रक्षाबन्धन 2030
रक्षाबन्धन 2030 लेल सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त आ शहरक अनुसार समय
मुख्य जानकारी
पर्वक तिथि
Tuesday, August 13, 2030
2030 कें पंचांग संदर्भ
दिन
मंगलवार
विक्रम संवत्
2087
शक संवत्
1952
This year Raksha Bandhan falls on a Tuesday, 11 days earlier than 2029 (2029-08-24) — typical lunar-calendar drift.
City-Wise Timings for Raksha Bandhan 2030
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 5:49 AM | 7:03 PM |
| मुंबई | 6:18 AM | 7:07 PM |
| बेंगलुरु | 6:07 AM | 6:42 PM |
| चेन्नई | 5:56 AM | 6:31 PM |
| कोलकाता | 5:12 AM | 6:11 PM |
| पुणे | 6:15 AM | 7:03 PM |
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रक्षाबन्धन 2030 आपकी राशि के लिए क्या लाता है?
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रक्षाबन्धन — क्या करें, क्या न करें
धर्मसिन्धु, निर्णयसिन्धु, एवं समकालीन परम्परा से।
करने योग्य
- Sister ties the rakhi on the brother's right wrist during the Aparahna kaal (afternoon).
- Brother offers a gift, money, or commitment of protection in return.
- Apply tilak (rice + kumkum) before tying — the protective mark.
- Recite the protection mantra "Yena baddho Balī rājā..." while tying the rakhi.
न करें
- Do not tie the rakhi during the Bhadra time window — considered inauspicious for any auspicious act.
- Do not use a black thread or any color associated with mourning.
- Avoid using one-time-use plastic decorations — many sustainable rakhi options now exist.
- Do not skip the ritual due to physical distance — courier-rakhi + video-tying is acceptable tradition now.
रक्षाबन्धन 2030 शुभकामनाएँ — साझा करने योग्य संदेश
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A thread is not very strong on its own. The promise behind it is what holds. Wishing you a Raksha Bandhan that proves it.
Brother, sister, cousin, friend — whoever ties your wrist this year, they're saying 'I'll show up.' Wishing you that promise kept.
May the rakhi you tie outlive every quarrel. Shubh Raksha Bandhan.
If your brother is far this year, a video call still counts. Tie the rakhi on a chair if you have to. The thread doesn't care about geography.
A brother-sister bond is the cleanest contract you ever signed without paperwork. Wishing you that contract honoured today.
रक्षाबन्धन वर्षों में — २०२०-२०३०
पिछले एवं भविष्य के वर्षों की तिथियाँ — एक स्थान पर।
ई तिथि किएक?
Raksha Bandhan follows the Udaya Tithi rule – the festival is observed on the day when the required tithi prevails at sunrise. This is the default Dharmasindhu convention for festivals without a special time-window requirement.
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- राखी (पवित्र धागा)
- रोली / कुमकुम (सिन्दूर)
- अक्षत (अखण्डित चावल)
- दीपक (तेल/घीक दीप)
- मिश्री
पूजाक चरण
- 1
आरतीक थालीक तैयारी
बहिन जरैत दीया, रोली, अक्षत, मिश्री, एकटा फूल आ राखीक संग आरतीक थाली तैयार करैत अछि। दुनू भाई आ बहिनकेँ स्नान करबाक चाही...
- 2
भाईक आरती
बहिन जरैत दीयाक थालीकेँ भाईक मुँहक चारू कात तीन बेर दक्षिणावर्त घुमा कय हुनकर आरती करैत अछि।
- 3
कपार पर तिलक
बहिन अनामिका अँगुरिसँ भाईक कपार पर रोलीक तिलक लगबैत अछि, फेर तिलक पर अक्षत (चाउर) रखैत अछि। ई हुनका शुभ आशीर्वादसँ चिह्न...
फल (लाभ)
भाई-बहिनक पवित्र बन्धनकेँ मजबूत करैत अछि, भाइक दीर्घायु आ समृद्धि सुनिश्चित करैत अछि, दुनू भाई-बहिनकेँ दैवी सुरक्षा प्रदान करैत अछि, आ कुलक आशीर्वादकेँ आह्वान करैत अछि।
देवता
लक्ष्मी / कृष्ण
कथा आ इतिहास
रक्षा बन्धन — रक्षा-सूत्र बान्ह कें पर्व — श्रावण पूर्णिमा कें मनायल जाइत अछि, आ एकर अर्थ कें अनेक भिन्न परम्परा अछि। पूरा कथा पढू →कम देखाबू ↑
रक्षा बन्धन — रक्षा-सूत्र बान्ह कें पर्व — श्रावण पूर्णिमा कें मनायल जाइत अछि, आ एकर अर्थ कें अनेक भिन्न परम्परा अछि।
सबसँ प्राचीन परत वैदिक-पौराणिक रक्षा-सूत्र अछि: एक पवित्र धागा कलाई पर बान्हल जाइत अछि आ मन्त्र पढ़ल जाइत अछि — "येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे माचल माचल॥" यह प्राचीन रूप भाइ-बहीन सँ आवश्यक रूप सँ सम्बद्ध नहि अछि — यह स्वयं देवता कें रक्षा-गाँठ अछि।
भागवत पुराण ओहि मन्त्र कें पाछाँ कें कथा दैत अछि। विष्णु वामन अवतार मे तीन पग चलि कय राजा बलि कें सुतल लोक मे दबा देलखिन्ह — मुदा बलि कें उदारता सँ प्रसन्न भय हुनकर द्वारपाल बनय कें वचन देलखिन्ह। वैकुण्ठ मे लक्ष्मी पति-वियोग सँ व्याकुल भेलि आ श्रावण पूर्णिमा कें ब्राह्मणी कें वेश मे सुतल पधारलि।
महाभारतीय परत आइ सबसँ जीवन्त अछि। युद्ध मे कृष्ण कें औंगुर चक्र सँ कटि गेल; द्रौपदी अपन साड़ी कें आँचल फाड़ि कय घाव बान्हलनि। कृष्ण ओकर वस्त्र कें अनन्त वस्त्र सँ प्रत्युत्तर देबय कें वचन देलखिन्ह — जे कौरव सभा मे चीर-हरण कें समय निभाओल गेल।
मध्यकालीन इतिहास सँ तेसर परत अबैत अछि — मेवाड़ कें रानी कर्णावती हुमायूँ कें रक्षा-सूत्र भेजने छलथि।
आइ मनायल जाय वाला पर्व ताहि सब अर्थ एक संग धारण करैत अछि।
कनाय पालन करब
बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बाँधती हैं, तिलक लगाती हैं, मिठाई खिलाती हैं। भाई उपहार देते हैं और रक्षा का वचन देते हैं।
महत्व
भाई-बहन के पवित्र बन्धन और रक्षा के कर्तव्य का उत्सव।