गुरु पूर्णिमा 2028
गुरु पूर्णिमा 2028 लेल सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त आ शहरक अनुसार समय
मुख्य जानकारी
पर्वक तिथि
Wednesday, July 5, 2028
2028 कें पंचांग संदर्भ
दिन
बुधवार
विक्रम संवत्
2085
शक संवत्
1950
This year Guru Purnima falls on a Wednesday, 12 days earlier than 2027 (2027-07-18) — typical lunar-calendar drift.
City-Wise Timings for Guru Purnima 2028
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 5:28 AM | 7:22 PM |
| मुंबई | 6:06 AM | 7:20 PM |
| बेंगलुरु | 5:58 AM | 6:50 PM |
| चेन्नई | 5:47 AM | 6:39 PM |
| कोलकाता | 4:57 AM | 6:25 PM |
| पुणे | 6:03 AM | 7:15 PM |
Click any city for detailed local timings, puja vidhi & samagri list
गुरु पूर्णिमा 2028 आपकी राशि के लिए क्या लाता है?
अपनी चन्द्र राशि चुनें — मन्दगति ग्रहों के गोचर के आधार पर पर्व का व्यक्तिगत संकेत
अपनी राशि नहीं जानते? चन्द्र राशि कैलकुलेटर खोलें →गुरु पूर्णिमा 2028 के लिए विस्तृत व्यक्तिगत पाठ चाहिए?
बृहस्पति आपकी पूरी कुण्डली, गोचर एवं दशा का विश्लेषण करके पर्व-दिवस का सटीक मार्गदर्शन देंगे।
गुरु पूर्णिमा — क्या करें, क्या न करें
धर्मसिन्धु, निर्णयसिन्धु, एवं समकालीन परम्परा से।
करने योग्य
- Visit your teacher / guru / mentor in person, or call if not possible.
- Offer a dakshina (gift, money, fruit, books) — gratitude made tangible.
- Read or re-read a teaching from a guru that has shaped you.
- Perform Vyasa puja — Vyasa is the original guru of Vedic tradition.
न करें
- Do not begrudge a teacher's correction — the lesson is the offering, not the comfort.
- Avoid disrespecting your line of teachers, parents, or elders today.
- Do not skip touching the feet of your guru/elder if you meet them today.
- Avoid arguments with your spouse / family — discord here weakens dharma karaka.
गुरु पूर्णिमा 2028 शुभकामनाएँ — साझा करने योग्य संदेश
क्लिक करें — साझा करने के लिए तैयार। ये सभी मूल रचनाएँ हैं — व्यावसायिक उपयोग के लिए स्वतन्त्र।
A guru is anyone who removed darkness for you, even once. Wishing you the gratitude to name them today. Guru Purnima wishes.
Books, teachers, podcasts, parents — Guru Purnima is the day we thank every voice that taught us something we now know.
The first guru was a parent. Wishing you the call you have been postponing.
Send one message to a former mentor with the words "this worked" attached. Guru Purnima is gratitude with evidence.
May the teaching that shaped you find its way back to its source today. Shubh Guru Purnima.
गुरु पूर्णिमा वर्षों में — २०२०-२०३०
पिछले एवं भविष्य के वर्षों की तिथियाँ — एक स्थान पर।
ई तिथि किएक?
Guru Purnima follows the Udaya Tithi rule – the festival is observed on the day when the required tithi prevails at sunrise. This is the default Dharmasindhu convention for festivals without a special time-window requirement.
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- गुरुक चित्र वा पादुका (चप्पल)
- फूल (उज्जर आ पीयर बेसी पसिन्न कएल जाइत अछि)
- फल
- चन्दन लेप
- अक्षत (अखण्डित चाउर)
पूजाक चरण
- 1
तैयारी
भोरमे उठू, स्नान करू आ स्वच्छ उज्जर वा हल्का रंगक वस्त्र धारण करू। पूजा स्थानकेँ स्वच्छ करू आ गुरुक फोटो वा पादुकाकेँ एक...
- 2
ध्यान (गुरु पर ध्यान)
गुरुक प्रतिमाक समक्ष ध्यान मुद्रा मे बैसू। अपन आँखि बन्न करू आ अपन गुरुक स्वरूप, शिक्षा आ कृपा पर ध्यान करू। गुरु परम्पर...
- 3
पाद्य (पैर धोयब)
गुरु केर पादुका वा चित्र पर पाद्य (पैर धोयबाक लेल जल) अर्पित करू। गुरु मन्त्रक जप करैत काल पादुका पर जल चढ़ाऊ। यदि गुरु ...
फल (लाभ)
सत्य ज्ञान आ बुद्धिक प्राप्ति, अज्ञानताक नाश, आध्यात्मिक उन्नति आ मोक्ष, सम्पूर्ण गुरु परम्पराक आशीर्वाद, शिक्षा आ अध्ययनमे सफलता, आ वेद व्यासक कृपा।
देवता
वेदव्यास / गुरु
कथा आ इतिहास
गुरु पूर्णिमा — आषाढ़ पूर्णिमा — व्यास पूर्णिमा सेहो कहल जाइत अछि, वेद-व्यास कऽ नाम सँ। पूरा कथा पढू →कम देखाबू ↑
गुरु पूर्णिमा — आषाढ़ पूर्णिमा — व्यास पूर्णिमा सेहो कहल जाइत अछि, वेद-व्यास कऽ नाम सँ।
व्यास कऽ जन्म ऋषि पराशर आ सत्यवती सँ यमुना कऽ द्वीप पर भेल। ओ कृष्ण-द्वैपायन कहाओल। वैदिक मन्त्र राशि कऽ चारि वेद मे विभाजन कयलनि — ऋग्, यजुः, साम, अथर्व। चारि शिष्य कऽ एक-एक सिखाओल। महाभारत आ अठारह पुराण कऽ रचना। ताहि सँ आषाढ़ पूर्णिमा गुरु-शिष्य परम्परा कऽ मूल स्रोत पर लौटैक दिन अछि।
दोसर कथा शिव पुराण सँ — आदियोगी शिव सप्तर्षि कऽ ओही दिन पहिल बेर योग सिखयलनि। ई व्याख्यान नहि छल — उपस्थिति कऽ सीधा संप्रदान छल।
बौद्ध परम्परा मे ई बुद्ध कऽ सारनाथ मे पहिल धर्मचक्र प्रवर्तन कऽ दिन। जैन परम्परा मे महावीर कऽ इन्द्रभूति गौतम कऽ पहिल शिष्य बनयबाक दिन।
ब्रह्म पुराण कऽ अनुसार एहि दिन गुरु-शिष्य कऽ धारा पूर्ण बल पर बहैत अछि। व्यास पूजा गुरु कऽ आसन सामने, फूल-फल-ग्रन्थ-दक्षिणा कऽ अर्पण सँ। गुरु स्तोत्र — "गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः..."।
तीन प्रमुख धर्म कऽ एक पूर्णिमा पर सङ्गम — एहि पर्व कऽ शिक्षा।
कनाय पालन करब
अपने शिक्षकों और गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें। गुरु पूजा करें। फूल, फल और दक्षिणा अर्पित करें।
महत्व
आषाढ़ की पूर्णिमा गुरु तत्व को समर्पित है – अन्धकार का निवारक (गु = अन्धकार, रु = निवारक)।
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