छठ पूजा 2029
छठ पूजा 2029 लेल सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त आ शहरक अनुसार समय
मुख्य जानकारी
पर्वक तिथि
Sunday, November 11, 2029
2029 कें पंचांग संदर्भ
दिन
रविवार
विक्रम संवत्
2086
शक संवत्
1951
This year Chhath Puja falls on a Sunday, 19 days later than 2028 (2028-10-23) — typical lunar-calendar drift.
City-Wise Timings for Chhath Puja 2029
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 6:40 AM | 5:29 PM |
| मुंबई | 6:43 AM | 6:01 PM |
| बेंगलुरु | 6:16 AM | 5:50 PM |
| चेन्नई | 6:06 AM | 5:39 PM |
| कोलकाता | 5:46 AM | 4:54 PM |
| पुणे | 6:38 AM | 5:58 PM |
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छठ पूजा 2029 आपकी राशि के लिए क्या लाता है?
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छठ पूजा — क्या करें, क्या न करें
धर्मसिन्धु, निर्णयसिन्धु, एवं समकालीन परम्परा से।
करने योग्य
- Maintain ritual purity for all four days — clean water for cooking, fresh clothes.
- Offer arghya (water) to the setting sun on day 3 (Sandhya Arghya).
- Offer arghya to the rising sun on day 4 (Usha Arghya) — concludes the puja.
- Prepare thekua (jaggery + flour sweet) as the chief prasad.
न करें
- Do not allow non-fasting people to touch the prasad before offering.
- Do not use onion, garlic, or any tamasic ingredient in the prasad.
- Avoid wearing stitched clothing for the actual ghat rituals (saree/dhoti only).
- Do not break the fast before the Usha Arghya on day 4.
छठ पूजा 2029 शुभकामनाएँ — साझा करने योग्य संदेश
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Standing in the water, offering arghya to a setting sun — gratitude before request. Wishing you that order. Shubh Chhath.
Four days, no shortcuts. Wishing the women who keep this fast the strength of the rivers they stand in.
The sun is the only god you can see. Chhath is when you say so out loud. Wishing you that clarity.
Thekua in the basket, knees in the cold water, the sun on its way down. Wishing the women keeping this fast the strength they have already earned.
Three generations standing in the water at sunset. The festival is a family album that prints itself every year. Shubh Chhath.
छठ पूजा वर्षों में — २०२०-२०३०
पिछले एवं भविष्य के वर्षों की तिथियाँ — एक स्थान पर।
ई तिथि किएक?
Chhath Puja follows the Udaya Tithi rule – the festival is observed on the day when the required tithi prevails at sunrise. This is the default Dharmasindhu convention for festivals without a special time-window requirement.
पूजा विधि
पूजाक चरण
- 1
पहिल दिन: नहाय खाय (पवित्र स्नान आ भोजन)
व्रती (व्रत करय वला भक्त) सूर्योदयक समय नदी वा पोखरिमे पवित्र स्नान करैत छथि। माटिक चूल्हिमे बनल लौकीक तरकारी, चना दाल आ...
- 2
दोसर दिन: खरना (व्रत आ साँझक अर्पण)
व्रती दिनभरि बिना जल (निर्जला) व्रत करैत छथि। साँझमे, सूर्यास्तक बाद, खीर (गुड़ आ दूध सँ बनल चावलक खीर) आ रोटी सँ व्रत त...
- 3
तेसर दिन: सन्ध्या अर्घ्य (साँझक सूर्य अर्पण)
बाँसक सूपमे ठेकुआ, चावलक लड्डू, फल (केरा, नारियल, कागती), ईख आ अन्य सामग्रीसभक सब अर्पण तैयार करू। व्रती, नव वस्त्र पहिर...
व्रत फल (व्रतक लाभ)
परिवारक स्वास्थ्य, जीवन शक्ति आ दीर्घायुक लेल; बच्चाक संरक्षण; त्वचा आ आँखिक रोगक उपचार; हृदय सँ चाहल गेल इच्छाक पूर्ति; आ समृद्धि आ संतानक लेल छठी मैयाक कृपा हेतु सूर्य देवताक आशीर्वाद।
देवता
सूर्य देव, छठी मैया (उषा)
कथा आ इतिहास
छठ पूजा भारतीय उपमहाद्वीप कऽ निरन्तर सबसँ प्राचीन पर्व मे सँ एक अछि। अथर्ववेद आ ऋग्वेद दूनू मे सूर्य आ उषा कऽ स्तोत्र अछि जे आइ कऽ छठ मन्त्र शब्दशः उद्धृत करैत अछि। बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश… पूरा कथा पढू →कम देखाबू ↑
छठ पूजा भारतीय उपमहाद्वीप कऽ निरन्तर सबसँ प्राचीन पर्व मे सँ एक अछि। अथर्ववेद आ ऋग्वेद दूनू मे सूर्य आ उषा कऽ स्तोत्र अछि जे आइ कऽ छठ मन्त्र शब्दशः उद्धृत करैत अछि। बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश आ नेपाल कऽ तराई मे कार्तिक शुक्ल षष्ठी कऽ मनाओल जाइत अछि।
महाभारत मे द्रौपदी धौम्य ऋषि कऽ आदेश सँ राज्य पुनः प्राप्ति लेल छठ व्रत आरम्भ कयलनि। पाण्डव संग रखलनि। राज्य फिनु भेटल।
दोसर कथा कर्ण कऽ — कुन्ती-सूर्य कऽ पुत्र, दैनिक सूर्योपासक। कमर तक जल मे ठाढ़ भऽ कऽ सूर्याष्टक पाठ आ अंजुली सँ अर्घ्य। इयैह छठ-व्रती कऽ मुद्रा कऽ स्रोत।
तेसर कथा सीता कऽ — सीतामढ़ी मे छठ रखलनि।
चौथ कथा ब्रह्मवैवर्त सँ — छठी मैया देवसेना (स्कन्द कऽ पत्नी), बालक कऽ रक्षिका।
चारि दिनक संरचना: पहिल नहाय-खाय, दोसर खरना (36-घण्टा निर्जला आरम्भ), तेसर सन्ध्या अर्घ्य (डूबैत सूर्य लेल), चौथ उषा अर्घ्य (उगैत सूर्य लेल)।
एहि पर्व मे न पुरोहित, न मन्दिर, न मूर्ति — व्रती सीधे जल मे ठाढ़ भऽ कऽ दृश्य सूर्य सँ बात करैत छथि।
कनाय पालन करब
चारि दिनक कठोर उत्सव: पहिल दिन (नहाय खाय) – पवित्र स्नान आ एक भोजन; दोसर दिन (खरना) – दिनभरि उपवास, सूर्यास्त बाद खीर-रोटी; तेसर दिन (सन्ध्या अर्घ्य) – नदी वा तालाब मे ठाढ़ भऽ कऽ डूबैत सूर्य केँ अर्घ्य; चौथ दिन (उषा अर्घ्य) – उगैत सूर्य केँ अर्घ्य।
महत्व
छठ एकमात्र वैदिक उत्सव अछि जे सूर्य कऽ जीवनदायी शक्ति कऽ उपासना केँ समर्पित अछि। ई बिहार, झारखण्ड आ पूर्वी उत्तर प्रदेश कऽ सबसँ महत्वपूर्ण त्योहार अछि।
व्रत
अत्यन्त कठोर – 36 घण्टा बिना भोजन-जल। भक्त सूर्यास्त आ सूर्योदय दुनू समय ठण्ढा नदी-जल मे ठाढ़ रहैत छथि।
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