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पर्वतयोगः
निर्माण नियम
केन्द्रमे शुभ ग्रह एवं केन्द्रमे कोनो पाप ग्रह नहि (अथवा षष्ठ/अष्टमेश षष्ठ/अष्टममे)
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
पर्वत (पहाड़) योग ऊँचाइयोंपर सफलता आ स्थायित्व उत्पन्न करैत अछि। जखन शुभ ग्रह पाप ग्रहक हस्तक्षेपक बिना केन्द्रोंपर प्रभावी रहथि, तँ कुण्डलीक आधार सुदृढ़ रहैत अछि — जेना एकटा पर्वत जकाँ जे हिलाओल नहि जा सकैत अछि। जातक यश, नेतृत्व, आ स्थायी समृद्धि प्राप्त करैत छथि।
स्थायित्व एवं यश
अटल सफलता, नेतृत्वक पद, स्थायी यश।
ई योग प्रायः अहन व्यक्तिमे प्रकट होइत अछि जकरामे स्वाभाविक लचीलापन आ एकटा शान्त, आधिकारिक व्यवहार होइत अछि। ओ सभ प्रायः नेतृत्व वा महत्वपूर्ण प्रभावक भूमिकासभ दिस आकर्षित होइत छथि, एकटा अहन करियरक निर्माण करैत छथि जे स्थिर विकास आ सार्वजनिक मान्यतासँ चिह्नित होइत अछि। हुनकर निर्णय सभ सुविचारित होइत छथि, जे स्थायी सफलता आ अपन समुदाय वा पेशामे एकटा स्थिर, सम्मानित स्थान दिस अग्रसर करैत अछि।
योगक प्रभाव प्रायः प्रबल रूपसँ प्रकट होइत अछि केन्द्रमे स्थित शुभ ग्रहसभक दशा वा अन्तर्दशा कालमे, विशेषतः गुरु, शुक्र, वा एकटा प्रबल बुधक। ई काल प्रायः महत्वपूर्ण करियर उन्नति वा सार्वजनिक मान्यताक संग मेल खाइत अछि।