आमलकी एकादशी 2026
आमलकी एकादशी 2026 का पर्व शुक्रवार, शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026.
आमलकी एकादशी 2026 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026
2026 पंचांग संदर्भ
वार
शुक्रवार
विक्रम संवत्
2083
शक संवत्
1948
इस वर्ष आमलकी एकादशी शुक्रवार को पड़ रहा है, 2025 (2025-03-10) से 11 दिन पहले — सामान्य चन्द्र-पंचांग बदलाव।
Falling on a Friday gives the day a Shukra emphasis — relationship-related rites and white/silver offerings carry extra weight, traditionally favourable for women's vratas.
The 2025 observance fell on Monday, 2025-03-10 — this year arrives 11 days earlier in the Gregorian calendar, the familiar 11-day shift of the unmodified lunar year.
Looking ahead to 2027, Amalaki Ekadashi will fall on Thursday, 2027-03-18 (19 days later than this year). So planning ritual schedules across years means anchoring to the tithi rather than the Gregorian date.
Astronomical context for Amalaki Ekadashi 2026
On Friday, February 27, 2026, sunrise in Delhi (the reference city for this page) falls at 06:48 IST and sunset at 18:19 IST — a daylight span of 11h 31m. Across the six pan-Indian cities tabulated below, sunrise on this date varies from 05:59 (Kolkata) at the eastern edge to 06:59 (Mumbai) in the west — a 60-minute difference that drives the city-by-city muhurat shift you see in the table.
For Amalaki Ekadashi 2026, the central rite of उदय तिथि (सूर्योदय) depends on the festival tithi being present during that window on 2026-02-27 — confirmed across 6 reference cities in this year's computation pass. Cities further east (Kolkata, Chennai) see the window open ~15-25 minutes before Delhi; cities west of Delhi (Mumbai, Pune, Bangalore) see it start later by a similar margin.
आमलकी एकादशी 2026 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 6:48 AM | 6:19 PM |
| मुंबई | 6:59 AM | 6:43 PM |
| बेंगलुरु | 6:36 AM | 6:28 PM |
| चेन्नई | 6:26 AM | 6:17 PM |
| कोलकाता | 5:59 AM | 5:39 PM |
| पुणे | 6:55 AM | 6:39 PM |
यह तिथि क्यों?
Amalaki Ekadashi उदय तिथि नियम का पालन करता है – जिस दिन आवश्यक तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो, उस दिन त्योहार मनाया जाता है। यह धर्मसिन्धु का सामान्य नियम है।
देवता
भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी (आमलकी निवासिनी)
कथा एवं इतिहास
आमलकी (आँवला) वृक्ष विष्णु के अश्रु से उत्पन्न माना जाता है और उन्हें सर्वप्रिय वृक्ष — लक्ष्मी इसमें वास करती हैं। विदिशा के राजा चित्रसेन ने आमलकी वृक्ष के नीचे यह एकादशी व्रत किया, पूजा और परिक्रमा… पूरी कथा पढ़ें →कम दिखाएँ ↑
आमलकी (आँवला) वृक्ष विष्णु के अश्रु से उत्पन्न माना जाता है और उन्हें सर्वप्रिय वृक्ष — लक्ष्मी इसमें वास करती हैं। विदिशा के राजा चित्रसेन ने आमलकी वृक्ष के नीचे यह एकादशी व्रत किया, पूजा और परिक्रमा की। नगर पर आक्रमण करने वाले दैत्य उनके व्रत के पुण्य से नष्ट हुए। ब्रह्माण्ड पुराण में माहात्म्य है। आमलकी को आँवला नवमी / आँवला एकादशी भी कहते हैं।
कैसे मनाएँ
यदि सम्भव हो तो आमलकी वृक्ष के नीचे पूजा करें। वृक्ष मूल में जल, दूध, पुष्प, तुलसी अर्पित करें, फिर विष्णु मन्त्र जपते हुए 108 परिक्रमा। व्रत में आँवला फल का सेवन कर सकते हैं (एकादशी संकल्प भंग नहीं होता)। पारण पर आँवले से व्रत तोड़ें। आँवला पौधे या फल दान दें। यह व्रत विष्णु पूजा को वृक्ष भक्ति के साथ जोड़ता है।
महत्व
फाल्गुन शुक्ल में पड़ती है — वसन्त ऋतु — जब आँवले फलते हैं। आँवले में लक्ष्मी वास के कारण यह एकादशी धन, पारिवारिक समृद्धि, और दीर्घायु से विशेष जुड़ी है। कुछ दिन बाद होली है; आमलकी प्रायः होली-पूर्व उत्सव की शुरुआत है। वृक्ष पारिस्थितिकी (वृक्षारोपण और पूजा) को विष्णु-लक्ष्मी भक्ति से जोड़ने वाली अत्यन्त सुन्दर एकादशी।
व्रत
एकादशी व्रत – अन्न/दाल वर्जित। आँवला सेवनीय। द्वादशी प्रातः आँवले से पारण।
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