नाग पञ्चमी 2029
नाग पञ्चमी 2029 का पर्व मंगलवार, मंगलवार, 14 अगस्त 2029. तिथि: shravana shukla 5.
नाग पञ्चमी 2029 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
मंगलवार, 14 अगस्त 2029
2029 पंचांग संदर्भ
वार
मंगलवार
विक्रम संवत्
2086
शक संवत्
1951
इस वर्ष नाग पञ्चमी मंगलवार को पड़ रहा है, 2028 (2028-07-26) से 19 दिन बाद — सामान्य चन्द्र-पंचांग बदलाव।
Falling on a Tuesday gives the day a Mangal emphasis — courage-related rites and red offerings carry extra weight.
The 2028 observance fell on Wednesday, 2028-07-26 — this year arrives 19 days later in the Gregorian calendar, the Adhika-masa pattern when an intercalary lunar month pushes the cycle forward.
Looking ahead to 2030, Nag Panchami will fall on Sunday, 2030-08-04 (10 days earlier than this year). So planning ritual schedules across years means anchoring to the tithi rather than the Gregorian date.
Astronomical context for Nag Panchami 2029
On Tuesday, August 14, 2029, sunrise in Delhi (the reference city for this page) falls at 05:49 IST and sunset at 19:01 IST — a daylight span of 13h 12m. Across the six pan-Indian cities tabulated below, sunrise on this date varies from 05:13 (Kolkata) at the eastern edge to 06:19 (Mumbai) in the west — a 66-minute difference that drives the city-by-city muhurat shift you see in the table.
For Nag Panchami 2029, the central rite of उदय तिथि (सूर्योदय) depends on the Shravana Shukla 5 being present during that window on 2029-08-14 — confirmed across 6 reference cities in this year's computation pass. Cities further east (Kolkata, Chennai) see the window open ~15-25 minutes before Delhi; cities west of Delhi (Mumbai, Pune, Bangalore) see it start later by a similar margin.
नाग पञ्चमी 2029 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 5:49 AM | 7:01 PM |
| मुंबई | 6:19 AM | 7:06 PM |
| बेंगलुरु | 6:07 AM | 6:41 PM |
| चेन्नई | 5:56 AM | 6:30 PM |
| कोलकाता | 5:13 AM | 6:08 PM |
| पुणे | 6:16 AM | 7:02 PM |
यह तिथि क्यों?
Nag Panchami उदय तिथि नियम का पालन करता है – जिस दिन आवश्यक तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो, उस दिन त्योहार मनाया जाता है। यह धर्मसिन्धु का सामान्य नियम है।
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- नाग चित्र (दीवार पर हल्दी से बनाया या मिट्टी की मूर्ति)
- दूध (कच्चा, बिना उबला)
- फूल (सफ़ेद और पीले)
- दूर्वा घास (दूब)
- हल्दी
पूजा के चरण
- 1
प्रातः स्नान एवं तैयारी
सूर्योदय के बाद प्रातः स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र पहनें। मुख्य द्वार के पास या पूजा कक्ष में पूजा स्थल साफ करें। यदि साँप...
- 2
नाग चित्र बनाएँ या स्थापित करें
दीवार या लकड़ी के तख्ते पर हल्दी या चन्दन के लेप से सर्प चित्र बनाएँ। परम्परागत रूप से पाँच फन (पंचफणी) या सात फन (सप्तफ...
- 3
संकल्प एवं नाग देवताओं का आवाहन
नाग चित्र के सामने बैठें। आचमन करें (तीन बार जल पिएँ)। संकल्प लें। आठ महानागों का नाम लेकर आवाहन करें: अनन्त (शेष), वासु...
फल (लाभ)
नाग पंचमी पूजा साँपों और सर्पदंश के भय को दूर करती है, कुण्डली में काल सर्प दोष को शान्त करती है, और नाग देवताओं की रक्षा प्रदान करती है। गरुड़ पुराण के अनुसार जो पंचमी पर नागों की पूजा करते हैं वे पूरे वर्ष सर्प सम्बन्धी हानि से सुरक्षित रहते हैं। यह सन्तान सुख, समृद्धि और भगवान विष्णु (जो शेषनाग पर विराजमान हैं) का आशीर्वाद भी प्रदान करती है।
देवता
नाग देवता (वासुकि, शेष, तक्षक)
कथा एवं इतिहास
नाग पञ्चमी नाग देवताओं की पूजा का पर्व है। महाभारत में राजा जनमेजय ने तक्षक से बदला लेने सर्प-यज्ञ किया, जिसे ऋषि आस्तीक ने रोककर नागवंश की रक्षा की। नाग शिव के आभूषण (वासुकि) और विष्णु की शय्या (शेषन… पूरी कथा पढ़ें →कम दिखाएँ ↑
नाग पञ्चमी नाग देवताओं की पूजा का पर्व है। महाभारत में राजा जनमेजय ने तक्षक से बदला लेने सर्प-यज्ञ किया, जिसे ऋषि आस्तीक ने रोककर नागवंश की रक्षा की। नाग शिव के आभूषण (वासुकि) और विष्णु की शय्या (शेषनाग) हैं।
कैसे मनाएँ
साँप की बाँबी या नाग प्रतिमा पर दूध, हल्दी, चावल और फूल चढ़ाएँ। द्वार पर हल्दी या चन्दन से नाग चित्र बनाएँ। इस दिन पृथ्वी न खोदें। नाग स्तोत्र पढ़ें। महिलाएँ परिवार कल्याण के लिए व्रत रखती हैं।
महत्व
नाग पञ्चमी नागों को पृथ्वी के रक्षक और पाताल के अधिपति के रूप में सम्मानित करती है। नाग कुण्डलिनी शक्ति और सन्तान का प्रतीक हैं। कालसर्प दोष निवारण में सहायक।
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