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प्रव्रज्यायोगः
निर्माण नियम
एक भावमे ४ वा अधिक ग्रह मिलि स्टेलियम बनबैत अछि
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
प्रव्रज्या योग आध्यात्मिक जीवन आ सांसारिक आसक्तिक त्यागक प्रबल प्रवृत्तिक संकेत दैत अछि। जखन ४ वा अधिक ग्रह एकहि भावमे केन्द्रित होइत छथि, तखन जातक प्रचलित जीवनशैली त्यागि आध्यात्मिक साधना, संन्यास, वा वैराग्यक दिस जा सकैत अछि।
आध्यात्मिक आह्वान
संन्यासक प्रवृत्ति, आध्यात्मिक अन्वेषण, मठवासी जीवन।
प्रव्रज्या योग वला व्यक्ति प्रायः पारंपरिक करियर मार्ग आ भौतिक संचयमे गहिर रुचि नहि रखैत छथि, जाहि सँ ओ लोकनि अपरंपरागत जीवन विकल्प चुनैत छथि। एकाकीपन वा आध्यात्मिक अनासक्तिके लेल गहिर लालसाक कारण हुनकर संबंध तनावपूर्ण भ' सकैत अछि, जाहि सँ दीर्घकालिक सांसारिक प्रतिबद्धता कठिन भ' जाइत अछि। ई स्वभाव सामान्यतः एकटा चिंतनशील, आत्मनिरीक्षक प्रकृतिक रूपमे प्रकट होइत अछि, जेकरा प्रायः सामाजिक मानदण्डसँ विरक्त वा उदासीन मानल जाइत अछि, आ बाह्य सफलताक तुलनामे आंतरिक अनुभवके प्राथमिकता देल जाइत अछि।
प्रव्रज्या योगक प्रभाव सामान्यतः स्टेलियममे सम्मिलित ग्रहसभक महादशा वा अन्तर्दशा कालमे प्रबल रूपसँ प्रकट होइत अछि, विशेषतः ओहि ग्रहसभक जेकर प्रभाव सबसँ बेसी वा अंश सबसँ अधिक हो। शनि, केतु, वा स्टेलियमक डिस्पोजिटरक काल सेहो एहि गहन आध्यात्मिक आकर्षणकेँ सक्रिय कऽ सकैत अछि।