भारत की विविध पंचांग परम्पराएँ – बंगाली, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, गुजराती, मराठी, मलयालम, ओड़िया और मैथिली – प्रत्येक की अपनी मास नाम, नववर्ष तिथि और क्षेत्रीय उत्सव
बंगाली पंचांग (बंगाब्द) मुगल सम्राट अकबर द्वारा कर संग्रह हेतु सुधारित। यह सौर पंचांग है।
बंगाली नववर्ष। मंगल शोभायात्रा, हालखाता और सांस्कृतिक कार्यक्रम।
भव्य बंगाली उत्सव – षष्ठी से दशमी तक पाँच दिवसीय दुर्गा पूजा।
दीवाली की रात काली माँ की पूजा। बंगाल की विशेष परम्परा।
शीतकालीन फसल उत्सव। नए चावल की फसल का उत्सव।
तमिल पंचांग सूर्य के 12 राशियों में गोचर पर आधारित सायन सौर पंचांग है। प्रत्येक मास सूर्य के नई राशि में प्रवेश से आरम्भ होता है।
सूर्य की उत्तर यात्रा (उत्तरायण) का उत्सव। चार दिवसीय उत्सव।
तमिल नववर्ष और मदुरै मन्दिर में मीनाक्षी तिरुकल्याणम्।
नदी जल वृद्धि और कृषि उर्वरता का उत्सव।
तिरुवन्नामलाई में दीपोत्सव – पहाड़ पर महादीपम्।
तेलुगु पंचांग शालिवाहन शक युग (78 ई.) का अनुसरण करता है। यह चान्द्र-सौर पद्धति है – अमान्त प्रणाली।
तेलुगु नववर्ष। छह स्वादों वाला उगादि पचड़ी।
तेलंगाना का पुष्प उत्सव। नौ दिवसीय आयोजन।
हैदराबाद में महाकाली को भोग अर्पण उत्सव।
तीन दिवसीय फसल उत्सव: भोगी, मकर संक्रान्ति, कनुमा।
कन्नड़ पंचांग भी शालिवाहन शक और अमान्त चान्द्र-सौर पद्धति का उपयोग करता है।
कन्नड़ नववर्ष। बेवु-बेल्ला (नीम-गुड़) जीवन के कड़वे-मीठे का प्रतीक।
श्रावण में पूर्णिमा से पहले शुक्रवार को लक्ष्मी पूजन।
भव्य मैसूर दशहरा – स्वर्ण अम्बारी के साथ 10 दिवसीय उत्सव।
एल्लु-बेल्ला विनिमय (तिल-गुड़)।
गुजराती पंचांग अनूठे रूप से दीवाली के बाद (कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा) नववर्ष मनाता है। विक्रम संवत अमान्त पद्धति।
गुजरात का प्रतिष्ठित नौ रात्रि गरबा और डांडिया रास उत्सव।
मकर संक्रान्ति पर अन्तर्राष्ट्रीय पतंग उत्सव।
दही हांडी और मन्दिर उत्सव के साथ कृष्ण जन्माष्टमी।
गुजराती नववर्ष – दीवाली के अगले दिन।
मराठी पंचांग शालिवाहन शक और अमान्त प्रणाली (मास अमावस्या पर समाप्त) का अनुसरण करता है। गुढी पाडवा नववर्ष है।
मराठी नववर्ष। घर के बाहर गुढी (सजा हुआ ध्वज) फहराया जाता है।
महाराष्ट्र का सबसे भव्य उत्सव – 10 दिवसीय गणेश पूजा, विसर्जन शोभायात्रा।
पतंगबाजी और तिल-गुड़ वितरण।
पंढरपुर वारी – लाखों वारकरी संत ज्ञानेश्वर और तुकाराम की पालखी लेकर चलते हैं।
मलयालम पंचांग (कोल्ल वर्षम्) चिंगम (सिंह) से शुरू होने वाला सौर पंचांग है। 825 ई. (कोल्लम संवत) से आरम्भ।
मलयालम खगोलीय नववर्ष। विषुक्कणि – फल, सोना और चावल की शुभ व्यवस्था प्रातः देखी जाती है।
केरल का सबसे भव्य उत्सव – राजा महाबली की स्मृति में 10 दिन। पूक्कलम्, ओणसद्या, वल्लम् काली।
शिव पर्व। महिलाएँ तिरुवातिरा काली नृत्य करती हैं।
केरल का सबसे बड़ा मन्दिर उत्सव। भव्य हाथी शोभायात्रा, कुडमट्टम् और आतिशबाजी।
ओड़िया पंचांग बैशाख (मेष संक्रान्ति) से आरम्भ होता है। जगन्नाथ मन्दिर पुरी की परम्परा से जुड़ा है।
पुरी में जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा।
नारीत्व और पृथ्वी की उर्वरता का तीन दिवसीय उत्सव।
आश्विन पूर्णिमा पर यौवन और सौन्दर्य का उत्सव।
मैथिली पंचांग विक्रम संवत और पूर्णिमान्त चान्द्र-सौर पद्धति का अनुसरण करता है (मास पूर्णिमा पर समाप्त)। मिथिला क्षेत्र – दरभंगा, मधुबनी, जनकपुर पर केन्द्रित।
कार्तिक मास में चार दिवसीय सूर्य उपासना। श्रद्धालु नदी में खड़े होकर सूर्योदय और सूर्यास्त पर अर्घ्य देते हैं। मिथिला और बिहार का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पर्व।
कार्तिक मास में मनाया जाने वाला भाई-बहन का पर्व। बहनें मिट्टी के पक्षी (सामा और चकेवा) बनाकर भाइयों की दीर्घायु की कामना करती हैं।
मार्गशीर्ष शुक्ल पञ्चमी – जनकपुर मिथिला में सीता-राम के विवाह का दिन। पुनरभिनय और यात्राएँ लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं।
वैशाख 2 (मेष संक्रान्ति के अगले दिन) – मैथिली सांस्कृतिक नववर्ष। वरिष्ठ लोग छोटों के सिर पर शीतल जल छिड़कते हैं आशीर्वाद रूप में।
| परम्परा | प्रकार | युग | वर्षारम्भ | प्रथम मास |
|---|---|---|---|---|
| बंगाली (बांग्ला) | सौर | बंगाब्द | बैशाख 1 (~14 अप्रैल) | Boishakh (বৈশাখ) |
| तमिल (तिरुवल्लुवर) | सौर | तिरुवल्लुवर | चित्तिरै 1 (~14 अप्रैल) | Chithirai (சித்திரை) |
| तेलुगु (शालिवाहन शक) | चान्द्र-सौर | शालिवाहन शक | चैत्र शुक्ल प्रतिपदा | Chaitra (చైత్రము) |
| कन्नड़ (शालिवाहन शक) | चान्द्र-सौर | शालिवाहन शक | चैत्र शुक्ल प्रतिपदा | Chaitra (ಚೈತ್ರ) |
| गुजराती (विक्रम संवत) | चान्द्र-सौर | विक्रम संवत | दीवाली अमावस्या के बाद | Kartik (કારતક) |
| मराठी (शालिवाहन शक) | चान्द्र-सौर | शालिवाहन शक | चैत्र शुक्ल प्रतिपदा | Chaitra (चैत्र) |
| मलयालम (कोल्लम संवत) | सौर | कोल्लम युग | चिंगम 1 (~17 अगस्त) | Chingam (ചിങ്ങം) |
| ओड़िया (ओड़िया संवत) | सौर | अमली / ओड़िया युग | पाना संक्रांति (~14 अप्रैल) | Baisakha (ବୈଶାଖ) |
| मिथिला (मैथिली पञ्जिका) | चान्द्र-सौर (पूर्णिमान्त) | विक्रम संवत | चैत्र शुक्ल प्रतिपदा | Chaitra (चैत) |