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भाग्ययोगः
निर्माण नियम
नवम भावक स्वामी नवम भावमे स्वराशिमे
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
परम सौभाग्य — नवमेश स्वगृहमे रहलापर भाग्य प्रबल होइत अछि। पिता समृद्ध, दैवी आशीर्वाद, तीर्थयात्रा, धर्मसँ अर्जित धन। भाग्येशक लेल सर्वाधिक शुभ स्थितिमेसँ एक।
परम सौभाग्य
प्रबल भाग्य, समृद्ध पिता, दैवी आशीर्वाद।
भाग्य योगवला व्यक्ति सामान्यतः धार्मिक आ आशावादी स्वभावक होइत छथि, प्रायः नैतिक साधन आ ईश्वरीय कृपा सँ सफलता प्राप्त करैत छथि। हुनका अपन करियरमे, विशेषतः शिक्षण, आध्यात्मिकता वा कानून सँ संबंधित क्षेत्रसभमे, नीक भाग्यक अनुभव होइत छन्हि आ प्रायः बुजुर्ग आ गुरु लोकनिक संग सामंजस्यपूर्ण संबंधक आनंद लैत छथि। एकटा समृद्ध पिताक आकृति सामान्य बात अछि, आ सकारात्मक दृष्टिकोण आ धर्मक पालनक कारण स्वास्थ्य प्रायः सुदृढ़ रहैत छन्हि।
योगक पूर्ण परिणाम प्रायः नवमेशक दशा वा अन्तर्दशा कालमे, वा गुरुक कालमे प्रकट होइत अछि, जे भाग्य आ धर्मक नैसर्गिक कारक छथि, खास कऽ जँ ओ सुस्थित होथि।