नरक चतुर्दशी 2028
नरक चतुर्दशी 2028 का पर्व मंगलवार, मंगलवार, 17 अक्टूबर 2028. तिथि: ashwina krishna 14.
नरक चतुर्दशी 2028 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
मंगलवार, 17 अक्टूबर 2028
2028 पंचांग संदर्भ
वार
मंगलवार
विक्रम संवत्
2085
शक संवत्
1950
इस वर्ष नरक चतुर्दशी मंगलवार को पड़ रहा है, 2027 (2027-10-28) से 10 दिन पहले — सामान्य चन्द्र-पंचांग बदलाव।
Falling on a Tuesday gives the day a Mangal emphasis — courage-related rites and red offerings carry extra weight.
The 2027 observance fell on Thursday, 2027-10-28 — this year arrives 10 days earlier in the Gregorian calendar, the familiar 11-day shift of the unmodified lunar year.
Looking ahead to 2029, Narak Chaturdashi will fall on Monday, 2029-11-05 (19 days later than this year). So planning ritual schedules across years means anchoring to the tithi rather than the Gregorian date.
Astronomical context for Narak Chaturdashi 2028
On Tuesday, October 17, 2028, sunrise in Delhi (the reference city for this page) falls at 06:23 IST and sunset at 17:49 IST — a daylight span of 11h 26m. Across the six pan-Indian cities tabulated below, sunrise on this date varies from 05:33 (Kolkata) at the eastern edge to 06:33 (Mumbai) in the west — a 60-minute difference that drives the city-by-city muhurat shift you see in the table.
For Narak Chaturdashi 2028, the central rite of अरुणोदय depends on the Ashwina Krishna 14 being present during that window on 2028-10-17 — confirmed across 6 reference cities in this year's computation pass. Cities further east (Kolkata, Chennai) see the window open ~15-25 minutes before Delhi; cities west of Delhi (Mumbai, Pune, Bangalore) see it start later by a similar margin.
नरक चतुर्दशी 2028 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 6:23 AM | 5:49 PM |
| मुंबई | 6:33 AM | 6:13 PM |
| बेंगलुरु | 6:10 AM | 5:59 PM |
| चेन्नई | 5:59 AM | 5:48 PM |
| कोलकाता | 5:33 AM | 5:09 PM |
| पुणे | 6:29 AM | 6:10 PM |
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नरक चतुर्दशी — क्या करें, क्या न करें
धर्मसिन्धु, निर्णयसिन्धु, एवं समकालीन परम्परा से।
करने योग्य
- सूर्योदय से पूर्व (अरुणोदय) तेल स्नान करें — अभ्यङ्ग स्नान परम्परा।
- स्नान से पूर्व उटने (औषधीय तेल) अथवा तिल तैल लगाएँ।
- सूर्यास्त के समय दक्षिण की ओर एक दीप जलाएँ — यमराज को प्रसन्न करने हेतु।
- नये वस्त्र पहनें एवं कल की दीपावली की पूर्वतैयारी में छोटी लक्ष्मी पूजा करें।
न करें
- पूर्वाकाल स्नान न छोड़ें — शास्त्रीय परम्परा में आज के दिन का यही पूर्ण उद्देश्य है।
- शीत जल से स्नान न करें — तेल के साथ गर्म जल विहित है।
- पूजा से पूर्व भारी अथवा मांसाहार भोजन से बचें।
- आज भी जुआ न खेलें — दीपावली वाली अलक्ष्मी सावधानी यहाँ भी लागू है।
नरक चतुर्दशी 2028 शुभकामनाएँ — साझा करने योग्य संदेश
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कल के दीपों से पहले, आज का अरुणोदय स्नान वर्ष भर जो जमा हुआ उसे साफ़ करता है। शुभ नरक चतुर्दशी।
छोटी दीपावली — पूर्वाभ्यास। एक दीप जलाएँ, एक मिठाई लें, जल्दी सो जाएँ। कल बड़ी रात है।
उत्सव का कार्य उत्सव से पहले प्रारम्भ होता है। आपको शान्त, स्वच्छ नरक चतुर्दशी मिले।
भोर से पूर्व अभ्यङ्ग — गर्म तेल, गर्म जल, कोई शीघ्रता नहीं। वर्षान्त की हमारी सरलतम विधि। शुभ छोटी दीपावली।
जिस दिन कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था — एवं जिस दिन आपकी दादी आग्रह करती हैं कि सूर्योदय से पूर्व स्नान करें। दोनों सही हैं। आपको स्नान की कामना।
पञ्च-दिवसीय दीपावली पर्व — पर्व क्रम
दीपावली के पाँच दिन धनतेरस से प्रारम्भ होकर भाई दूज तक चलते हैं — प्रत्येक दिन का अपना देवता, अनुष्ठान एवं ज्योतिषीय केन्द्रबिन्दु है।
नरक चतुर्दशी वर्षों में — २०२०-२०३०
पिछले एवं भविष्य के वर्षों की तिथियाँ — एक स्थान पर।
यह तिथि क्यों?
निशीथ काल नियम: जिस दिन चतुर्दशी तिथि मध्यरात्रि में व्याप्त हो। दीपावली से पूर्व की रात। भोर का अभ्यङ्ग स्नान नवीन वर्ष की शुद्धि करता है।
तिथि निर्धारण नियम
अरुणोदय (सूर्योदय से 96 मिनट पहले) में तिथि व्याप्त होनी चाहिए। नरक चतुर्दशी और एकादशी व्रत के लिए प्रयुक्त।
स्रोत: धर्मसिन्धु एवं निर्णयसिन्धु – शास्त्रीय काल-व्याप्ति पद्धति
देवता
भगवान कृष्ण, देवी काली
कथा एवं इतिहास
नरक चतुर्दशी कृष्ण द्वारा नरकासुर वध का उत्सव है। नरकासुर ने 16,100 राजकुमारियों को बन्दी बनाया था। कृष्ण ने सत्यभामा सहित युद्ध कर उसे मारा और सबको मुक्त किया। भोर में कृष्ण को सुगन्धित तेल से स्नान … पूरी कथा पढ़ें →कम दिखाएँ ↑
नरक चतुर्दशी कृष्ण द्वारा नरकासुर वध का उत्सव है। नरकासुर ने 16,100 राजकुमारियों को बन्दी बनाया था। कृष्ण ने सत्यभामा सहित युद्ध कर उसे मारा और सबको मुक्त किया। भोर में कृष्ण को सुगन्धित तेल से स्नान कराया गया। कुछ स्थानों पर इसे काली चौदस के रूप में मनाते हैं।
कैसे मनाएँ
भोर से पहले उठकर तिल के तेल और उबटन से अभ्यंग स्नान करें। शाम को चौदह दीप जलाएँ। पटाखे फोड़ें। कृष्ण और कुछ परम्पराओं में काली या हनुमान की पूजा करें। विशेष मिठाइयाँ बनाएँ।
महत्व
नरक चतुर्दशी बुराई के नाश और पीड़ितों की मुक्ति का प्रतीक है। भोर का स्नान पापों को धोता है और चौदह दीप चौदह लोकों को प्रकाशित करते हैं। यह दीपावली से पूर्व शुद्धिकरण का दिन है।
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