कार्तिक पूर्णिमा 2027
कार्तिक पूर्णिमा 2027 का पर्व रविवार, रविवार, 14 नवंबर 2027. तिथि: kartika shukla 15.
कार्तिक पूर्णिमा 2027 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
रविवार, 14 नवंबर 2027
2027 पंचांग संदर्भ
वार
रविवार
विक्रम संवत्
2084
शक संवत्
1949
इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा रविवार को पड़ रहा है, 2026 (2026-11-24) से 10 दिन पहले — सामान्य चन्द्र-पंचांग बदलाव।
Falling on a Sunday gives the day a Surya emphasis — Sun-ruled rites and copper offerings carry extra weight.
The 2026 observance fell on Tuesday, 2026-11-24 — this year arrives 10 days earlier in the Gregorian calendar, the familiar 11-day shift of the unmodified lunar year.
Looking ahead to 2028, Kartik Purnima will fall on Thursday, 2028-11-02 (11 days earlier than this year). So planning ritual schedules across years means anchoring to the tithi rather than the Gregorian date.
Astronomical context for Kartik Purnima 2027
On Sunday, November 14, 2027, sunrise in Delhi (the reference city for this page) falls at 06:42 IST and sunset at 17:28 IST — a daylight span of 10h 46m. Across the six pan-Indian cities tabulated below, sunrise on this date varies from 05:48 (Kolkata) at the eastern edge to 06:45 (Mumbai) in the west — a 57-minute difference that drives the city-by-city muhurat shift you see in the table.
For Kartik Purnima 2027, the central rite of उदय तिथि (सूर्योदय) depends on the Kartika Shukla 15 being present during that window on 2027-11-14 — confirmed across 6 reference cities in this year's computation pass. Cities further east (Kolkata, Chennai) see the window open ~15-25 minutes before Delhi; cities west of Delhi (Mumbai, Pune, Bangalore) see it start later by a similar margin.
कार्तिक पूर्णिमा 2027 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 6:42 AM | 5:28 PM |
| मुंबई | 6:45 AM | 6:00 PM |
| बेंगलुरु | 6:17 AM | 5:50 PM |
| चेन्नई | 6:07 AM | 5:39 PM |
| कोलकाता | 5:48 AM | 4:53 PM |
| पुणे | 6:40 AM | 5:57 PM |
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यह तिथि क्यों?
Kartik Purnima उदय तिथि नियम का पालन करता है – जिस दिन आवश्यक तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो, उस दिन त्योहार मनाया जाता है। यह धर्मसिन्धु का सामान्य नियम है।
देवता
भगवान शिव (त्रिपुरारि), भगवान विष्णु, कार्तिकेय
कथा एवं इतिहास
कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली मनायी जाती है – देवताओं का दीपोत्सव। स्कन्द पुराण के अनुसार शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया और देवता वाराणसी में गंगा स्नान करने आये। यह कार्तिकेय का जन्मदिन भी है। तुल… पूरी कथा पढ़ें →कम दिखाएँ ↑
कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली मनायी जाती है – देवताओं का दीपोत्सव। स्कन्द पुराण के अनुसार शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया और देवता वाराणसी में गंगा स्नान करने आये। यह कार्तिकेय का जन्मदिन भी है। तुलसी विवाह काल भी इसी समय आता है।
कैसे मनाएँ
सूर्योदय से पहले गंगा या नदी में कार्तिक स्नान करें। घाटों पर दीपों की पंक्तियाँ जलाएँ – वाराणसी के घाट इस रात अलौकिक दिखते हैं। शिव की त्रिपुरारि रूप में पूजा करें। तुलसी विवाह कराएँ। सत्यनारायण पूजा करें।
महत्व
कार्तिक पूर्णिमा वर्ष की सबसे पवित्र पूर्णिमा मानी जाती है। इस दिन गंगा स्नान सौ अश्वमेध यज्ञों का पुण्य देता है। पवित्र कार्तिक मास की पूर्णाहुति और देवताओं का दीपोत्सव।
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