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शनिदशमयोगः
निर्माण नियम
शनि दशम भावमे (नीच नहि)
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
शनि कर्म भावमे — अनुशासन, परिश्रम, आ लोक सेवाक माध्यमसँ धीरे-धीरे परन्तु निश्चित रूपें अधिकारक उत्थान। औद्योगिक नेता, प्रशासक, आ न्यायाधीशक कुण्डलीमे प्राय: ई स्थान भेटैत अछि।
स्थिर कर्म-उत्थान
अनुशासन आ परिश्रमसँ धीमा परन्तु निश्चित अधिकार-प्राप्ति।
दशम भावमे शनि एकटा एहन जीवन पथक सुझाव दैत अछि जेकर विशेषता अपन चुनल पेशामे एकटा क्रमिक मुदा निश्चित आरोहण अछि। व्यक्ति प्रायः उल्लेखनीय अनुशासन आ प्रबल कार्य नैतिकता प्रदर्शित करैत अछि, अन्ततः अधिकारक पद प्राप्त करैत अछि, विशेष रूप सँ ओहि क्षेत्रसभमे जतय निरन्तर प्रयास वा लोक सेवाक आवश्यकता होइत अछि। हुनकर स्वभाव गम्भीर आ उत्तरदायी होइत अछि, संरचना आ दीर्घकालिक प्रतिबद्धताकेँ महत्त्व दैत अछि।
योगक परिणाम सामान्यतः शनि केर महादशा (दशा) वा अन्तर्दशाक कालमे प्रकट होइत अछि। महत्त्वपूर्ण करियरक पड़ाव प्रायः तखन घटित होइत अछि जखन शनि करियर सँ सम्बन्धित मुख्य भावसभ सँ गोचर करैत अछि।