शनि in the द्वादश भाव
बृहत् पाराशर होराशास्त्र व्याख्या
Loss & Liberation
शास्त्रीय श्लोक
द्वादश भाव में शनि जातक को धन और सुख से वंचित करता है, पापी बनाता है और अंग दोष दे सकता है। शुभ दृष्टि होने पर विदेश निवास और आध्यात्मिक अनुशासन संकेतित है।
शास्त्रीय स्रोत देखें: BPHS Ch.24, Shloka 167-168
आधुनिक व्याख्या
सावधानीपूर्वक प्रबंधन के बिना व्यय आय से अधिक होता है। एकांत या विदेश निवास हो सकता है। अस्पतालों, कारागारों या दानार्थ संस्थानों में सेवा। गहन आध्यात्मिक अनुशासन और अंततः वैराग्य शांति लाता है।
कुंजी शब्द
expenditureisolationforeign residencespiritual discipline