चैत्र नवरात्रि 2029
चैत्र नवरात्रि 2029 का पर्व शनिवार, शनिवार, 14 अप्रैल 2029. तिथि: chaitra shukla 1.
चैत्र नवरात्रि 2029 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
शनिवार, 14 अप्रैल 2029
2029 पंचांग संदर्भ
वार
शनिवार
विक्रम संवत्
2086
शक संवत्
1951
इस वर्ष चैत्र नवरात्रि शनिवार को पड़ रहा है, 2028 (2028-03-27) से 18 दिन बाद — सामान्य चन्द्र-पंचांग बदलाव।
Falling on a Saturday brings a Shani emphasis — ancestral rites and black-sesame offerings carry extra weight, mitigating Shani's shadow.
The 2028 observance fell on Monday, 2028-03-27 — this year arrives 18 days later in the Gregorian calendar, the Adhika-masa pattern when an intercalary lunar month pushes the cycle forward.
Looking ahead to 2030, Chaitra Navratri will fall on Wednesday, 2030-04-03 (11 days earlier than this year). So planning ritual schedules across years means anchoring to the tithi rather than the Gregorian date.
Astronomical context for Chaitra Navratri 2029
On Saturday, April 14, 2029, sunrise in Delhi (the reference city for this page) falls at 05:56 IST and sunset at 18:46 IST — a daylight span of 12h 50m. Across the six pan-Indian cities tabulated below, sunrise on this date varies from 05:17 (Kolkata) at the eastern edge to 06:22 (Mumbai) in the west — a 65-minute difference that drives the city-by-city muhurat shift you see in the table.
For Chaitra Navratri 2029, the central rite of उदय तिथि (सूर्योदय) depends on the Chaitra Shukla 1 being present during that window on 2029-04-14 — confirmed across 6 reference cities in this year's computation pass. Cities further east (Kolkata, Chennai) see the window open ~15-25 minutes before Delhi; cities west of Delhi (Mumbai, Pune, Bangalore) see it start later by a similar margin.
चैत्र नवरात्रि 2029 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 5:56 AM | 6:46 PM |
| मुंबई | 6:22 AM | 6:55 PM |
| बेंगलुरु | 6:07 AM | 6:32 PM |
| चेन्नई | 5:56 AM | 6:21 PM |
| कोलकाता | 5:17 AM | 5:56 PM |
| पुणे | 6:18 AM | 6:51 PM |
यह तिथि क्यों?
Chaitra Navratri उदय तिथि नियम का पालन करता है – जिस दिन आवश्यक तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो, उस दिन त्योहार मनाया जाता है। यह धर्मसिन्धु का सामान्य नियम है।
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- कलश (ताँबा/पीतल)
- आम के पत्ते(5-7)
- नारियल (छिलके सहित)(1)
- लाल चुनरी
- जौ के बीज
पूजा के चरण
- 1
घटस्थापना (कलश स्थापना)
पूजा स्थल साफ करें। मिट्टी के बर्तन में शुद्ध मिट्टी भरकर जौ के बीज बोएँ। कलश में जल भरें, किनारे पर आम के पत्ते रखें और...
- 2
अखण्ड ज्योति
कलश के पास अखण्ड ज्योति जलाएँ। यह दीपक नवरात्रि की सभी 9 दिन और रातों में लगातार जलता रहना चाहिए। घी या तिल के तेल का उप...
- 3
संकल्प
दाहिने हाथ में जल और अक्षत लें। अपना नाम, गोत्र, तिथि (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) बताएँ और 9 दिनों तक नवदुर्गा पूजा का संकल्प...
व्रत फल (उपवास के लाभ)
चैत्र नवरात्रि दुर्गा के सभी नौ रूपों का संयुक्त आशीर्वाद प्रदान करती है – शक्ति, ज्ञान, साहस, समृद्धि, स्वास्थ्य, दुष्टों से रक्षा, आध्यात्मिक प्रगति, विघ्न निवारण और मनोकामना पूर्ति। अंकुरित जौ आने वाले वर्ष में वृद्धि और समृद्धि का प्रतीक है।
देवता
देवी दुर्गा (नवदुर्गा)
कथा एवं इतिहास
चैत्र नवरात्रि चैत्र मास में देवी दुर्गा की नौ रातों की उपासना है। देवीमाहात्म्य के अनुसार देवी ने नवदुर्गा रूपों में महिषासुर का वध किया। यह हिन्दू नववर्ष (विक्रम संवत्) का आरम्भ भी है और नवमी को राम… पूरी कथा पढ़ें →कम दिखाएँ ↑
चैत्र नवरात्रि चैत्र मास में देवी दुर्गा की नौ रातों की उपासना है। देवीमाहात्म्य के अनुसार देवी ने नवदुर्गा रूपों में महिषासुर का वध किया। यह हिन्दू नववर्ष (विक्रम संवत्) का आरम्भ भी है और नवमी को राम नवमी मनायी जाती है।
कैसे मनाएँ
प्रतिपदा को घटस्थापना करें – कलश में आम के पत्ते और नारियल स्थापित करें, मिट्टी में जौ बोएँ। प्रतिदिन नवदुर्गा के एक रूप की पूजा करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। नौ दिन व्रत रखें। कन्या पूजन से समापन करें।
महत्व
चैत्र नवरात्रि हिन्दू नववर्ष और वसन्त आगमन का प्रतीक है। नई शुरुआत, साधना और देवी कृपा के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है।
व्रत
नौ दिन फल, साबूदाना और कुट्टू का व्रत। कुछ लोग केवल पहले और अन्तिम दिन व्रत रखते हैं।
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