरा दुर्लभ (~३%) बनबैत अछि। उपस्थित रहलापर ई निरन्तर बढ़ैत धन प्रदान करैत अछि जे आयुक संग वृद्धि पबैत अछि — उपचय भाव वृद्धिक भाव होइत अछि।
निरन्तर बढ़ैत धन
धन आयुक संग बढ़ैत अछि। आर्थिक स्थिति जीवनभरि स्थिरतापूर्वक सुधरैत रहैत अछि।
वसुमति योगवला व्यक्तिसभ सामान्यतः जीवनभरि अपन वित्तीय स्थितिमे सतत वृद्धि अनुभव करैत छथि। हुनकर करियरक मार्गमे प्रायः निरन्तर प्रयास आ क्रमिक पदोन्नति सम्मिलित होइत अछि, जे बादक वर्षसभमे महत्वपूर्ण धन संचय दिस अग्रसर करैत अछि। ओ लोकनि प्रायः परिश्रमी आ साधनसम्पन्न स्वभावक होइत छथि, अपन वित्तीय भविष्यकेँ सुरक्षित करबाक लेल चुनौतीसभकेँ पार करबामे निपुण। ई सतत विकास प्रायः समग्र कल्याण आ स्थिरतामे योगदान करैत अछि।
वसुमति योगक फल सामान्यतः गुरु, शुक्र, बुध वा चन्द्रमाक दशा वा अन्तर्दशा कालमे प्रकट होइत अछि। ई काल प्रायः महत्वपूर्ण आर्थिक वृद्धिक सूचक होइत अछि।