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अमलयोगः
निर्माण नियम
चन्द्रमा अथवा लग्नसँ दसम भावमे शुभ ग्रह
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
अमल (निर्मल) योग तखन बनैत अछि जखन कोनो शुभ ग्रह ग्रह चन्द्रमा अथवा लग्नसँ दसम भावमे स्थित होथि। ई निर्मल प्रतिष्ठा, नैतिक चरित्र, आ सदाचारी कर्मसँ स्थायी यश प्रदान करैत अछि। जातकक जीवनवृत्ति ईमानदारी आ लोकसेवासँ चिह्नित रहैत अछि।
प्रतिष्ठा
निर्मल प्रतिष्ठा, नैतिक जीवनवृत्ति, सत्कर्मसँ स्थायी यश।
अमला योग बला व्यक्ति प्रायः एहन पेशामे पाबैत छथि जे उच्च ईमानदारीक मांग करैत अछि, जेना सार्वजनिक सेवा, शिक्षा वा नैतिक नेतृत्व। हुनकर सार्वजनिक छवि सामान्यतः बेदाग रहैत अछि, जे हुनका अपन सहकर्मी आ समाज सँ स्थायी सम्मान आ विश्वास अर्जित करबैत अछि। हुनका हुनकर नैतिक दिशाक लेल पहचानल जाइत अछि आ ओ आत्म-प्रचारक बजाय अपन सद्गुणपूर्ण कार्यसभक माध्यम सँ प्रसिद्धि प्राप्त करैत छथि। ई योग एहन स्वभाव केँ बढ़ावा दैत अछि जे ईमानदारी आ नैतिक आचरण केँ सभ सँ ऊपर मानैत अछि।
अमला योगक परिणाम सामान्यतः योग बनाबय बला शुभ ग्रहक वा दशम भावक स्वामीक दशा वा अंतर्दशा कालमे प्रकट होइत अछि। चंद्रक काल (यदि योग चंद्र सँ बनल हो) वा लग्न स्वामीक काल सेहो एहि प्रभावसभकेँ फलीभूत क' सकैत अछि।