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सर्पयोगः
निर्माण नियम
तीन केन्द्रमे पाप ग्रह, शुभ ग्रह केवल तेसर/छठम/एकादशमे
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
सर्प योग — पाप ग्रह केन्द्र भावमे प्रभावी भऽ कुण्डलित सर्पक समान संघर्ष, छल-कपट, आ कष्ट आनैत छथि। ई माला योगक विपरीत अछि।
संघर्ष
छल-कपट, कष्ट, मुख्य भावमे पाप ग्रह क प्रभुत्व।
सर्प योगवला व्यक्तिसभ प्रायः महत्वपूर्ण संघर्षसभसँ भरल जीवन पथ पर चलैत छथि आ व्यापक छल-कपटकेँ अनुभव करैत छथि, विशेषतः करियर आ सम्बन्ध जकाँ मुख्य क्षेत्रसभमे। हुनका बारम्बार बाधाक अनुभव भऽ सकैत अछि, गलत बुझल जा सकैत छथि वा अविश्वसनीय व्यक्तिसभसँ भेट भऽ सकैत अछि। ई योग चिन्ताक प्रति प्रवृत्त स्वभावकेँ बढ़ावा दऽ सकैत अछि आ निरन्तर चुनौतीक भावना उत्पन्न कऽ सकैत अछि।
सर्प योगक प्रभाव सामान्यतः केंद्र भाव मे स्थित प्रबल अशुभ ग्रहसभक दशा वा अंतर्दशा काल मे प्रकट होइत अछि। केंद्रक स्वामी ग्रहसभक काल मे सेहो सक्रियता होइत अछि।