गुरु in the द्वादश भाव
बृहत् पाराशर होराशास्त्र व्याख्या
Loss & Liberation
शास्त्रीय श्लोक
द्वादश भाव में गुरु जातक को अप्रिय, धन और संतान रहित और दूसरों की सेवा करने वाला बनाता है। शुभ दृष्टि होने पर आध्यात्मिक विकास, विदेश यात्रा और मोक्ष संकेतित है।
शास्त्रीय स्रोत देखें: BPHS Ch.24, Shloka 119-120
आधुनिक व्याख्या
दान, आध्यात्मिक कार्यों और विदेश यात्रा पर व्यय। प्रबल मोक्ष संकेत — निःस्वार्थ सेवा से मुक्ति। अस्पतालों, आश्रमों या विदेशी संस्थानों में कार्य। आंतरिक संपदा भौतिक संपदा से अधिक है।
कुंजी शब्द
mokshacharityforeign travelspirituality