तुलसी विवाह 2027
तुलसी विवाह 2027 का पर्व गुरुवार, गुरुवार, 11 नवंबर 2027. तिथि: kartika shukla 12.
तुलसी विवाह 2027 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
गुरुवार, 11 नवंबर 2027
2027 पंचांग संदर्भ
वार
गुरुवार
विक्रम संवत्
2084
शक संवत्
1949
इस वर्ष तुलसी विवाह गुरुवार को पड़ रहा है, 2026 (2026-11-21) से 10 दिन पहले — सामान्य चन्द्र-पंचांग बदलाव।
Falling on a Thursday brings a Guru (Jupiter) emphasis — guru-related rites, yellow offerings and dharmic decisions carry extra weight.
The 2026 observance fell on Saturday, 2026-11-21 — this year arrives 10 days earlier in the Gregorian calendar, the familiar 11-day shift of the unmodified lunar year.
Looking ahead to 2028, Tulsi Vivah will fall on Sunday, 2028-10-29 (12 days earlier than this year). So planning ritual schedules across years means anchoring to the tithi rather than the Gregorian date.
Astronomical context for Tulsi Vivah 2027
On Thursday, November 11, 2027, sunrise in Delhi (the reference city for this page) falls at 06:40 IST and sunset at 17:29 IST — a daylight span of 10h 49m. Across the six pan-Indian cities tabulated below, sunrise on this date varies from 05:46 (Kolkata) at the eastern edge to 06:43 (Mumbai) in the west — a 57-minute difference that drives the city-by-city muhurat shift you see in the table.
For Tulsi Vivah 2027, the central rite of उदय तिथि (सूर्योदय) depends on the Kartika Shukla 12 being present during that window on 2027-11-11 — confirmed across 6 reference cities in this year's computation pass. Cities further east (Kolkata, Chennai) see the window open ~15-25 minutes before Delhi; cities west of Delhi (Mumbai, Pune, Bangalore) see it start later by a similar margin.
तुलसी विवाह 2027 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 6:40 AM | 5:29 PM |
| मुंबई | 6:43 AM | 6:01 PM |
| बेंगलुरु | 6:16 AM | 5:50 PM |
| चेन्नई | 6:05 AM | 5:39 PM |
| कोलकाता | 5:46 AM | 4:54 PM |
| पुणे | 6:38 AM | 5:58 PM |
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यह तिथि क्यों?
Tulsi Vivah उदय तिथि नियम का पालन करता है – जिस दिन आवश्यक तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो, उस दिन त्योहार मनाया जाता है। यह धर्मसिन्धु का सामान्य नियम है।
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- तुलसी का पौधा
- शालिग्राम शिला
- मण्डप सजावट (4 खम्भों वाली छोटी छत)
- गन्ने की छड़ें (मण्डप के खम्भों के लिए)
- आम के पत्ते और गेंदे की मालाएँ (मण्डप के लिए)
पूजा के चरण
- 1
मण्डप तैयारी
गन्ने की छड़ों को खम्भों के रूप में लगाकर तुलसी के पौधे के चारों ओर छोटा विवाह मण्डप बनाएँ। आम के पत्तों, गेंदे की मालाओ...
- 2
वधू एवं वर की तैयारी
तुलसी के पौधे (वधू) को जल से स्नान कराएँ और लाल चुनरी, फूल और आभूषणों से सजाएँ। शालिग्राम शिला (वर) को तुलसी के पास एक छ...
- 3
गणेश पूजा एवं संकल्प
सभी हिन्दू समारोहों की तरह, विघ्न निवारण के लिए गणेश पूजा से आरम्भ करें। फिर तुलसी विवाह के लिए तिथि, उद्देश्य और दिव्य ...
फल (लाभ)
तुलसी विवाह करने का पुण्य कन्यादान (पुत्री का विवाह में दान) – दान के सर्वोच्च रूप – के बराबर माना जाता है। यह घरेलू सौहार्द, समृद्धि और घर पर विष्णु का आशीर्वाद प्रदान करता है। पद्म पुराण के अनुसार जो तुलसी विवाह करता है वह पितृ-ऋण से मुक्त होता है।
देवता
भगवान विष्णु (कृष्ण), तुलसी (वृन्दा)
कथा एवं इतिहास
तुलसी मूलतः वृन्दा थीं, दैत्य जलन्धर की पतिव्रता पत्नी। विष्णु ने जलन्धर की अजेयता तोड़ने के लिए छल किया, वृन्दा ने विष्णु को पत्थर (शालिग्राम) बनने का शाप दिया। विष्णु ने उन्हें पवित्र तुलसी के रूप म… पूरी कथा पढ़ें →कम दिखाएँ ↑
तुलसी मूलतः वृन्दा थीं, दैत्य जलन्धर की पतिव्रता पत्नी। विष्णु ने जलन्धर की अजेयता तोड़ने के लिए छल किया, वृन्दा ने विष्णु को पत्थर (शालिग्राम) बनने का शाप दिया। विष्णु ने उन्हें पवित्र तुलसी के रूप में पुनर्जन्म का वरदान दिया और प्रतिवर्ष कार्तिक शुक्ल द्वादशी को विवाह का वचन दिया।
कैसे मनाएँ
तुलसी के पौधे का शालिग्राम या विष्णु/कृष्ण की मूर्ति से विधिवत विवाह कराया जाता है। तुलसी को दुल्हन की तरह साड़ी, फूल और गहनों से सजाया जाता है। गन्ने का मण्डप बनाया जाता है। मन्त्रोच्चारण और सभी विवाह संस्कार किये जाते हैं। यह चातुर्मास का अन्त और हिन्दू विवाह मौसम का आरम्भ है।
महत्व
तुलसी विवाह चार माह के चातुर्मास काल का अन्त और हिन्दू विवाह तथा शुभ कार्यों के पुनः आरम्भ का संकेत है। यह तुलसी (भक्ति) और विष्णु (दिव्यता) के शाश्वत बन्धन का प्रतीक है।
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