महाशिवरात्रि 2027
महाशिवरात्रि 2027 का पर्व शनिवार, शनिवार, 6 मार्च 2027. Nishita Kaal Puja मुहूर्त का समय 12:07 AM – 12:56 AM (दिल्ली). तिथि: magha krishna 14.
महाशिवरात्रि 2027 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
शनिवार, 6 मार्च 2027
Nishita Kaal Puja (दिल्ली)
12:07 AM – 12:56 AM
2027 पंचांग संदर्भ
वार
शनिवार
विक्रम संवत्
2084
शक संवत्
1949
इस वर्ष महाशिवरात्रि शनिवार को पड़ रहा है, 2026 (2026-02-15) से 19 दिन बाद — सामान्य चन्द्र-पंचांग बदलाव।
Falling on a Saturday brings a Shani emphasis — ancestral rites and black-sesame offerings carry extra weight, mitigating Shani's shadow.
The 2026 observance fell on Sunday, 2026-02-15 — this year arrives 19 days later in the Gregorian calendar, the Adhika-masa pattern when an intercalary lunar month pushes the cycle forward.
Looking ahead to 2028, Maha Shivaratri will fall on Wednesday, 2028-02-23 (11 days earlier than this year). So planning ritual schedules across years means anchoring to the tithi rather than the Gregorian date.
The 2027 Nishita Kaal Puja window in Delhi runs from 12:07 AM to 12:56 AM — these timings are year-specific because they're derived from the tithi-end clock and sunset/sunrise at this date, not a fixed table; other Indian cities shift by ±10-30 minutes from the Delhi reference.
Astronomical context for Maha Shivaratri 2027
On Saturday, March 6, 2027, sunrise in Delhi (the reference city for this page) falls at 06:41 IST and sunset at 18:23 IST — a daylight span of 11h 42m. Across the six pan-Indian cities tabulated below, sunrise on this date varies from 05:54 (Kolkata) at the eastern edge to 06:54 (Mumbai) in the west — a 60-minute difference that drives the city-by-city muhurat shift you see in the table.
The nishita kaal puja window for Maha Shivaratri 2027 opens earliest at 00:06 in Bangalore and latest at 23:55 in Chennai — a 1429-minute spread driven by each city's sunset clock. These windows are tied to Magha Krishna 14's exact end-time, not a fixed muhurat table; in a year where the tithi ends earlier in the local day the window narrows accordingly.
For Maha Shivaratri 2027, the central rite of nishita kaal puja observance depends on the Magha Krishna 14 being present during that window on 2027-03-06 — confirmed across 6 reference cities in this year's computation pass. Cities further east (Kolkata, Chennai) see the window open ~15-25 minutes before Delhi; cities west of Delhi (Mumbai, Pune, Bangalore) see it start later by a similar margin.
महाशिवरात्रि 2027 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त | पूजा मुहूर्त |
|---|---|---|---|
| दिल्ली | 6:41 AM | 6:23 PM | 12:07 AM – 12:56 AM |
| मुंबई | 6:54 AM | 6:45 PM | 12:25 AM – 1:13 AM |
| बेंगलुरु | 6:32 AM | 6:29 PM | 12:06 AM – 12:54 AM |
| चेन्नई | 6:22 AM | 6:18 PM | 11:55 PM – 12:44 AM |
| कोलकाता | 5:54 AM | 5:42 PM | 11:23 PM – 12:11 AM |
| पुणे | 6:50 AM | 6:41 PM | 12:21 AM – 1:09 AM |
महाशिवरात्रि 2027 आपकी राशि के लिए क्या लाता है?
अपनी चन्द्र राशि चुनें — मन्दगति ग्रहों के गोचर के आधार पर पर्व का व्यक्तिगत संकेत
अपनी राशि नहीं जानते? चन्द्र राशि कैलकुलेटर खोलें →महाशिवरात्रि 2027 के लिए विस्तृत व्यक्तिगत पाठ चाहिए?
बृहस्पति आपकी पूरी कुण्डली, गोचर एवं दशा का विश्लेषण करके पर्व-दिवस का सटीक मार्गदर्शन देंगे।
महाशिवरात्रि — क्या करें, क्या न करें
धर्मसिन्धु, निर्णयसिन्धु, एवं समकालीन परम्परा से।
करने योग्य
- दिवस भर का व्रत रखें (जल एवं दूध की अनुमति है); अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करें।
- शिवलिङ्ग पर बेल पत्र अर्पित करें — आज की रात्रि का सर्वप्रिय अर्पण।
- निशीथ काल (मध्यरात्रि) में जागरण करें एवं ॐ नमः शिवाय का जप करें।
- किसी भी शिव मन्दिर में कम से कम एक बार जाएँ — प्रदक्षिणा शुभकर है।
- जागरण के समय कम से कम एक घंटे का मौन धारण करें।
- शैव आश्रम अथवा परिव्राजक साधुओं को आज दान करें।
न करें
- व्रत के समय अन्न एवं नमक का सेवन न करें (केवल फल, दूध, साबूदाना अनुमति)।
- निशीथ काल में न सोएँ — पर्व की सम्पूर्ण शक्ति जागरण में निहित है।
- लाल वस्त्र न पहनें — शिव पूजन के लिए सफेद, काला अथवा हल्के रंग के वस्त्र शुभ।
- शिवलिङ्ग पर हल्दी, कुमकुम अथवा नारियल जल न चढ़ाएँ।
- आज सांसारिक व्यापार अथवा बड़े संविदा न करें — यह दिन आन्तरिक कार्य का है।
- मद्य, मांस अथवा प्याज-लहसुन न लें — व्रत के सात्विक भाव के विरुद्ध है।
महाशिवरात्रि 2027 शुभकामनाएँ — साझा करने योग्य संदेश
क्लिक करें — साझा करने के लिए तैयार। ये सभी मूल रचनाएँ हैं — व्यावसायिक उपयोग के लिए स्वतन्त्र।
आज रात्रि शिव उनके सबसे निकट हैं जो स्थिर बैठ सकते हैं। आपको वह शान्ति प्राप्त हो जो उनकी उपस्थिति को अनुभव करे। ॐ नमः शिवाय।
महादेव त्याग के कारक हैं। जो भी आपने पकड़ रखा है, आज रात उसे रख देने की रात है। हर हर महादेव।
एक बेल पत्र, एक दीप, और एक सच्ची पंक्ति कि आप क्या बदलना चाहते हैं — महाशिवरात्रि के लिए इतना पर्याप्त है। आपको स्थिर रात्रि मिले।
आज रात्रि एक देवता हैं जो चित्र नहीं लेने देते। आपको वह अनुशासन मिले जो बिना तालियों के भी कार्य करे। ॐ नमः शिवाय।
जिसको आप क्षमा करने का प्रयास कर रहे हैं — उसका नाम मध्यरात्रि से पहले दीप में फुसफुसाएँ। महाशिवरात्रि उसी को रख देने की रात्रि है।
महाशिवरात्रि वर्षों में — २०२०-२०३०
पिछले एवं भविष्य के वर्षों की तिथियाँ — एक स्थान पर।
यह तिथि क्यों?
निशीथ काल (मध्यरात्रि) नियम: जिस दिन चतुर्दशी तिथि निशीथ काल में व्याप्त हो, उस दिन मनाया जाता है। शिव मध्यरात्रि में प्रकट हुए।
तिथि निर्धारण नियम
निशीथ काल (मध्यरात्रि) में तिथि व्याप्त होनी चाहिए। महाशिवरात्रि और जन्माष्टमी जैसे त्योहारों के लिए प्रयुक्त।
स्रोत: धर्मसिन्धु एवं निर्णयसिन्धु – शास्त्रीय काल-व्याप्ति पद्धति
पूजा विधि
पूजा के चरण
- 1
व्रत संकल्प और तैयारी
प्रातःकाल से उपवास आरम्भ करें। स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और शिवलिंग पर शिवरात्रि व्रत का औपचारिक संकल्प लें।
- 2
आचमन और प्राणायाम
शुद्धि के लिए आचमन करें, उसके बाद मन शान्त करने के लिए तीन बार प्राणायाम करें।
- 3
ध्यान (शिव पर)
भगवान शिव का ध्यान करें – त्रिनेत्र, चन्द्रमौलि, नीलकण्ठ, त्रिशूल, डमरू और वरदमुद्रा धारी, कैलाश पर्वत पर नन्दी सहित व...
व्रत फल (उपवास के लाभ)
मोक्ष (जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति), संचित पापों का पूर्ण नाश (पापनाशन), शिव की प्रत्यक्ष कृपा और दर्शन, सभी धार्मिक मनोकामनाओं की पूर्ति, और आध्यात्मिक जागृति
देवता
भगवान शिव
कथा एवं इतिहास
महाशिवरात्रि — फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की महान रात्रि — से अनेक पुराण भिन्न-भिन्न शिव-लीलाओं को जोड़ते हैं। पूरी कथा पढ़ें →कम दिखाएँ ↑
महाशिवरात्रि — फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की महान रात्रि — से अनेक पुराण भिन्न-भिन्न शिव-लीलाओं को जोड़ते हैं।
शिव पुराण के केन्द्र में शिव-पार्वती विवाह है। दक्ष-यज्ञ की अग्नि में सती के देहत्याग के पश्चात् शिव कैलास पर दीर्घ तपस्या में लीन हो गये। पर्वतराज की पुत्री पार्वती ने उनकी ही समान कठोर तपस्या की — ऋतु-पर्यन्त उपवास, एक-पाद स्थित, गिरे हुए पत्तों पर निर्वाह, और अन्त में पत्तों का भी त्याग (अपर्णा)। देवताओं ने, यह जानते हुए कि तारकासुर का वध केवल शिव-पुत्र कर सकते हैं, कामदेव को तप-भङ्ग के लिए भेजा — और काम भस्म हुआ, जैसा होली परम्परा में स्मरण है। पार्वती की तपस्या तब तक चली जब तक शिव स्वयं द्रवित न हो गये; वे पर्वत से उतरे, उन्हें वर रूप में स्वीकार किया, और फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की मध्यरात्रि में ब्रह्मा के पुरोहितत्व में दिव्य विवाह सम्पन्न हुआ। भक्तों का रात-जागरण उसी वर-प्रतीक्षा की पुनरावृत्ति है; बेलपत्र अर्पण विवाह-गृह के अर्पण की स्मृति है; और प्रत्येक शिवलिङ्ग पर दीप-प्रज्ज्वलन उस बारात की प्रत्येक देहरी पर दीप जैसा है।
दूसरी कथा समुद्र मन्थन की है, विष्णु और भागवत पुराण में वर्णित। देव-असुरों के क्षीर-सागर-मन्थन में सर्वप्रथम अमृत नहीं, हलाहल विष उदित हुआ — ऐसा प्रबल कि एक बूँद से लोक नष्ट हो जायें। देवता शिव की शरण में गये; शिव ने विष को कण्ठ में धारण किया, और पार्वती ने उनका कण्ठ दबा कर रखा ताकि विष भीतर न उतरे और देह के भीतर के ब्रह्माण्ड को हानि न हो। विष से कण्ठ नीला हो गया, और वे नीलकण्ठ कहलाये। रात्रि-जागरण, चार प्रहरों का अभिषेक, और शीतल दूध-जल के अर्पण इसी प्रत्युपकार के रूप हैं — सम्पूर्ण रात्रि-पर्यन्त उनके कण्ठ की ज्वाला का शीतलन।
तीसरी परम्परा, विशेषतः काश्मीर शैव दर्शन में, यह रात्रि वही है जब शिव अनन्त ज्योतिर्लिङ्ग के रूप में प्रथम प्रकट हुए — अनादि-अनन्त अग्नि-स्तम्भ जिसे ब्रह्मा और विष्णु मापने चले। ब्रह्मा हंस रूप में ऊपर उड़े, विष्णु वराह रूप में नीचे खुदाई करते उतरे; दोनों थक कर लौटे, कोई अन्त न पा सका। विष्णु ने पराजय स्वीकारी, ब्रह्मा ने मिथ्या कहा कि उन्होंने शीर्ष देख लिया। शिव ने विष्णु को विश्व-पूजा का वर दिया और ब्रह्मा को अपने मन्दिर खोने का शाप — इसी से आज ब्रह्मा-मन्दिर लगभग नहीं मिलते। प्रत्येक शिवलिङ्ग वही अप्रमेय अग्नि-स्तम्भ है, और उसके प्रकटन की रात्रि महाशिवरात्रि।
चौथी, मधुर कथा एक व्याध की है जो इसी रात्रि वन में मार्ग खो बैठा। एक बिल्व-वृक्ष के नीचे सोते बाघ से बचने वह वृक्ष पर चढ़ गया, और जागते रहने के लिए रात भर पत्ते तोड़कर नीचे गिराता रहा — पत्ते अनजाने में वृक्ष के मूल में स्थापित एक शिवलिङ्ग पर गिरते रहे। व्याध की अनैच्छिक रात्रि-जागरण और अनिच्छित अर्पण ने उसे मोक्ष प्रदान किया। यह कथा सिखाती है कि इस रात्रि के सच्चे — चाहे अनजाने — कृत्य का बल विशाल है, और सरल अर्पण के साथ रात भर जागरण को एक वर्ष की साधना तुल्य कहा गया है।
कैसे मनाएँ
कठोर उपवास रखें (निर्जला या फलाहार)। रात भर जागें (जागरण)। चार प्रहरों में शिवलिंग पर बेलपत्र, दूध, जल और शहद चढ़ाएँ। "ओम नमः शिवाय" का जाप करें।
महत्व
वर्ष की सबसे अन्धकारमय रात्रि – अन्धकार और अज्ञान पर विजय का प्रतीक। इस रात्रि शिव की ऊर्जा सर्वाधिक सुलभ मानी जाती है।
व्रत
कठोर व्रत (निर्जला या केवल फलाहार)। अगली सुबह पूजा के बाद पारण करें।
महाशिवरात्रि 2028 खोज रहे हैं?
महाशिवरात्रि 2028 तिथि व मुहूर्त