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कृष्ण अष्टमी रुद्र, जे शिवक एकटा उग्र रूप छथि, बुराई के विनाश आ गहन परिवर्तन के प्रतिनिधित्व करैत अछि, सँ संबंधित अछि। ई तिथि आध्यात्मिक शुद्धि, नकारात्मकता के समाप्त करबाक लेल अनुष्ठान करबय, आ मुक्ति पाबय के लेल अत्यंत शक्तिशाली मानल जाइत अछि। ई सामान्यतः सांसारिक शुरुआत के लेल अशुभ अछि। एकटा महत्वपूर्ण अनुष्ठान कृष्ण जन्माष्टमी अछि, भगवान कृष्ण के जन्म के उत्सव मनाबय, जे बुराई पर भलाई के विजय आ दिव्य हस्तक्षेप के प्रतीक अछि।
कृष्ण अष्टमी, जे रुद्र (भगवान शिव) सँ संबंधित अछि, रक्षा ओ बुराई के विनाश के लेल मनाओल जाइत अछि। भक्त लोकनि रुद्राभिषेक ओ शिव पूजा करैत छथि, बेलपत्र ओ दूध चढ़ाबैत छथि। ई तिथि कृष्ण जन्माष्टमी के लेल सेहो महत्वपूर्ण अछि। शक्ति, रक्षा, वा आध्यात्मिक शुद्धि के आवश्यकता वाला कार्यक लेल ई शुभ अछि। तर्क-वितर्क सँ, नव कार्य शुरू करबा सँ, वा लम्बा यात्रा सँ बचू। मांस, शराब, वा तामसिक भोजन के सेवन सँ बचू। शक्तिशाली मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' वा 'ॐ नमो भगवते रुद्राय' के जप करब चाही। दान मे शिव मंदिरक वा भक्तक के दूध, जल, बेलपत्र, वा उज्जर वस्त्र दान करब शामिल अछि, जे दिव्य कृपा के लेल आशीर्वाद मांगैत अछि।
बृहस्पति दिनक स्वामी बृहस्पति (गुरु) छथि, जे ज्ञान, विद्या आ समृद्धिक प्रतिनिधित्व करैत छथि। हिनक स्वभाव परोपकारी, विस्तृत आ आध्यात्मिक अछि, जे शिक्षा आ सौभाग्य केँ प्रभावित करैत अछि। ई दिन आध्यात्मिक अभ्यास, शैक्षिक प्रयास, विवाह समारोह, आ गुरु वा बुजुर्ग लोकनिक आशीर्वाद प्राप्त करबाक लेल अत्यंत शुभ मानल जाइत अछि। ई सामान्यतः दीर्घकालिक परियोजना आ वित्तीय निवेश शुरू करबाक लेल अनुकूल अछि। बहुतो भक्तगण उपवास करैत छथि, भगवान विष्णु वा साई बाबाक पूजा करैत छथि, आ भजन करैत छथि, ज्ञान, धन आ वैवाहिक सुखक कामना करैत। पीयर वस्तु अर्पित करब सेहो एकटा सामान्य प्रथा अछि।
दरभंगा मे बृहस्पति दिन, 6 अगस्त 2026 क तिथि अष्टमी, नक्षत्र भरणी, योग गण्ड ओ करण बालव अछि। सूर्योदय 05:14, सूर्यास्त 18:29। राहु काल 13:31–15:11 धरि रहत अछि — एहि समय मे कोनो नव शुभ कार्य शुरू करबा सँ बचू।
| तिथि | अष्टमी |
| नक्षत्र | भरणी |
| योग | गण्ड |
| करण | बालव |
| वार | गुरुवार |
| सूर्योदय | 05:14 |
| सूर्यास्त | 18:29 |
| राहु काल | 13:31 – 15:11 |
| अभिजीत मुहूर्त | 11:25 – 12:18 |
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हर शब्द के पीछे की शास्त्रीय परिभाषा, गणितीय आधार और व्यावहारिक प्रयोग।
चान्द्र दिवस — सूर्य-चन्द्र के बीच 12° का अन्तर। प्रति मास 30।
चान्द्र भवन — 27 तारकीय भाग, प्रत्येक 13°20' का।
27 सूर्य-चन्द्र संयोग; (सूर्य+चन्द्र) ÷ 13°20'।
अर्ध-तिथि (6° अन्तर)। विष्टि सहित 11 करण।
वार और स्वामी ग्रह। जूलियन दिवस से निर्धारित।
अशुभ 90 मिनट का काल। वार के अनुसार स्थान बदलता है।
महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शुभ काल।