देवउत्थानी एकादशी 2026
देवउत्थानी एकादशी 2026 का पर्व शुक्रवार, शुक्रवार, 20 नवंबर 2026.
देवउत्थानी एकादशी 2026 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
शुक्रवार, 20 नवंबर 2026
2026 पंचांग संदर्भ
वार
शुक्रवार
विक्रम संवत्
2083
शक संवत्
1948
इस वर्ष देवउत्थानी एकादशी शुक्रवार को पड़ रहा है, 2025 (2025-11-02) से 18 दिन बाद — सामान्य चन्द्र-पंचांग बदलाव।
Falling on a Friday gives the day a Shukra emphasis — relationship-related rites and white/silver offerings carry extra weight, traditionally favourable for women's vratas.
The 2025 observance fell on Sunday, 2025-11-02 — this year arrives 18 days later in the Gregorian calendar, the Adhika-masa pattern when an intercalary lunar month pushes the cycle forward.
Looking ahead to 2027, Devutthana Ekadashi will fall on Wednesday, 2027-11-10 (10 days earlier than this year). So planning ritual schedules across years means anchoring to the tithi rather than the Gregorian date.
Astronomical context for Devutthana Ekadashi 2026
On Friday, November 20, 2026, sunrise in Delhi (the reference city for this page) falls at 06:47 IST and sunset at 17:25 IST — a daylight span of 10h 38m. Across the six pan-Indian cities tabulated below, sunrise on this date varies from 05:52 (Kolkata) at the eastern edge to 06:48 (Mumbai) in the west — a 56-minute difference that drives the city-by-city muhurat shift you see in the table.
For Devutthana Ekadashi 2026, the central rite of उदय तिथि (सूर्योदय) depends on the festival tithi being present during that window on 2026-11-20 — confirmed across 6 reference cities in this year's computation pass. Cities further east (Kolkata, Chennai) see the window open ~15-25 minutes before Delhi; cities west of Delhi (Mumbai, Pune, Bangalore) see it start later by a similar margin.
देवउत्थानी एकादशी 2026 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 6:47 AM | 5:25 PM |
| मुंबई | 6:48 AM | 5:59 PM |
| बेंगलुरु | 6:20 AM | 5:49 PM |
| चेन्नई | 6:10 AM | 5:39 PM |
| कोलकाता | 5:52 AM | 4:51 PM |
| पुणे | 6:43 AM | 5:56 PM |
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यह तिथि क्यों?
Devutthana Ekadashi उदय तिथि नियम का पालन करता है – जिस दिन आवश्यक तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो, उस दिन त्योहार मनाया जाता है। यह धर्मसिन्धु का सामान्य नियम है।
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- विष्णु मूर्ति या चित्र
- तुलसी का पौधा (तुलसी विवाह हेतु)
- गन्ने की छड़ियाँ
- घी का दीपक
- अगरबत्ती
पूजा के चरण
- 1
विष्णु प्रबोधन (जागरण)
शंख बजाकर, घंटी बजाकर और "उत्तिष्ठ उत्तिष्ठ गोविन्द" का जाप करके भगवान विष्णु को जगाएँ। विष्णु मूर्ति को शयन मुद्रा से उ...
- 2
विष्णु अभिषेक
विष्णु मूर्ति को पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर) और फिर स्वच्छ जल से स्नान कराएँ। सुखाकर पीला रेशमी वस्त्र पहनाएँ। चन...
- 3
एकादशी पूजा
षोडशोपचार से विष्णु पूजा करें। पीले फूल, तुलसी, कुमकुम, अक्षत, धूप और घी का दीपक अर्पित करें। विष्णु सहस्रनाम या चयनित स...
व्रत फल (उपवास के लाभ)
देवउत्थान एकादशी चातुर्मास की समाप्ति और विष्णु के जागरण का प्रतीक है। यह भक्त को संचित पापों से मुक्ति, शुभ कार्यों (विशेषकर विवाह) की पुनः शुरुआत, विष्णु की प्रत्यक्ष कृपा, और बद्रीनाथ दर्शन के समान आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करती है।
देवता
भगवान विष्णु
कथा एवं इतिहास
भगवान विष्णु इस दिन चार माह की योगनिद्रा से जागते हैं। इसे देव प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं। चातुर्मास के बाद विष्णुलोक के द्वार खुलते हैं और सभी शुभ कार्य पुनः आरम्भ होते हैं।
कैसे मनाएँ
एकादशी व्रत रखें। तुलसी विवाह करें – तुलसी और भगवान विष्णु (शालिग्राम) का विवाह संस्कार। तुलसी के चारों ओर दीप जलाएँ। इस दिन के बाद विवाह का मौसम आरम्भ होता है।
महत्व
चातुर्मास की समाप्ति और सभी शुभ कार्यों की पुनः शुरुआत। विवाह का मौसम, गृहप्रवेश आदि शुभ कार्य फिर आरम्भ होते हैं।
व्रत
एकादशी व्रत – अन्न/दाल वर्जित। द्वादशी प्रातः पारण करें।
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