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शुक्ल चतुर्दशी शिव, जे परिवर्तन, विघटन, आ आध्यात्मिक मुक्ति के देवता छथि, के समर्पित अछि। ई तिथि आध्यात्मिक अभ्यास, तपस्या, आ सांसारिक आसक्ति सँ मुक्ति पाबय के लेल अत्यंत शक्तिशाली मानल जाइत अछि। ई सामान्यतः नव भौतिक उद्यम शुरू करबाक लेल टालल जाइत अछि। एकटा पारंपरिक अनुष्ठान मासिक शिवरात्रि अछि, जतय भक्त उपवास करैत छथि आ भगवान शिव के पूजा करैत छथि आध्यात्मिक योग्यता प्राप्त करबाक लेल, नकारात्मकता पर विजय पाबय के लेल, आ मोक्ष प्राप्त करबाक लेल।
शुक्ल चतुर्दशी, जे भगवान शिव के लेल समर्पित अछि, आध्यात्मिक शुद्धि ओ दिव्य आशीर्वाद के लेल मनाओल जाइत अछि। भक्त लोकनि शिव पूजा करैत छथि, बेलपत्र, दूध, ओ जल चढ़ाबैत छथि। आध्यात्मिक अभ्यास, ध्यान, ओ मोक्ष खोजबाक लेल ई शुभ अछि। मांस, शराब, वा विवाद मे पड़बा सँ बचू। नकारात्मक विचार वा कार्य सँ बचू। 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र के बार-बार जप करब चाही। दान मे शिव मंदिरक वा भक्तक के दूध, जल, बेलपत्र, वा उज्जर वस्त्र दान करब शामिल अछि। ई दिन आंतरिक शांति ओ दिव्य संबंध खोजनिहारक लेल महत्वपूर्ण अछि, जे पूर्णिमा के लेल तैयारी करैत छथि।
बृहस्पति दिनक स्वामी बृहस्पति (गुरु) छथि, जे ज्ञान, विद्या आ समृद्धिक प्रतिनिधित्व करैत छथि। हिनक स्वभाव परोपकारी, विस्तृत आ आध्यात्मिक अछि, जे शिक्षा आ सौभाग्य केँ प्रभावित करैत अछि। ई दिन आध्यात्मिक अभ्यास, शैक्षिक प्रयास, विवाह समारोह, आ गुरु वा बुजुर्ग लोकनिक आशीर्वाद प्राप्त करबाक लेल अत्यंत शुभ मानल जाइत अछि। ई सामान्यतः दीर्घकालिक परियोजना आ वित्तीय निवेश शुरू करबाक लेल अनुकूल अछि। बहुतो भक्तगण उपवास करैत छथि, भगवान विष्णु वा साई बाबाक पूजा करैत छथि, आ भजन करैत छथि, ज्ञान, धन आ वैवाहिक सुखक कामना करैत। पीयर वस्तु अर्पित करब सेहो एकटा सामान्य प्रथा अछि।
दरभंगा मे बृहस्पति दिन, 27 अगस्त 2026 क तिथि चतुर्दशी, नक्षत्र धनिष्ठा, योग शोभन ओ करण वणिज अछि। सूर्योदय 05:24, सूर्यास्त 18:11। राहु काल 13:23–14:59 धरि रहत अछि — एहि समय मे कोनो नव शुभ कार्य शुरू करबा सँ बचू।
| तिथि | चतुर्दशी |
| नक्षत्र | धनिष्ठा |
| योग | शोभन |
| करण | वणिज |
| वार | गुरुवार |
| सूर्योदय | 05:24 |
| सूर्यास्त | 18:11 |
| राहु काल | 13:23 – 14:59 |
| अभिजीत मुहूर्त | 11:22 – 12:13 |
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हर शब्द के पीछे की शास्त्रीय परिभाषा, गणितीय आधार और व्यावहारिक प्रयोग।
चान्द्र दिवस — सूर्य-चन्द्र के बीच 12° का अन्तर। प्रति मास 30।
चान्द्र भवन — 27 तारकीय भाग, प्रत्येक 13°20' का।
27 सूर्य-चन्द्र संयोग; (सूर्य+चन्द्र) ÷ 13°20'।
अर्ध-तिथि (6° अन्तर)। विष्टि सहित 11 करण।
वार और स्वामी ग्रह। जूलियन दिवस से निर्धारित।
अशुभ 90 मिनट का काल। वार के अनुसार स्थान बदलता है।
महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शुभ काल।