महानवमी 2028
महानवमी 2028 का पर्व बुधवार, बुधवार, 27 सितंबर 2028. तिथि: ashwina shukla 9.
महानवमी 2028 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
बुधवार, 27 सितंबर 2028
2028 पंचांग संदर्भ
वार
बुधवार
विक्रम संवत्
2085
शक संवत्
1950
इस वर्ष महानवमी बुधवार को पड़ रहा है, 2027 (2027-10-09) से 11 दिन पहले — सामान्य चन्द्र-पंचांग बदलाव।
Falling on a Wednesday gives the day a Budha emphasis — learning-related rites and green offerings carry extra weight, traditionally favourable for new study.
The 2027 observance fell on Saturday, 2027-10-09 — this year arrives 11 days earlier in the Gregorian calendar, the familiar 11-day shift of the unmodified lunar year.
Looking ahead to 2029, Maha Navami will fall on Monday, 2029-10-15 (18 days later than this year). So planning ritual schedules across years means anchoring to the tithi rather than the Gregorian date.
Astronomical context for Maha Navami 2028
On Wednesday, September 27, 2028, sunrise in Delhi (the reference city for this page) falls at 06:12 IST and sunset at 18:11 IST — a daylight span of 11h 59m. Across the six pan-Indian cities tabulated below, sunrise on this date varies from 05:26 (Kolkata) at the eastern edge to 06:28 (Mumbai) in the west — a 62-minute difference that drives the city-by-city muhurat shift you see in the table.
For Maha Navami 2028, the central rite of उदय तिथि (सूर्योदय) depends on the Ashwina Shukla 9 being present during that window on 2028-09-27 — confirmed across 6 reference cities in this year's computation pass. Cities further east (Kolkata, Chennai) see the window open ~15-25 minutes before Delhi; cities west of Delhi (Mumbai, Pune, Bangalore) see it start later by a similar margin.
महानवमी 2028 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 6:12 AM | 6:11 PM |
| मुंबई | 6:28 AM | 6:30 PM |
| बेंगलुरु | 6:08 AM | 6:11 PM |
| चेन्नई | 5:58 AM | 6:01 PM |
| कोलकाता | 5:26 AM | 5:27 PM |
| पुणे | 6:24 AM | 6:26 PM |
यह तिथि क्यों?
Maha Navami उदय तिथि नियम का पालन करता है – जिस दिन आवश्यक तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो, उस दिन त्योहार मनाया जाता है। यह धर्मसिन्धु का सामान्य नियम है।
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- दुर्गा मूर्ति या चित्र
- हवन सामग्री (नवमी हवन हेतु)
- घी (हवन हेतु)(250g)
- कुमकुम (सिन्दूर)
- लाल फूल (गुड़हल, गुलाब)
पूजा के चरण
- 1
प्रातःकालीन तैयारी एवं स्नान
प्रातःकाल उठें, स्नान करें और लाल या उत्सवी वस्त्र पहनें। पूजा स्थल को साफ और सजाएँ। हवन कुण्ड (अग्निकुण्ड) तैयार करें। ...
- 2
नवमी हवन (अग्नि संस्कार)
हवन कुण्ड में पवित्र अग्नि प्रज्वलित करें। दुर्गा मन्त्रों का जाप करते हुए अग्नि में घी, हवन सामग्री और तिल अर्पित करें।...
- 3
दुर्गा महिषासुर मर्दिनी पूजा
देवी दुर्गा की महिषासुर मर्दिनी – महिषासुर का वध करने वाली – के रूप में पूजा करें। लाल फूल, कुमकुम, लाल चुनरी और नार...
फल (लाभ)
महा नवमी पूजा सिद्धिदात्री देवी की कृपा से आठ अलौकिक सिद्धियाँ (अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व) प्रदान करती है। नवमी हवन सभी संचित पापों और नकारात्मक कर्मों को नष्ट करता है। कन्या पूजा दुर्गा के सभी नौ रूपों का आशीर्वाद प्रदान करती है। यह साहस, शत्रुओं पर विजय, बुराई से रक्षा प्रदान करती है और भक्त को विजया दशमी पर मनाई जाने वाली अन्तिम विजय के लिए तैयार करती है।
देवता
देवी दुर्गा (सिद्धिदात्री), देवी सरस्वती
कथा एवं इतिहास
महानवमी नवरात्रि का नवाँ और अन्तिम दिन है, जिस दिन देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध किया। नौ रातों के भीषण युद्ध के बाद देवी ने दैत्य को मारा, अगले दिन (विजयादशमी) उनकी विजय का उत्सव हुआ। इस दिन दुर्गा क… पूरी कथा पढ़ें →कम दिखाएँ ↑
महानवमी नवरात्रि का नवाँ और अन्तिम दिन है, जिस दिन देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध किया। नौ रातों के भीषण युद्ध के बाद देवी ने दैत्य को मारा, अगले दिन (विजयादशमी) उनकी विजय का उत्सव हुआ। इस दिन दुर्गा की सिद्धिदात्री रूप में – अलौकिक शक्तियों और पूर्णता की प्रदाता के रूप में – पूजा होती है।
कैसे मनाएँ
अन्तिम नवरात्रि हवन करें। अष्टमी पर न किया हो तो कन्या पूजन करें। सम्पूर्ण दुर्गा सप्तशती के पाठ के साथ नवमी पूजा होती है। दक्षिण भारत में सरस्वती पूजा – अष्टमी पर देवी के समक्ष रखे पुस्तक और वाद्ययन्त्र नवमी पूजा बाद वापस लिये जाते हैं। विजयादशमी से पहले देवी को विदाई अर्पित की जाती है।
महत्व
महानवमी नौ दिनों की देवी आराधना की पूर्णाहुति और दैवी स्त्री शक्ति की बुराई पर अन्तिम विजय का प्रतीक है। यह नये कार्य आरम्भ करने के तीन सबसे शुभ दिनों (त्रि-शक्ति) में से एक है।
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महानवमी 2029 तिथि व मुहूर्त