बुद्ध पूर्णिमा 2029
बुद्ध पूर्णिमा 2029 का पर्व रविवार, रविवार, 27 मई 2029. तिथि: vaishakha shukla 15.
बुद्ध पूर्णिमा 2029 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
रविवार, 27 मई 2029
2029 पंचांग संदर्भ
वार
रविवार
विक्रम संवत्
2086
शक संवत्
1951
इस वर्ष बुद्ध पूर्णिमा रविवार को पड़ रहा है, 2028 (2028-05-08) से 19 दिन बाद — सामान्य चन्द्र-पंचांग बदलाव।
Falling on a Sunday gives the day a Surya emphasis — Sun-ruled rites and copper offerings carry extra weight.
The 2028 observance fell on Monday, 2028-05-08 — this year arrives 19 days later in the Gregorian calendar, the Adhika-masa pattern when an intercalary lunar month pushes the cycle forward.
Looking ahead to 2030, Buddha Purnima will fall on Thursday, 2030-05-16 (11 days earlier than this year). So planning ritual schedules across years means anchoring to the tithi rather than the Gregorian date.
Astronomical context for Buddha Purnima 2029
On Sunday, May 27, 2029, sunrise in Delhi (the reference city for this page) falls at 05:25 IST and sunset at 19:11 IST — a daylight span of 13h 46m. Across the six pan-Indian cities tabulated below, sunrise on this date varies from 04:52 (Kolkata) at the eastern edge to 06:00 (Mumbai) in the west — a 68-minute difference that drives the city-by-city muhurat shift you see in the table.
For Buddha Purnima 2029, the central rite of उदय तिथि (सूर्योदय) depends on the Vaishakha Shukla 15 being present during that window on 2029-05-27 — confirmed across 6 reference cities in this year's computation pass. Cities further east (Kolkata, Chennai) see the window open ~15-25 minutes before Delhi; cities west of Delhi (Mumbai, Pune, Bangalore) see it start later by a similar margin.
बुद्ध पूर्णिमा 2029 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 5:25 AM | 7:11 PM |
| मुंबई | 6:00 AM | 7:10 PM |
| बेंगलुरु | 5:52 AM | 6:41 PM |
| चेन्नई | 5:41 AM | 6:30 PM |
| कोलकाता | 4:52 AM | 6:15 PM |
| पुणे | 5:57 AM | 7:05 PM |
यह तिथि क्यों?
Buddha Purnima उदय तिथि नियम का पालन करता है – जिस दिन आवश्यक तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो, उस दिन त्योहार मनाया जाता है। यह धर्मसिन्धु का सामान्य नियम है।
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- बुद्ध मूर्ति या चित्र
- अगरबत्ती
- घी का दीपक
- सफ़ेद फूल (कमल, चमेली)
- बोधि वृक्ष के पत्ते या शाखा
पूजा के चरण
- 1
स्नान एवं तैयारी
सूर्योदय से पहले जागें, स्वच्छ जल से स्नान करें। पवित्रता के प्रतीक के रूप में सफ़ेद या हल्के रंग के वस्त्र पहनें। पूजा ...
- 2
तिसरण (तीन शरण)
तीन शरण लें: बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि, संघं शरणं गच्छामि। यह पूजा की आध्यात्मिक नींव स्थापित करता है।
- 3
पुष्प एवं दीप अर्पण
बुद्ध मूर्ति पर सफ़ेद फूल (विशेषकर कमल) चढ़ाएँ। घी का दीपक और धूप जलाएँ। दीपक अज्ञान के अन्धकार को दूर करने वाले ज्ञान क...
फल (लाभ)
बुद्ध पूर्णिमा की पूजा ज्ञान, करुणा और आन्तरिक शान्ति विकसित करती है। यह नकारात्मक कर्मों का नाश करती है, दुख कम करती है और भक्त को बोधि की ओर ले जाती है। इस दिन दान का अनेक गुणा पुण्य होता है।
देवता
गौतम बुद्ध (विष्णु अवतार)
कथा एवं इतिहास
बुद्ध पूर्णिमा गौतम बुद्ध के जीवन की तीन प्रमुख घटनाओं का उत्सव है – जन्म, बोधिप्राप्ति और महापरिनिर्वाण – तीनों वैशाख पूर्णिमा को हुईं। हिन्दू परम्परा में बुद्ध को विष्णु का नवम अवतार माना जाता ह… पूरी कथा पढ़ें →कम दिखाएँ ↑
बुद्ध पूर्णिमा गौतम बुद्ध के जीवन की तीन प्रमुख घटनाओं का उत्सव है – जन्म, बोधिप्राप्ति और महापरिनिर्वाण – तीनों वैशाख पूर्णिमा को हुईं। हिन्दू परम्परा में बुद्ध को विष्णु का नवम अवतार माना जाता है।
कैसे मनाएँ
बौद्ध विहारों में दर्शन करें, दीप जलाएँ और ध्यान करें। पञ्चशील का विशेष पालन करें। हिन्दू परम्परा में बुद्ध अवतार की पूजा करें। करुणा, दान और अहिंसा पर बल दें।
महत्व
बुद्ध पूर्णिमा ज्ञान, करुणा और मध्यम मार्ग का परम प्रतीक है। यह स्मरण कराती है कि सम्यक् प्रयास से बोधि प्राप्त हो सकती है।
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