मोहिनी एकादशी 2030
मोहिनी एकादशी 2030 का पर्व मंगलवार, मंगलवार, 14 मई 2030.
मोहिनी एकादशी 2030 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
मंगलवार, 14 मई 2030
2030 पंचांग संदर्भ
वार
मंगलवार
विक्रम संवत्
2087
शक संवत्
1952
इस वर्ष मोहिनी एकादशी मंगलवार को पड़ रहा है, 2029 (2029-05-23) से 9 दिन पहले — सामान्य चन्द्र-पंचांग बदलाव।
Falling on a Tuesday gives the day a Mangal emphasis — courage-related rites and red offerings carry extra weight.
The 2029 observance fell on Wednesday, 2029-05-23 — this year arrives 9 days earlier in the Gregorian calendar, the familiar 11-day shift of the unmodified lunar year.
Looking ahead to 2031, Mohini Ekadashi will fall on Saturday, 2031-05-03 (11 days earlier than this year). So planning ritual schedules across years means anchoring to the tithi rather than the Gregorian date.
Astronomical context for Mohini Ekadashi 2030
On Tuesday, May 14, 2030, sunrise in Delhi (the reference city for this page) falls at 05:31 IST and sunset at 19:04 IST — a daylight span of 13h 33m. Across the six pan-Indian cities tabulated below, sunrise on this date varies from 04:56 (Kolkata) at the eastern edge to 06:04 (Mumbai) in the west — a 68-minute difference that drives the city-by-city muhurat shift you see in the table.
For Mohini Ekadashi 2030, the central rite of उदय तिथि (सूर्योदय) depends on the festival tithi being present during that window on 2030-05-14 — confirmed across 6 reference cities in this year's computation pass. Cities further east (Kolkata, Chennai) see the window open ~15-25 minutes before Delhi; cities west of Delhi (Mumbai, Pune, Bangalore) see it start later by a similar margin.
मोहिनी एकादशी 2030 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 5:31 AM | 7:04 PM |
| मुंबई | 6:04 AM | 7:05 PM |
| बेंगलुरु | 5:54 AM | 6:37 PM |
| चेन्नई | 5:43 AM | 6:26 PM |
| कोलकाता | 4:56 AM | 6:09 PM |
| पुणे | 6:01 AM | 7:00 PM |
यह तिथि क्यों?
Mohini Ekadashi उदय तिथि नियम का पालन करता है – जिस दिन आवश्यक तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो, उस दिन त्योहार मनाया जाता है। यह धर्मसिन्धु का सामान्य नियम है।
देवता
भगवान विष्णु (मोहिनी रूप / स्त्री अवतार)
कथा एवं इतिहास
जब देवताओं और असुरों ने समुद्र मन्थन किया, अमृत प्रकट हुआ। असुरों ने छीन लिया। विष्णु ने देवताओं को बचाने के लिए मोहिनी रूप धरा — ब्रह्माण्ड के इतिहास का सबसे सुन्दर स्त्री रूप। मोहित असुरों ने मोहिनी… पूरी कथा पढ़ें →कम दिखाएँ ↑
जब देवताओं और असुरों ने समुद्र मन्थन किया, अमृत प्रकट हुआ। असुरों ने छीन लिया। विष्णु ने देवताओं को बचाने के लिए मोहिनी रूप धरा — ब्रह्माण्ड के इतिहास का सबसे सुन्दर स्त्री रूप। मोहित असुरों ने मोहिनी को अमृत वितरण की अनुमति दी; उसने देवताओं को दिया। यह घटना वैशाख शुक्ल एकादशी पर हुई मानी जाती है। विष्णु पुराण और भागवत पुराण दोनों में मोहिनी अवतार वर्णित है।
कैसे मनाएँ
एकादशी व्रत और विष्णु पूजा — विशेषकर मोहिनी-विष्णु रूप। कुछ परम्पराओं में लक्ष्मी की भी पूजा होती है जो आसुरी मन को समर्पण में मुग्ध करने वाली स्त्री शक्ति हैं। भागवत पुराण के अष्टम स्कन्ध से मोहिनी अवतार कथा पाठ। मिष्ठान्न (मधुर) दान — अमृत का प्रतीक। वैष्णव और स्मार्त परम्पराओं में व्यापक रूप से रखी जाती है; केरल में विशेष मन्दिर उत्सव।
महत्व
देवताओं को अमृत प्राप्ति की ब्रह्माण्डीय घटना का स्मरण कराती है — मोहिनी के बिना असुर विजयी होते। गहन शिक्षा: धर्म कभी अनपेक्षित रूप धरने की माँग करता है; ब्रह्माण्डीय सन्तुलन के लिए विष्णु का स्त्री रूप धारण निश्चित पहचान को धर्म सेवा में विसर्जित करने की शिक्षा है। बहुधा उन परिस्थितियों के साधकों द्वारा रखी जाती है जहाँ रचनात्मक या अनपेक्षित दृष्टिकोण आवश्यक है।
व्रत
एकादशी व्रत – अन्न/दाल वर्जित। मिष्ठान्न (अमृत प्रतीक) पारम्परिक अर्पण। द्वादशी प्रातः पारण।