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मोक्षयोगः
निर्माण नियम
बारहम भावक स्वामी पहिल वा नवम भावमे, शुभ ग्रह द्वारा दृष्ट
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
मोक्ष योग आध्यात्मिक मुक्तिक संभावना सूचित करैत अछि। बारहम भावक स्वामी (विलयक कारक) धर्म भावमे (पहिल, नवम) शुभ ग्रह क आशीर्वादसँ संसारक वैराग्यकें आध्यात्मिक उपलब्धिमे रूपान्तरित करैत अछि।
आध्यात्मिक मुक्ति
मुक्तिक संभावना, मोक्षक दिश ले जाएत धार्मिक जीवन।
ई योग सामान्यतः एकटा एहन व्यक्तिमे प्रकट होइत अछि जेकर दार्शनिक झुकाव गम्भीर होइत अछि, जे प्रायः आध्यात्मिक अन्वेषण वा सेवाक लेल समर्पित जीवन जीबैत अछि। ओ भौतिक वस्तुसँ स्वाभाविक वैराग्य प्रदर्शित क' सकैत छथि, बाह्य उपलब्धिसँ बेसी आन्तरिक विकासमे सन्तुष्टि पाबैत छथि। हुनकर करियरमे शिक्षण, उपचार वा आध्यात्मिक नेतृत्व शामिल भ' सकैत अछि, आ सम्बन्ध गम्भीर होइत अछि, सतहीपनक अपेक्षा आध्यात्मिक सम्बन्धक खोज करैत अछि। ई अन्तर्निहित स्वभाव हुनका धर्मक मार्ग दिस अग्रसर करैत अछि।
ई योगक प्रभाव सामान्यतः द्वादशेशक दशा वा अन्तर्दशामे, ओकरा देखनिहार ग्रहक दशामे, वा प्रथमेश वा नवमेशक दशामे सक्रिय होइत अछि। ई काल प्रायः महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अनुभव वा जीवन बदलनिहार अन्तर्दृष्टि लबैत अछि।