योगिनी एकादशी 2028
योगिनी एकादशी 2028 का पर्व मंगलवार, मंगलवार, 18 जुलाई 2028.
योगिनी एकादशी 2028 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
मंगलवार, 18 जुलाई 2028
2028 पंचांग संदर्भ
वार
मंगलवार
विक्रम संवत्
2085
शक संवत्
1950
इस वर्ष योगिनी एकादशी मंगलवार को पड़ रहा है, 2027 (2027-07-29) से 10 दिन पहले — सामान्य चन्द्र-पंचांग बदलाव।
Falling on a Tuesday gives the day a Mangal emphasis — courage-related rites and red offerings carry extra weight.
The 2027 observance fell on Thursday, 2027-07-29 — this year arrives 10 days earlier in the Gregorian calendar, the familiar 11-day shift of the unmodified lunar year.
Looking ahead to 2029, Yogini Ekadashi will fall on Monday, 2029-08-06 (19 days later than this year). So planning ritual schedules across years means anchoring to the tithi rather than the Gregorian date.
Astronomical context for Yogini Ekadashi 2028
On Tuesday, July 18, 2028, sunrise in Delhi (the reference city for this page) falls at 05:35 IST and sunset at 19:19 IST — a daylight span of 13h 44m. Across the six pan-Indian cities tabulated below, sunrise on this date varies from 05:02 (Kolkata) at the eastern edge to 06:10 (Mumbai) in the west — a 68-minute difference that drives the city-by-city muhurat shift you see in the table.
For Yogini Ekadashi 2028, the central rite of उदय तिथि (सूर्योदय) depends on the festival tithi being present during that window on 2028-07-18 — confirmed across 6 reference cities in this year's computation pass. Cities further east (Kolkata, Chennai) see the window open ~15-25 minutes before Delhi; cities west of Delhi (Mumbai, Pune, Bangalore) see it start later by a similar margin.
योगिनी एकादशी 2028 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 5:35 AM | 7:19 PM |
| मुंबई | 6:10 AM | 7:18 PM |
| बेंगलुरु | 6:02 AM | 6:49 PM |
| चेन्नई | 5:51 AM | 6:39 PM |
| कोलकाता | 5:02 AM | 6:23 PM |
| पुणे | 6:07 AM | 7:13 PM |
यह तिथि क्यों?
Yogini Ekadashi उदय तिथि नियम का पालन करता है – जिस दिन आवश्यक तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो, उस दिन त्योहार मनाया जाता है। यह धर्मसिन्धु का सामान्य नियम है।
देवता
भगवान विष्णु (योगेश्वर रूप, योग के स्वामी)
कथा एवं इतिहास
धन के देवता कुबेर के माली हेम प्रतिदिन कुबेर की शिव पूजा हेतु पुष्प लाते थे। एक दिन दाम्पत्य रति के कारण देर हो गयी और देर से पुष्प लाये। बाधित पूजा से क्रुद्ध कुबेर ने हेम को कुष्ठ रोग और निर्वासन का… पूरी कथा पढ़ें →कम दिखाएँ ↑
धन के देवता कुबेर के माली हेम प्रतिदिन कुबेर की शिव पूजा हेतु पुष्प लाते थे। एक दिन दाम्पत्य रति के कारण देर हो गयी और देर से पुष्प लाये। बाधित पूजा से क्रुद्ध कुबेर ने हेम को कुष्ठ रोग और निर्वासन का शाप दिया। भटकते हुए हेम ने मार्कण्डेय ऋषि से भेंट की जिन्होंने आषाढ़ कृष्ण एकादशी व्रत बताया। हेम ने व्रत किया, रोग ठीक हुआ और पुनः कृपा प्राप्त हुई। ब्रह्मवैवर्त पुराण में यह कथा है।
कैसे मनाएँ
एकादशी व्रत रखें। श्वेत पुष्प (हेम का प्रायश्चित्त प्रतीक) से विष्णु पूजा। विष्णु सहस्रनाम पाठ। यह व्रत त्वचा रोग ठीक करने, स्वामी या वरिष्ठों की खोयी कृपा पुनः पाने, और कर्मजन्य माने जाने वाली शारीरिक स्थितियों के उपचार में विशेष शक्तिशाली है। इस दिन योगाभ्यास (आसन, प्राणायाम, ध्यान) प्रोत्साहित है — योगिनी नाम योग अनुशासन से जुड़ा है। जीर्ण रोगियों को भोजन और वस्त्र दान।
महत्व
योगिनी = "योग (मिलन) कराने वाली" — व्रत वियुक्त को पुनः जोड़ता है: शरीर को स्वास्थ्य से, भक्त को कृपा से, आत्मा को धर्म से। हेम कथा की शिक्षा: कर्तव्य में छोटी चूक भी परिणाम लाती है, किन्तु व्रत द्वारा सच्चा प्रायश्चित्त वापसी का मार्ग है। मानसून (आषाढ़ जून-जुलाई में पड़ता है) में विशेष रूप से रखी जाती है जब जीर्ण रोग बढ़ते हैं — आध्यात्मिक अभ्यास से व्यावहारिक राहत। "रोग मुक्ति की एकादशी।"
व्रत
एकादशी व्रत – अन्न/दाल वर्जित। दिन में योगाभ्यास (आसन, प्राणायाम) पारम्परिक रूप से अनुशंसित। द्वादशी प्रातः पारण।
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