गुरु in the द्वितीय भाव
बृहत् पाराशर होराशास्त्र व्याख्या
Wealth & Speech
शास्त्रीय श्लोक
द्वितीय भाव में गुरु जातक को धनवान, विद्वान, वाक्पटु, बड़े परिवार वाला, सुंदर और सुभोजन प्रेमी बनाता है। उदात्त वाणी और समृद्धि संकेतित है।
शास्त्रीय स्रोत देखें: BPHS Ch.24, Shloka 99-100
आधुनिक व्याख्या
नैतिक माध्यमों से धन स्थिर रूप से बढ़ता है। वाणी गरिमापूर्ण और प्रभावशाली है — कानून, शिक्षण या प्रवचन के लिए उपयुक्त। पारिवारिक जीवन सामंजस्यपूर्ण और मूल्य-उन्मुख है।
कुंजी शब्द
wealthfamilyspeechethicsprosperity