महाशिवरात्रि 2028
महाशिवरात्रि 2028 लेल सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त आ शहरक अनुसार समय
मुख्य जानकारी
पर्वक तिथि
Wednesday, February 23, 2028
Nishita Kaal Puja (दिल्ली)
12:08 AM – 12:59 AM
2028 कें पंचांग संदर्भ
दिन
बुधवार
विक्रम संवत्
2085
शक संवत्
1950
This year Maha Shivaratri falls on a Wednesday, 11 days earlier than 2027 (2027-03-06) — typical lunar-calendar drift.
City-Wise Timings for Maha Shivaratri 2028
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त | पूजा मुहूर्त |
|---|---|---|---|
| दिल्ली | 6:53 AM | 6:16 PM | 12:08 AM – 12:59 AM |
| मुंबई | 7:02 AM | 6:41 PM | 12:26 AM – 1:16 AM |
| बेंगलुरु | 6:38 AM | 6:27 PM | 12:08 AM – 12:57 AM |
| चेन्नई | 6:28 AM | 6:16 PM | 11:57 PM – 12:46 AM |
| कोलकाता | 6:03 AM | 5:36 PM | 11:24 PM – 12:14 AM |
| पुणे | 6:58 AM | 6:37 PM | 12:22 AM – 1:12 AM |
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महाशिवरात्रि — क्या करें, क्या न करें
धर्मसिन्धु, निर्णयसिन्धु, एवं समकालीन परम्परा से।
करने योग्य
- Observe a full-day fast (water and milk allowed); break it the next morning after sunrise.
- Offer bel patra leaves on a Shiva linga — the most cherished offering on this night.
- Stay awake during Nishita Kaal (~midnight) and chant Om Namah Shivaya.
- Visit any Shiva temple at least once — pradakshina (circumambulation) is encouraged.
- Practice silence (mauna) for at least an hour during the night vigil.
- Donate to a Shaiva ashram or to wandering sadhus on this day.
न करें
- Do not eat grains or salt during the fast (only fruits, milk, sabudana permitted).
- Do not sleep through Nishita Kaal — the festival's entire potency is in staying awake.
- Avoid wearing red — white, black, or off-white is preferred for Shiva worship.
- Do not offer turmeric, kumkum, or coconut water on the Shiva linga.
- Avoid engaging in worldly business or major contracts today — the day belongs to inner work.
- Do not consume alcohol, meat, or onion-garlic — incompatible with the vrata's sattvic spirit.
महाशिवरात्रि 2028 शुभकामनाएँ — साझा करने योग्य संदेश
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Tonight Shiva is closest to those who sit still. Wishing you the quietness to notice. Om Namah Shivaya.
Mahadev is the karaka of letting go. Whatever you have been clutching, this is the night to set it down. Har Har Mahadev.
A bel patra, a lamp, and one honest line about what you want to change. That's enough for Mahashivaratri. Wishing you a still night.
Tonight there is a god who chooses not to be photographed. Wishing you the discipline to do work nobody applauds. Om Namah Shivaya.
Whoever you have been trying to forgive — whisper their name into the lamp before midnight. Mahashivaratri is the night to set it down.
महाशिवरात्रि वर्षों में — २०२०-२०३०
पिछले एवं भविष्य के वर्षों की तिथियाँ — एक स्थान पर।
ई तिथि किएक?
निशिता काल (मध्यरात्रि) नियम: ओहि दिन मनाओल जाइत अछि जखन निशिता काल (रातिक आठम मुहूर्त, लगभग ११:४० राति सँ १२:२८ भोर धरि) मे चतुर्दशी तिथि रहैत अछि। शिव मध्यरात्रि मे प्रकट भेलाह, एहि कारण ई पवित्र अवलोकन काल अछि।
तिथि निर्धारणक नियम
The tithi must prevail during Nishita Kaal (midnight). Used for festivals like Maha Shivaratri and Janmashtami.
Source: Dharmasindhu & Nirnayasindhu – classical Kala-Vyapti system
पूजा विधि
पूजाक चरण
- 1
व्रत सङ्कल्प आ तैयारी
भोर सँ उपवास शुरू करू। स्नान करू, स्वच्छ वस्त्र धारण करू, आ शिवलिंगक लग शिवरात्री व्रतक लेल औपचारिक सङ्कल्प करू।
- 2
आचमन ओ प्राणायाम
शुद्धिकरणक लेल आचमन (जलपान) करू, तत्पश्चात् मनकेँ शान्त करबाक लेल तीन बेर प्राणायाम (श्वास नियन्त्रण) करू।
- 3
ध्यान (शिव पर ध्यान)
भगवान शिव पर ध्यान करू – त्रिनेत्रधारी, चन्द्रशेखर, नीलकण्ठ, त्रिशूल, डमरू ओ वरद मुद्रा धारण कएने, नन्दीक संग कैलाश पर्व...
व्रत फल (व्रतक लाभ)
मोक्ष (जन्म-मृत्यु चक्र सँ मुक्ति), संचित पापक पूर्ण विनाश (पाप नाशन), शिवक प्रत्यक्ष कृपा आ दर्शन, सभटा धार्मिक इच्छाक पूर्ति, आ आध्यात्मिक जागरण
देवता
भगवान शिव
कथा आ इतिहास
महाशिवरात्रि — फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी कें महान रात्रि — सँ अनेक पुराण शिव कें विविध लीला जोड़ैत अछि। पूरा कथा पढू →कम देखाबू ↑
महाशिवरात्रि — फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी कें महान रात्रि — सँ अनेक पुराण शिव कें विविध लीला जोड़ैत अछि।
शिव पुराण कें केन्द्र मे शिव-पार्वती विवाह अछि। दक्ष यज्ञ कें अग्नि मे सती कें देहत्याग कें बाद शिव कैलास पर दीर्घ तपस्या मे लीन भय गेलाह। पर्वतराज कें पुत्री पार्वती ओकरे समान कठोर तपस्या कयलनि — ऋतु पर्यन्त उपवास, एक पाद स्थित, गिरल पात कें भोजन, अन्त मे पात कें सेहो त्याग (अपर्णा)। देवता, यह जानि कय जे तारकासुर कें वध केवल शिव-पुत्र कय सकैत छथि, कामदेव कें तप-भङ्ग कें लेल पठयलनि — आ काम भस्म भेल। पार्वती कें तपस्या तखन तक चलल जखन तक शिव स्वयं द्रवित नहि भय गेलाह; ओ पर्वत सँ उतरि कय हुनका वर रूप मे स्वीकार कयलनि, आ फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी कें मध्य रात्रि मे ब्रह्मा कें पौरोहित्य मे दिव्य विवाह सम्पन्न भेल। भक्त कें रात-जागरण ओही वर-प्रतीक्षा कें पुनरावृत्ति अछि।
दोसर कथा समुद्र मन्थन कें अछि। क्षीर-सागर मन्थन मे सबसँ पहिने अमृत नहि, हलाहल विष प्रकट भेल — एहन प्रबल जे एक बूँद सँ लोक नष्ट भय जाय। देवता शिव कें शरण मे गेलाह; शिव विष कें कण्ठ मे धारण कयलनि, आ पार्वती हुनकर कण्ठ दबा कय रखलनि। कण्ठ नील भय गेल, ओ नीलकण्ठ कहाओल। चारि प्रहर कें अभिषेक ओही उपकार कें प्रत्युपकार अछि।
तेसर परम्परा — काश्मीर शैव दर्शन कें — ओही रात्रि अछि जखन शिव अनन्त ज्योतिर्लिङ्ग रूप मे पहिल बेर प्रकट भेल। ब्रह्मा-विष्णु ओकर अन्त नहि पाबि सकलाह। प्रत्येक शिवलिङ्ग ओही अप्रमेय अग्नि-स्तम्भ अछि।
चौथा, मधुर कथा एक व्याध कें अछि जे ओही रात्रि वन मे रास्ता हरा बैसल। बिल्व-वृक्ष पर चढ़ि कय जागल रहय कें लेल रात भर पात तोड़ि कय नीचा गिरबैत रहल — जे अनजान मे मूल मे स्थित शिवलिङ्ग पर गिरैत रहल। ओकर अनैच्छिक रात्रि-जागरण आ अनिच्छित अर्पण ओकरा मोक्ष देलक।
कनाय पालन करब
कठोर उपवास रखें (निर्जला या फलाहार)। रात भर जागें (जागरण)। चार प्रहरों में शिवलिंग पर बेलपत्र, दूध, जल और शहद चढ़ाएँ। "ओम नमः शिवाय" का जाप करें।
महत्व
वर्ष की सबसे अन्धकारमय रात्रि – अन्धकार और अज्ञान पर विजय का प्रतीक। इस रात्रि शिव की ऊर्जा सर्वाधिक सुलभ मानी जाती है।
व्रत
कठोर व्रत (निर्जला या केवल फलाहार)। अगली सुबह पूजा के बाद पारण करें।
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