शनि in the द्वितीय भाव
बृहत् पाराशर होराशास्त्र व्याख्या
Wealth & Speech
शास्त्रीय श्लोक
द्वितीय भाव में शनि जातक को धन और पारिवारिक सुख से वंचित करता है, आरोप लगाता है और अप्रिय मुखाकृति देता है। निरंतर कठोर परिश्रम से विलम्बित समृद्धि संकेतित है।
शास्त्रीय स्रोत देखें: BPHS Ch.24, Shloka 147-148
आधुनिक व्याख्या
धन धीरे-धीरे किन्तु स्थिर रूप से निरंतर प्रयास से आता है। वाणी नपी-तुली और कभी-कभी कठोर होती है। पारिवारिक जिम्मेदारियां बोझिल लगती हैं। सुरक्षा के लिए वित्तीय अनुशासन और बचत आवश्यक है।
कुंजी शब्द
delayed wealthdisciplinefamilypersistence