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जन्म कुण्डली सँ स्वास्थ्य कमजोरी, चिकित्सा घटनाक समय आ शारीरिक प्रकृति बुझबाक प्राचीन विज्ञान।
प्रत्येक राशि शरीरक एक विशेष भागकेँ नियन्त्रित करैत अछि। ई "ज्योतिष पुरुष" (मेलोथेसिया) प्राचीन मानचित्रण अछि।
Ayurvedic constitution types (Vata, Pitta, Kapha) that map to astrological elements
लग्न आ लग्नेश अहाँक समग्र शारीरिक संरचना, प्राकृतिक जीवनशक्ति आ रोग प्रतिरोधक क्षमता निर्धारित करैत अछि।
शत्रु भावमे रोग सेहो शत्रु अछि। षष्ठेश, एतय ग्रह आ दृष्टि रोग प्रकार देखबैत अछि। शक्तिशाली छठम = रोग पर विजय।
दीर्घकालिक स्थिति, शल्यचिकित्सा, जीवन-संकट। अष्टम भाव आयु गुणवत्ता देखबैत अछि। पीड़ित अष्टम = अचानक स्वास्थ्य संकट।
लम्बा अस्पताल प्रवास, शय्याग्रस्त अवधि, उपचार खर्च। शुभ ग्रहक संग शक्तिशाली द्वादश = एकान्तमे नीक स्वास्थ्य लाभ।
प्रत्येक ग्रह विशिष्ट अंग आ तन्त्रक कारक अछि। पीड़ित भेला पर सम्बन्धित रोग उत्पन्न होइत अछि:
| ग्रह | शरीर भाग | पीड़ित भेला पर रोग |
|---|---|---|
| सूर्य | हृदय, नेत्र, हड्डी, जीवनशक्ति | हृदय रोग, नेत्र रोग, जीवनशक्ति क्षीण, तीव्र ज्वर |
| चन्द्र | मन, रक्त, तरल, स्तन | अवसाद, चिन्ता, जलधारण, हार्मोनल असन्तुलन |
| मंगल | रक्त, मांसपेशी, मुड़ी, पित्त | दुर्घटना, शल्यक्रिया, ज्वर, सूजन, जलन |
| बुध | त्वचा, तन्त्रिका तन्त्र, वाणी | त्वचा रोग, तन्त्रिका विकार, हकलाहट, एलर्जी |
| गुरु | यकृत, वसा, कान, बुद्धि | मधुमेह, मोटापा, यकृत रोग, अर्बुद |
| शुक्र | गुर्दा, प्रजनन, मुख | गुर्दाक पथरी, यौन रोग, मधुमेह, त्वचा रोग |
| शनि | हड्डी, जोड़, दाँत, दीर्घकालिक | गठिया, दीर्घकालिक दर्द, पक्षाघात, अवसाद |
| राहु | विष, रहस्यमय रोग | भय, अज्ञात रोग, विषाक्तता, व्यसन |
| केतु | संक्रमण, विषाणु, आध्यात्मिक | अज्ञात ज्वर, स्वप्रतिरक्षी, शल्यक्रिया जटिलता |
अहाँक लग्न राशि अहाँक शारीरिक प्रकृति आ कमजोरी निर्धारित करैत अछि:
रोग कहिया प्रकट होएत, ई जानबाक लेल दशा आ गोचर दूनू देखू:
प्रमुख स्वास्थ्य चेतावनी काल। विशिष्ट रोग एहि भावक स्वामी ग्रह पर निर्भर।
दीर्घकालिक रोग चरम पर। शनि धीमे विकसित होइबाला, लगातार स्वास्थ्य समस्या अनैत अछि।
तीव्र बीमारी, दुर्घटना जोखिम, शल्यक्रिया। मंगल अचानक तीव्र स्वास्थ्य घटना अनैत अछि।
प्रमुख स्वास्थ्य मोड़। जन्म चन्द्र वा लग्न अंशक 5 अंश भीतर ग्रहण 6 मासमे महत्त्वपूर्ण चिकित्सा घटना।
कुण्डलीमे तत्त्वक प्रभुत्व अहाँक आयुर्वेदिक प्रकृति (दोष) निर्धारित करैत अछि:
अग्नि राशि प्रबल
मेष, सिंह, धनु
उष्णता, सूजन, तीव्र पाचन, क्रोध, अम्लता, त्वचा रोग
पृथ्वी राशि प्रबल
वृषभ, कन्या, मकर
मन्द चयापचय, वजन वृद्धि, जमाव, निष्ठा, स्थिरता
वायु राशि प्रबल
मिथुन, तुला, कुम्भ
तन्त्रिका ऊर्जा, शुष्कता, चिन्ता, जोड़ दर्द, वायु, अनिद्रा
जल राशि प्रबल
कर्क, वृश्चिक, मीन
भावनात्मक, जलधारण, शोथ, हार्मोनल संवेदनशीलता
गणना विधि: सूर्य सँ केतु धरि सभ 9 ग्रहक राशि देखू। जाहि तत्त्व (अग्नि/पृथ्वी/वायु/जल)मे सबसँ बेसी ग्रह होइ, ओ अहाँक प्रमुख प्रकृति अछि। लग्न आ चन्द्र राशिकेँ दोहरा भार दिअ।