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ग्रहणदोषः
निर्माण नियम
सूर्य वा चन्द्रमा कें राहु वा केतु संग युति।
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
ग्रहण दोष तखन बनैत अछि जखन प्रकाशमान ग्रह (सूर्य वा चन्द्रमा) चंद्र नोड (राहु वा केतु) संग युति करैत अछि। ई जन्म कुण्डली मे एकटा "ग्रहण" उत्पन्न करैत अछि — जीवन शक्ति (सूर्य) वा मन (चन्द्रमा) आंशिक रूप सँ छायांकित होइत अछि।
प्रभाव एहि बात पर निर्भर करैत अछि जे कोन प्रकाशमान ग्रह ग्रहणग्रस्त अछि आ कोन भाव मे अछि। सूर्य-राहु/केतु अहंकार, अधिकार, आ पिता कें प्रभावित करैत अछि; चन्द्रमा-राहु/केतु भावना, माता, आ मानसिक शांति कें प्रभावित करैत अछि। चुनौतीक बावजूद, ई योग अनुसंधान क्षमता, गुप्त ज्ञान, आ गहन अंतर्दृष्टि प्रदान कऽ सकैत अछि।
अधिकार आ अहंकार
अधिकारक व्यक्ति संग चुनौती, अहंकार मे भ्रम, पहचानक संकट। सूर्य-राहु: पिता सँ संबंधित समस्या। सूर्य-केतु: आध्यात्मिक अहंकारक मृत्यु।
भावना आ मन
भावनात्मक उथल-पुथल, चिंताक पैटर्न, मुदा मजबूत अंतर्ज्ञान सेहो। चन्द्रमा-राहु: जुनूनी मन। चन्द्रमा-केतु: विरक्त भावना।
ग्रहण दोष सँ प्रभावित व्यक्ति प्रायः अस्थिर करियर मार्गक अनुभव करैत छथि, विशेषतः अधिकारक आवश्यकता वाला पदसभ मे, वा वरिष्ठसभक संग चुनौतीसभक सामना करैत छथि। सम्बन्धक गतिशीलता जटिल भऽ सकैत अछि, विशेषतः माता-पिताक संग, जे भावनात्मक अस्थिरता वा अनासक्तिक भावना सँ चिह्नित होइत अछि। स्वभावतः, गहन आत्मनिरीक्षण आ चिन्ताक कालखण्ड भऽ सकैत अछि, मुदा संगहि गुप्त सत्यसभक खोज वा गूढ़ अध्ययन मे संलग्नताक लेल एकटा गम्भीर प्रेरणा सेहो रहैत अछि।
ग्रहण दोषक प्रभाव सामान्यतः सूर्य, चन्द्र, राहु वा केतुक महादशा वा अन्तर्दशा (दशा/अन्तर्दशा) मे प्रकट होइत अछि। ई कालखण्ड ग्रहणक चुनौती आ सम्भावित अन्तर्दृष्टि केँ प्रमुखता मे आनैत अछि।
मन्त्र
ॐ राहवे नमः / ॐ केतवे नमः
दान
ग्रहणक दिन दान करू। नवग्रह शांति पूजा करू।