सूर्य in the द्वादश भाव
बृहत् पाराशर होराशास्त्र व्याख्या
Loss & Liberation
शास्त्रीय श्लोक
द्वादश भाव में सूर्य जातक को पिता से शत्रुता, नेत्र रोग, दरिद्रता, पुत्र अभाव और विदेश वास देता है। आध्यात्मिक प्रवृत्तियां विकसित हो सकती हैं।
शास्त्रीय स्रोत देखें: BPHS Ch.24, Shloka 23-24
आधुनिक व्याख्या
व्यय आय से अधिक हो सकता है, और आत्मपहचान एकांत या विदेश में रहकर खोजी जाती है। नेत्र स्वास्थ्य पर ध्यान दें। आध्यात्मिक साधना और दानकार्य आंतरिक शांति लाते हैं।
कुंजी शब्द
foreign travelspiritualityexpenditureeyes