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यमयोगः
निर्माण नियम
मंगल शनिक संग युति
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
यम (मृत्युक देवता) ऊर्जा — तीव्र अनुशासन अथवा विनाशकारी कुंठा। शल्य-चिकित्सा, अभियंत्रण, सैन्य, खनन मे उत्कृष्टता संभव। संचित ऊर्जाक लेल शारीरिक निकासक आवश्यकता।
अनुशासन अथवा विनाश
शल्य-चिकित्सा, अभियंत्रण, सैन्य मे निर्देशित तीव्र अनुशासन।
ई योग प्रायः एकटा एहन व्यक्ति केर रूपमे प्रकट होइत अछि जाहिमे अपार आंतरिक प्रेरणा होइत अछि, जे सर्जरी वा इंजीनियरिंग जकाँ चुनौतीपूर्ण क्षेत्रसभमे अत्यधिक अनुशासनक क्षमता रखैत अछि। मुदा, यदि ई प्रबल ऊर्जाकेँ रचनात्मक निकास नहि भेटय, तऽ ई तीव्र निराशा, क्रोध, वा आत्मघाती प्रवृत्तिक कालक कारण बनि सकैत अछि। कठोर स्वभाव वा दमित आक्रामकताक कारण संबंध प्रभावित भऽ सकैत अछि, आ शारीरिक स्वास्थ्य दीर्घकालिक तनावसँ प्रभावित भऽ सकैत अछि।
यम योगक प्रभाव सामान्यतः मंगल वा शनि केर दशा वा अंतर्दशाक कालमे सर्वाधिक स्पष्ट होइत अछि। ई काल प्रायः गहन चुनौतीसभकेँ लऽ अबैत अछि जाहिमे अनुशासनक आवश्यकता होइत अछि, वा यदि ऊर्जाकेँ सही दिशा नहि देल जाए तऽ महत्वपूर्ण निराशाक काल सेहो भऽ सकैत अछि।