जया एकादशी 2029
जया एकादशी 2029 का पर्व शुक्रवार, शुक्रवार, 26 जनवरी 2029.
जया एकादशी 2029 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
शुक्रवार, 26 जनवरी 2029
2029 पंचांग संदर्भ
वार
शुक्रवार
विक्रम संवत्
2086
शक संवत्
1951
इस वर्ष जया एकादशी शुक्रवार को पड़ रहा है, 2028 (2028-02-07) से 11 दिन पहले — सामान्य चन्द्र-पंचांग बदलाव।
Falling on a Friday gives the day a Shukra emphasis — relationship-related rites and white/silver offerings carry extra weight, traditionally favourable for women's vratas.
The 2028 observance fell on Monday, 2028-02-07 — this year arrives 11 days earlier in the Gregorian calendar, the familiar 11-day shift of the unmodified lunar year.
Looking ahead to 2030, Jaya Ekadashi will fall on Thursday, 2030-02-14 (19 days later than this year). So planning ritual schedules across years means anchoring to the tithi rather than the Gregorian date.
Astronomical context for Jaya Ekadashi 2029
On Friday, January 26, 2029, sunrise in Delhi (the reference city for this page) falls at 07:12 IST and sunset at 17:55 IST — a daylight span of 10h 43m. Across the six pan-Indian cities tabulated below, sunrise on this date varies from 06:17 (Kolkata) at the eastern edge to 07:14 (Mumbai) in the west — a 57-minute difference that drives the city-by-city muhurat shift you see in the table.
For Jaya Ekadashi 2029, the central rite of उदय तिथि (सूर्योदय) depends on the festival tithi being present during that window on 2029-01-26 — confirmed across 6 reference cities in this year's computation pass. Cities further east (Kolkata, Chennai) see the window open ~15-25 minutes before Delhi; cities west of Delhi (Mumbai, Pune, Bangalore) see it start later by a similar margin.
जया एकादशी 2029 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 7:12 AM | 5:55 PM |
| मुंबई | 7:14 AM | 6:28 PM |
| बेंगलुरु | 6:46 AM | 6:18 PM |
| चेन्नई | 6:35 AM | 6:07 PM |
| कोलकाता | 6:17 AM | 5:20 PM |
| पुणे | 7:09 AM | 6:25 PM |
विस्तृत स्थानीय समय, पूजा विधि व सामग्री सूची के लिए किसी भी शहर पर क्लिक करें
यह तिथि क्यों?
Jaya Ekadashi उदय तिथि नियम का पालन करता है – जिस दिन आवश्यक तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो, उस दिन त्योहार मनाया जाता है। यह धर्मसिन्धु का सामान्य नियम है।
देवता
भगवान विष्णु
कथा एवं इतिहास
इन्द्र के दो स्वर्गीय सेवक — गन्धर्व माल्यवान् और अप्सरा पुष्यवती — एक दिव्य सभा में नृत्य के समय परस्पर प्रेम में लीन हो शिष्टाचार भूल गये। क्रुद्ध इन्द्र ने उन्हें पिशाच रूप में पृथ्वी पर गिरा दिया।… पूरी कथा पढ़ें →कम दिखाएँ ↑
इन्द्र के दो स्वर्गीय सेवक — गन्धर्व माल्यवान् और अप्सरा पुष्यवती — एक दिव्य सभा में नृत्य के समय परस्पर प्रेम में लीन हो शिष्टाचार भूल गये। क्रुद्ध इन्द्र ने उन्हें पिशाच रूप में पृथ्वी पर गिरा दिया। हिमालय में भटकते हुए, संयोग से माघ शुक्ल एकादशी पर भोजन न मिलने से निराहार रहे और शीत से रात भर जागे। प्रातः विष्णु ने शाप मुक्त कर उन्हें स्वर्गीय रूप वापस दिया। पद्म पुराण में यह कथा है।
कैसे मनाएँ
एकादशी व्रत और जागरण करें। श्वेत पुष्पों से विष्णु पूजा — पाप मुक्ति का प्रतीक। विष्णु सहस्रनाम और माल्यवान्-पुष्यवती कथा का पाठ। पूर्व पाप के भार से ग्रस्त या कर्म जटिलताओं से मुक्ति चाहने वालों के लिए विशेष शक्तिशाली।
महत्व
जया = "विजय" — शत्रुओं, बाधाओं, और विशेषकर अहंकार-काम-अज्ञान जैसे आन्तरिक शत्रुओं पर विजय प्रदान करती है। माल्यवान्-पुष्यवती कथा का कोमल भाव: मानवीय भावों से पतित भी पुनः उद्धार पा सकते हैं। उत्तर भारत में माघ तीर्थ काल में बहुधा रखी जाने वाली एकादशी, यदि सम्भव हो तो गंगा स्नान के साथ।
व्रत
एकादशी व्रत – अन्न/दाल वर्जित। जागरण विशेष पालन। द्वादशी प्रातः पारण।
जया एकादशी 2030 खोज रहे हैं?
जया एकादशी 2030 तिथि व मुहूर्त