दुर्गाष्टमी 2028
दुर्गाष्टमी 2028 का पर्व मंगलवार, मंगलवार, 26 सितंबर 2028. तिथि: ashwina shukla 8.
दुर्गाष्टमी 2028 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
मंगलवार, 26 सितंबर 2028
2028 पंचांग संदर्भ
वार
मंगलवार
विक्रम संवत्
2085
शक संवत्
1950
इस वर्ष दुर्गाष्टमी मंगलवार को पड़ रहा है, 2027 (2027-10-07) से 10 दिन पहले — सामान्य चन्द्र-पंचांग बदलाव।
Falling on a Tuesday gives the day a Mangal emphasis — courage-related rites and red offerings carry extra weight.
The 2027 observance fell on Thursday, 2027-10-07 — this year arrives 10 days earlier in the Gregorian calendar, the familiar 11-day shift of the unmodified lunar year.
Looking ahead to 2029, Durga Ashtami will fall on Sunday, 2029-10-14 (18 days later than this year). So planning ritual schedules across years means anchoring to the tithi rather than the Gregorian date.
Astronomical context for Durga Ashtami 2028
On Tuesday, September 26, 2028, sunrise in Delhi (the reference city for this page) falls at 06:11 IST and sunset at 18:12 IST — a daylight span of 12h 1m. Across the six pan-Indian cities tabulated below, sunrise on this date varies from 05:26 (Kolkata) at the eastern edge to 06:28 (Mumbai) in the west — a 62-minute difference that drives the city-by-city muhurat shift you see in the table.
For Durga Ashtami 2028, the central rite of उदय तिथि (सूर्योदय) depends on the Ashwina Shukla 8 being present during that window on 2028-09-26 — confirmed across 6 reference cities in this year's computation pass. Cities further east (Kolkata, Chennai) see the window open ~15-25 minutes before Delhi; cities west of Delhi (Mumbai, Pune, Bangalore) see it start later by a similar margin.
दुर्गाष्टमी 2028 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 6:11 AM | 6:12 PM |
| मुंबई | 6:28 AM | 6:30 PM |
| बेंगलुरु | 6:08 AM | 6:12 PM |
| चेन्नई | 5:58 AM | 6:01 PM |
| कोलकाता | 5:26 AM | 5:28 PM |
| पुणे | 6:24 AM | 6:27 PM |
यह तिथि क्यों?
Durga Ashtami उदय तिथि नियम का पालन करता है – जिस दिन आवश्यक तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो, उस दिन त्योहार मनाया जाता है। यह धर्मसिन्धु का सामान्य नियम है।
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- दुर्गा मूर्ति या चित्र
- हवन सामग्री
- घी (हवन के लिए)
- लाल फूल (गुड़हल, गुलाब)
- कुमकुम (सिन्दूर)
पूजा के चरण
- 1
तैयारी एवं स्नान
प्रातः उठें, स्नान करें और स्वच्छ लाल या नारंगी वस्त्र पहनें। ताज़े फूलों से पूजा स्थल सजाएँ और दुर्गा मूर्ति साफ करें। ...
- 2
संकल्प एवं दुर्गा पूजा
जल और अक्षत से संकल्प करें। देवी दुर्गा की षोडशोपचार पूजा करें: आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमनीय, स्नान, वस्त्र, गन्ध, ...
- 3
कन्या पूजन (9 कन्याओं की पूजा)
9 कन्याओं (2-10 वर्ष) को आमन्त्रित करें जो दुर्गा के 9 रूपों का प्रतिनिधित्व करती हैं: कुमारिका (2), त्रिमूर्ति (3), कल्...
फल (लाभ)
दुर्गा अष्टमी नवरात्रि का सबसे शक्तिशाली दिन माना जाता है। सही आचरण से सभी पापों और शत्रुओं का नाश होता है, दिव्य रक्षा, साहस और शक्ति मिलती है, मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और आध्यात्मिक प्रगति तीव्र होती है। सही समय पर सन्धि पूजा करने से पूरे वर्ष दुर्गा पूजा का पुण्य मिलता है।
देवता
देवी दुर्गा (महागौरी / चामुण्डा)
कथा एवं इतिहास
दुर्गाष्टमी, जिसे महाअष्टमी भी कहते हैं, नवरात्रि का आठवाँ दिन है जब देवी दुर्गा की उग्रतम रूप में महागौरी या चामुण्डा के रूप में पूजा होती है। इस दिन महिषासुर से युद्ध में दुर्गा का क्रोध चरम पर पहुँ… पूरी कथा पढ़ें →कम दिखाएँ ↑
दुर्गाष्टमी, जिसे महाअष्टमी भी कहते हैं, नवरात्रि का आठवाँ दिन है जब देवी दुर्गा की उग्रतम रूप में महागौरी या चामुण्डा के रूप में पूजा होती है। इस दिन महिषासुर से युद्ध में दुर्गा का क्रोध चरम पर पहुँचा और उन्होंने चण्ड-मुण्ड वध के लिए भयंकर चामुण्डा रूप प्रकट किया।
कैसे मनाएँ
कन्या पूजन करें – नौ कन्याओं (दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक) के पैर धोकर भोजन, वस्त्र और उपहार अर्पित करें। अस्त्र पूजा और आयुध पूजा करें – औजार, वाहन और शस्त्र साफ कर पूजे जाते हैं। हवन किया जाता है। अष्टमी-नवमी तिथि सन्धि पर सन्धि पूजा होती है।
महत्व
दुर्गाष्टमी नवरात्रि का सबसे शक्तिशाली दिन माना जाता है। अष्टमी-नवमी सन्धि पूजा सम्पूर्ण उत्सव का सबसे पवित्र अनुष्ठान है। दक्षिण भारत में इस दिन आयुध पूजा व्यापक रूप से मनायी जाती है।
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