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शङ्खयोगः
निर्माण नियम
५म आ ६ठम स्वामी परस्पर केन्द्रमे
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
शंख योग सृजनात्मक बुद्धि (५म) आ प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता (६ठम) केँ एकत्र करैत अछि, जाहिसँ व्यक्ति प्रतिभाक बलें प्रतिद्वन्द्वीपर विजय प्राप्त करैत अछि। दीर्घ जीवन, नैतिक चरित्र, आ सुखद वृद्धावस्था एहि योगक प्रमुख लक्षण अछि।
विजय आ दीर्घायु
प्रतिद्वन्द्वीपर विजय, सुखद वृद्धावस्था, नैतिक प्रतिष्ठा।
शंख योगवला व्यक्ति प्रायः असाधारण रणनीतिक बुद्धिमत्ता प्रदर्शित करैत छथि, जे हुनका अपन प्रतिभाक माध्यमसँ व्यावसायिक चुनौती आ प्रतिद्वंद्वी पर लगातार विजय प्राप्त करबामे सक्षम बनाबैत अछि। ओ प्रायः महत्वपूर्ण उपलब्धि सँ भरल करियर मार्गक निर्माण करैत छथि, अपन नैतिक आचरणक लेल सम्मान अर्जित करैत छथि। ई योग प्रायः एकटा आरामदायक आ नैतिक जीवनक रूपमे प्रकट होइत अछि, जे शांत वृद्धावस्थामे समाप्त होइत अछि।
शंख योगक परिणाम सामान्यतः पंचमेश वा षष्ठेशक दशा वा अन्तर्दशाक अवधिमे प्रकट होइत अछि। सक्रियता सेहो होइत अछि जखन एहि स्वामीसभसँ दृढ़तासँ जुड़ल ग्रह सक्रिय होइत छथि।