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शुक्ल प्रतिपदा अग्नि, जे आगि, शुद्धि, आ नव शुरुआतक देवता छथि, क शासन अछि। ई तिथि नव परियोजना शुरू करबाक लेल, अभिषेक करबाक लेल, आ महत्वपूर्ण कार्य शुरू करबाक लेल अत्यंत शुभ अछि। एकर प्रकृति विकास आ नव शुरुआत के समर्थन करैत अछि। एकटा पारंपरिक अनुष्ठान चैत्र नवरात्रि जकाँ प्रमुख त्योहारक शुरुआत अछि, जे आध्यात्मिक नवीकरण आ भक्तिक अवधि के चिह्नित करैत अछि। ई भविष्यक सफलताक बीज रोपण के लेल आदर्श अछि।
शुक्ल प्रतिपदा, जे अग्नि के लेल समर्पित अछि, नव कार्य ओ शुभ शुरुआत के लेल आदर्श अछि। लोककेँ अग्नि पूजा वा होम करबाक चाही, घी के दीप जरायब ओ शुद्धता ओ सफलता के लेल प्रार्थना करब चाही। आंशिक उपवास राखब, मात्र दूध ओ फल के सेवन करब, अनुशंसित अछि। लम्बा यात्रा शुरू करबा सँ, महत्वपूर्ण वित्तीय निर्णय लेबा सँ, वा विवाद मे पड़बा सँ बचब महत्वपूर्ण अछि, कारण ई सब अस्थिरता के कारण बनि सकैत अछि। मांसाहारी भोजन, प्याज, वा लहसुन के सेवन सँ बचू। पारंपरिक मंत्र 'ॐ अग्नि देवाय नमः' वा दिव्य आशीर्वाद के लेल शक्तिशाली गायत्री मंत्र के जप करब चाही। दान के लेल, ब्राह्मणक वा मंदिर मे घी, चावल ओ गेहूं जेकाँ अनाज के दान करब अत्यंत लाभकारी अछि, जे समृद्धि ओ नव कार्यक लेल स्पष्ट मार्ग सुनिश्चित करैत अछि।
रवि दिनक स्वामी सूर्य (रवि) छथि, जे आत्मा, अधिकार आ जीवन-शक्ति केँ प्रतिनिधित्व करैत छथि। हिनक स्वभाव अग्नि तत्वक, शाही आ प्रकाशमान अछि, जे नेतृत्व आ स्वास्थ्य केँ दर्शाबैत अछि। ई दिन सरकारी काज, वरिष्ठ लोकनिक आशीर्वाद प्राप्त करबाक, आ नव उद्यम शुरू करबाक लेल शुभ अछि। ई सामान्यतः साहस आ आत्मविश्वासक आवश्यकता वला काजक लेल अनुकूल अछि। सूर्य केँ सम्मान देबाक लेल, भक्तगण सूर्य नमस्कार करैत छथि आ सूर्योदयक समय तांबाक पात्र सँ जल अर्पित करैत छथि, नीक स्वास्थ्य आ सफलताक कामना करैत। रवि दिन उपवास सेहो जीवन-शक्ति आ समृद्धिक लेल राखल जाइत अछि।
दरभंगा मे रवि दिन, 17 मई 2026 क तिथि प्रतिपदा, नक्षत्र कृत्तिका, योग शोभन ओ करण किंस्तुघ्न अछि। सूर्योदय 04:59, सूर्यास्त 18:26। राहु काल 16:45–18:26 धरि रहत अछि — एहि समय मे कोनो नव शुभ कार्य शुरू करबा सँ बचू।
| तिथि | प्रतिपदा |
| नक्षत्र | कृत्तिका |
| योग | शोभन |
| करण | किंस्तुघ्न |
| वार | रविवार |
| सूर्योदय | 04:59 |
| सूर्यास्त | 18:26 |
| राहु काल | 16:45 – 18:26 |
| अभिजीत मुहूर्त | 11:16 – 12:09 |
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हर शब्द के पीछे की शास्त्रीय परिभाषा, गणितीय आधार और व्यावहारिक प्रयोग।
चान्द्र दिवस — सूर्य-चन्द्र के बीच 12° का अन्तर। प्रति मास 30।
चान्द्र भवन — 27 तारकीय भाग, प्रत्येक 13°20' का।
27 सूर्य-चन्द्र संयोग; (सूर्य+चन्द्र) ÷ 13°20'।
अर्ध-तिथि (6° अन्तर)। विष्टि सहित 11 करण।
वार और स्वामी ग्रह। जूलियन दिवस से निर्धारित।
अशुभ 90 मिनट का काल। वार के अनुसार स्थान बदलता है।
महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शुभ काल।