पार्श्व एकादशी 2026
पार्श्व एकादशी 2026 का पर्व मंगलवार, मंगलवार, 22 सितंबर 2026.
पार्श्व एकादशी 2026 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
मंगलवार, 22 सितंबर 2026
2026 पंचांग संदर्भ
वार
मंगलवार
विक्रम संवत्
2083
शक संवत्
1948
इस वर्ष पार्श्व एकादशी मंगलवार को पड़ रहा है, 2025 (2025-09-03) से 19 दिन बाद — सामान्य चन्द्र-पंचांग बदलाव।
Falling on a Tuesday gives the day a Mangal emphasis — courage-related rites and red offerings carry extra weight.
The 2025 observance fell on Wednesday, 2025-09-03 — this year arrives 19 days later in the Gregorian calendar, the Adhika-masa pattern when an intercalary lunar month pushes the cycle forward.
Looking ahead to 2027, Parsva Ekadashi will fall on Saturday, 2027-09-11 (11 days earlier than this year). So planning ritual schedules across years means anchoring to the tithi rather than the Gregorian date.
Astronomical context for Parsva Ekadashi 2026
On Tuesday, September 22, 2026, sunrise in Delhi (the reference city for this page) falls at 06:09 IST and sunset at 18:18 IST — a daylight span of 12h 9m. Across the six pan-Indian cities tabulated below, sunrise on this date varies from 05:25 (Kolkata) at the eastern edge to 06:27 (Mumbai) in the west — a 62-minute difference that drives the city-by-city muhurat shift you see in the table.
For Parsva Ekadashi 2026, the central rite of उदय तिथि (सूर्योदय) depends on the festival tithi being present during that window on 2026-09-22 — confirmed across 6 reference cities in this year's computation pass. Cities further east (Kolkata, Chennai) see the window open ~15-25 minutes before Delhi; cities west of Delhi (Mumbai, Pune, Bangalore) see it start later by a similar margin.
पार्श्व एकादशी 2026 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 6:09 AM | 6:18 PM |
| मुंबई | 6:27 AM | 6:34 PM |
| बेंगलुरु | 6:08 AM | 6:15 PM |
| चेन्नई | 5:58 AM | 6:05 PM |
| कोलकाता | 5:25 AM | 5:33 PM |
| पुणे | 6:23 AM | 6:30 PM |
यह तिथि क्यों?
Parsva Ekadashi उदय तिथि नियम का पालन करता है – जिस दिन आवश्यक तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो, उस दिन त्योहार मनाया जाता है। यह धर्मसिन्धु का सामान्य नियम है।
देवता
भगवान विष्णु (वामन अवतार / पद्मनाभ-शयन रूप)
कथा एवं इतिहास
चातुर्मास के चार माह में भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग पर शयन करते हैं। भाद्रपद शुक्ल एकादशी पर वे बायीं करवट से दायीं करवट लेते हैं (पार्श्व = करवट) — चार माह के विश्राम का मध्य संकेत। यह दिन इस … पूरी कथा पढ़ें →कम दिखाएँ ↑
चातुर्मास के चार माह में भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग पर शयन करते हैं। भाद्रपद शुक्ल एकादशी पर वे बायीं करवट से दायीं करवट लेते हैं (पार्श्व = करवट) — चार माह के विश्राम का मध्य संकेत। यह दिन इस ब्रह्माण्डीय करवट का स्मरण कराता है। राजा बलि, जो वामन अवतार कथा अनुसार चातुर्मास में विष्णु की मेजबानी करते हैं, ने सर्वप्रथम यह व्रत रखा माना जाता है। परिवर्तिनी या वामन एकादशी भी कहते हैं। भविष्योत्तर पुराण में यह वर्णन है।
कैसे मनाएँ
एकादशी व्रत रखें। विशेषकर वामन अवतार में विष्णु पूजा — जिन्होंने बलि को विनम्र करने के लिए तीन पग लिये। भागवत पुराण से वामन अवतार कथा पाठ। यह व्रत चातुर्मास के मध्य बिन्दु को चिह्नित करता है — गत दो माह की आध्यात्मिक प्रगति के व्यक्तिगत अवलोकन और अगले दो माह के लिए पुनः प्रतिबद्धता का क्षण। मानसून आवश्यक वस्तुओं — छाते, कम्बल, दीपक — का दान।
महत्व
चातुर्मास का "मोड़" — विष्णु करवट बदलते हैं, आध्यात्मिक ऋतु दिशा बदलती है। संकल्प नवीनीकरण का स्वाभाविक अवसर: "इन दो माह में मैंने क्या श्रद्धा से पालन किया? अगले दो माह के लिए क्या गहराने की आवश्यकता है?" वामन स्मरण के साथ शिक्षा देती है कि ब्रह्माण्डीय शयन भी निष्क्रिय नहीं — विष्णु करवट लेते हैं, बलि को स्वप्नों से शिक्षा देते हैं, और जागरण की तैयारी करते हैं। वैष्णव साधु परम्पराओं में नवीनीकरण बिन्दु के रूप में व्यापक रूप से रखी जाती है।
व्रत
एकादशी व्रत – अन्न/दाल वर्जित। चातुर्मास का मध्य — संकल्प अवलोकन और नवीनीकरण। द्वादशी प्रातः पारण।
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