मङ्गल in the द्वादश भाव
बृहत् पाराशर होराशास्त्र व्याख्या
Loss & Liberation
शास्त्रीय श्लोक
द्वादश भाव में मंगल नेत्र रोग, पापी प्रवृत्तियां, क्रूरता, पत्नी सुख की हानि और संघर्षों या छिपे शत्रुओं से व्यय देता है।
शास्त्रीय स्रोत देखें: BPHS Ch.24, Shloka 71-72
आधुनिक व्याख्या
ऊर्जा छिपे तरीकों से खर्च होती है — पर्दे के पीछे का कार्य, अस्पताल या विदेश। दबा हुआ क्रोध स्वस्थ माध्यम चाहता है। मुकदमेबाजी या गुप्त शत्रुओं से व्यय। आध्यात्मिक योद्धा मार्ग।
कुंजी शब्द
expenditureforeign landshidden enemieshospitals