विजया एकादशी 2029
विजया एकादशी 2029 का पर्व शनिवार, शनिवार, 10 मार्च 2029.
विजया एकादशी 2029 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
शनिवार, 10 मार्च 2029
2029 पंचांग संदर्भ
वार
शनिवार
विक्रम संवत्
2086
शक संवत्
1951
इस वर्ष विजया एकादशी शनिवार को पड़ रहा है, 2028 (2028-03-21) से 11 दिन पहले — सामान्य चन्द्र-पंचांग बदलाव।
Falling on a Saturday brings a Shani emphasis — ancestral rites and black-sesame offerings carry extra weight, mitigating Shani's shadow.
The 2028 observance fell on Tuesday, 2028-03-21 — this year arrives 11 days earlier in the Gregorian calendar, the familiar 11-day shift of the unmodified lunar year.
Looking ahead to 2030, Vijaya Ekadashi will fall on Friday, 2030-03-29 (19 days later than this year). So planning ritual schedules across years means anchoring to the tithi rather than the Gregorian date.
Astronomical context for Vijaya Ekadashi 2029
On Saturday, March 10, 2029, sunrise in Delhi (the reference city for this page) falls at 06:36 IST and sunset at 18:26 IST — a daylight span of 11h 50m. Across the six pan-Indian cities tabulated below, sunrise on this date varies from 05:50 (Kolkata) at the eastern edge to 06:50 (Mumbai) in the west — a 60-minute difference that drives the city-by-city muhurat shift you see in the table.
For Vijaya Ekadashi 2029, the central rite of उदय तिथि (सूर्योदय) depends on the festival tithi being present during that window on 2029-03-10 — confirmed across 6 reference cities in this year's computation pass. Cities further east (Kolkata, Chennai) see the window open ~15-25 minutes before Delhi; cities west of Delhi (Mumbai, Pune, Bangalore) see it start later by a similar margin.
विजया एकादशी 2029 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 6:36 AM | 6:26 PM |
| मुंबई | 6:50 AM | 6:46 PM |
| बेंगलुरु | 6:30 AM | 6:29 PM |
| चेन्नई | 6:19 AM | 6:18 PM |
| कोलकाता | 5:50 AM | 5:43 PM |
| पुणे | 6:46 AM | 6:43 PM |
यह तिथि क्यों?
Vijaya Ekadashi उदय तिथि नियम का पालन करता है – जिस दिन आवश्यक तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो, उस दिन त्योहार मनाया जाता है। यह धर्मसिन्धु का सामान्य नियम है।
देवता
भगवान विष्णु (राम रूप)
कथा एवं इतिहास
जब भगवान राम लंका के लिए समुद्र पार करने को तैयार हुए, सेना तट पर शिविर लगाये थी और मार्ग नहीं दिखता था। राम ने बकदाल्भ्य ऋषि से पूछा; उन्होंने फाल्गुन कृष्ण एकादशी का पूर्ण व्रत बताया। राम ने व्रत कि… पूरी कथा पढ़ें →कम दिखाएँ ↑
जब भगवान राम लंका के लिए समुद्र पार करने को तैयार हुए, सेना तट पर शिविर लगाये थी और मार्ग नहीं दिखता था। राम ने बकदाल्भ्य ऋषि से पूछा; उन्होंने फाल्गुन कृष्ण एकादशी का पूर्ण व्रत बताया। राम ने व्रत किया, समुद्र देव वरुण प्रकट हुए, सेतु निर्माण का मार्ग प्रकट हुआ। सेना ने पार किया और रावण पर विजय मिली। स्कन्द पुराण में यह राम-व्रत कथा है।
कैसे मनाएँ
विशिष्ट चुनौती पर विजय के संकल्प के साथ एकादशी व्रत रखें। लाल पुष्पों से विष्णु (विशेषकर राम रूप) पूजा। रामायण के सुन्दरकाण्ड या राम रक्षा स्तोत्र का पाठ। बड़े उपक्रमों से पूर्व विशेष — परीक्षा, न्यायालय, ऐतिहासिक रूप से सैन्य अभियान — दैवी सहायता के लिए। उपक्रम के आवश्यक वस्तुओं का दान करें।
महत्व
विजया = "विजय" — दैवी सहायता वांछित बड़े उपक्रमों से पूर्व आह्वान। राम का दृष्टान्त व्रत को धर्मसम्मत कर्म से जोड़ता है (केवल भौतिक विजय नहीं) — राम ने धर्म के लिए समुद्र पार किया। वैष्णव परम्पराओं में किसी नये उपक्रम से पूर्व व्यापक रूप से रखी जाती है। फाल्गुन में होली के निकट — "वसन्त आरम्भ" का समय "नये उपक्रम" के भाव को मजबूत करता है।
व्रत
एकादशी व्रत – अन्न/दाल वर्जित। वास्तविक चुनौती पर विजय के विशिष्ट संकल्प सहित। द्वादशी प्रातः पारण।
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