देवशयनी एकादशी 2027
देवशयनी एकादशी 2027 का पर्व बुधवार, बुधवार, 14 जुलाई 2027.
देवशयनी एकादशी 2027 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
बुधवार, 14 जुलाई 2027
2027 पंचांग संदर्भ
वार
बुधवार
विक्रम संवत्
2084
शक संवत्
1949
इस वर्ष देवशयनी एकादशी बुधवार को पड़ रहा है, 2026 (2026-07-25) से 11 दिन पहले — सामान्य चन्द्र-पंचांग बदलाव।
Falling on a Wednesday gives the day a Budha emphasis — learning-related rites and green offerings carry extra weight, traditionally favourable for new study.
The 2026 observance fell on Saturday, 2026-07-25 — this year arrives 11 days earlier in the Gregorian calendar, the familiar 11-day shift of the unmodified lunar year.
Looking ahead to 2028, Devshayani Ekadashi will fall on Sunday, 2028-07-02 (11 days earlier than this year). So planning ritual schedules across years means anchoring to the tithi rather than the Gregorian date.
Astronomical context for Devshayani Ekadashi 2027
On Wednesday, July 14, 2027, sunrise in Delhi (the reference city for this page) falls at 05:32 IST and sunset at 19:21 IST — a daylight span of 13h 49m. Across the six pan-Indian cities tabulated below, sunrise on this date varies from 05:00 (Kolkata) at the eastern edge to 06:08 (Mumbai) in the west — a 68-minute difference that drives the city-by-city muhurat shift you see in the table.
For Devshayani Ekadashi 2027, the central rite of उदय तिथि (सूर्योदय) depends on the festival tithi being present during that window on 2027-07-14 — confirmed across 6 reference cities in this year's computation pass. Cities further east (Kolkata, Chennai) see the window open ~15-25 minutes before Delhi; cities west of Delhi (Mumbai, Pune, Bangalore) see it start later by a similar margin.
देवशयनी एकादशी 2027 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 5:32 AM | 7:21 PM |
| मुंबई | 6:08 AM | 7:19 PM |
| बेंगलुरु | 6:00 AM | 6:50 PM |
| चेन्नई | 5:49 AM | 6:39 PM |
| कोलकाता | 5:00 AM | 6:24 PM |
| पुणे | 6:05 AM | 7:14 PM |
यह तिथि क्यों?
Devshayani Ekadashi उदय तिथि नियम का पालन करता है – जिस दिन आवश्यक तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो, उस दिन त्योहार मनाया जाता है। यह धर्मसिन्धु का सामान्य नियम है।
पूजा विधि
पूजा के चरण
- 1
एकादशी व्रत
पिछली शाम (दशमी) से निर्जला (जलरहित) या फलाहार (केवल फल) व्रत आरम्भ करें। एकादशी को सूर्योदय से पहले उठें, स्नान करें, औ...
- 2
विष्णु पूजा
स्वच्छ वेदी पर विष्णु मूर्ति स्थापित करें। मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएँ। पीला वस्त्र पहनाएँ। चन्दन तिलक लगाएँ। तुलसी...
- 3
चातुर्मास संकल्प
चातुर्मास का संकल्प लें – अगले चार माह तक उन्नत आध्यात्मिक अनुशासन पालने का निश्चय करें। पारम्परिक रूप से इसमें अतिरिक...
व्रत फल (उपवास के लाभ)
देवशयनी एकादशी सभी एकादशी व्रतों के संयुक्त पुण्य प्रदान करती है। इस दिन से आरम्भ होने वाला चातुर्मास आध्यात्मिक विकास को गति देता है, विष्णु कृपा प्रदान करता है, और मोक्ष देने वाला कहा जाता है। चातुर्मास में दिया गया दान बहुगुणित फल देता है।
देवता
भगवान विष्णु
कथा एवं इतिहास
इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग पर योगनिद्रा में जाते हैं। वे चार माह (चातुर्मास) तक देवउत्थानी एकादशी तक सोते हैं। इस अवधि में सभी शुभ कार्य रोक दिए जाते हैं।
कैसे मनाएँ
एकादशी व्रत रखें। चातुर्मास आरम्भ करें – चार माह तपस्या, अतिरिक्त प्रार्थना और धार्मिक अध्ययन। चातुर्मास में विवाह, यज्ञोपवीत आदि शुभ कार्य नहीं होते।
महत्व
चातुर्मास का आरम्भ – हिन्दू वर्ष की सबसे गहन आध्यात्मिक अवधि। साधु इन चार माह एक स्थान पर रहते हैं।
व्रत
एकादशी व्रत – अन्न/दाल वर्जित। द्वादशी प्रातः पारण करें।
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