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प्रकृति · देह मानचित्र · स्वास्थ्य समयरेखा · रोग प्रारूप
अपनी जन्म कुण्डली से अपनी आयुर्वेदिक प्रकृति, देह असुरक्षा मानचित्र और स्वास्थ्य असुरक्षा काल जानें।
चिकित्सा ज्योतिष एक प्राचीन विद्या है जो जन्म के समय ग्रहों की स्थिति को व्यक्ति की शारीरिक संरचना और स्वास्थ्य प्रवृत्तियों से जोड़ती है।
आयुर्वेद तीन मूलभूत जैव-ऊर्जाओं की पहचान करता है। वात के स्वामी शनि और राहु हैं। पित्त के स्वामी सूर्य और मंगल हैं। कफ के स्वामी चन्द्र, गुरु और शुक्र हैं।
ज्योतिष में छठा भाव रोग, आठवाँ दीर्घकालिक रोग और बारहवाँ अस्पताल से सम्बन्धित है।
प्रकृति की अवधारणा ज्योतिष और आयुर्वेद के बीच सेतु है।
विंशोत्तरी दशा में जब 6वें, 8वें या 12वें भाव का स्वामी ग्रह सक्रिय होता है, तो स्वास्थ्य कमजोरियाँ प्रकट हो सकती हैं।
यह उपकरण शास्त्रीय BPHS भाव-आधारित विश्लेषण लागू करता है।
यह पारम्परिक वैदिक ज्ञान केवल आत्म-जागरूकता के लिए है। यह चिकित्सा परामर्श नहीं है।