देवउत्थानी एकादशी 2030
देवउत्थानी एकादशी 2030 का पर्व मंगलवार, मंगलवार, 5 नवंबर 2030.
देवउत्थानी एकादशी 2030 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
मंगलवार, 5 नवंबर 2030
2030 पंचांग संदर्भ
वार
मंगलवार
विक्रम संवत्
2087
शक संवत्
1952
इस वर्ष देवउत्थानी एकादशी मंगलवार को पड़ रहा है, 2029 (2029-11-16) से 11 दिन पहले — सामान्य चन्द्र-पंचांग बदलाव।
Falling on a Tuesday gives the day a Mangal emphasis — courage-related rites and red offerings carry extra weight.
The 2029 observance fell on Friday, 2029-11-16 — this year arrives 11 days earlier in the Gregorian calendar, the familiar 11-day shift of the unmodified lunar year.
Looking ahead to 2031, Devutthana Ekadashi will fall on Monday, 2031-11-24 (19 days later than this year). So planning ritual schedules across years means anchoring to the tithi rather than the Gregorian date.
Astronomical context for Devutthana Ekadashi 2030
On Tuesday, November 5, 2030, sunrise in Delhi (the reference city for this page) falls at 06:35 IST and sunset at 17:33 IST — a daylight span of 10h 58m. Across the six pan-Indian cities tabulated below, sunrise on this date varies from 05:43 (Kolkata) at the eastern edge to 06:40 (Mumbai) in the west — a 57-minute difference that drives the city-by-city muhurat shift you see in the table.
For Devutthana Ekadashi 2030, the central rite of उदय तिथि (सूर्योदय) depends on the festival tithi being present during that window on 2030-11-05 — confirmed across 6 reference cities in this year's computation pass. Cities further east (Kolkata, Chennai) see the window open ~15-25 minutes before Delhi; cities west of Delhi (Mumbai, Pune, Bangalore) see it start later by a similar margin.
देवउत्थानी एकादशी 2030 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 6:35 AM | 5:33 PM |
| मुंबई | 6:40 AM | 6:03 PM |
| बेंगलुरु | 6:14 AM | 5:51 PM |
| चेन्नई | 6:03 AM | 5:40 PM |
| कोलकाता | 5:43 AM | 4:56 PM |
| पुणे | 6:36 AM | 6:00 PM |
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यह तिथि क्यों?
Devutthana Ekadashi उदय तिथि नियम का पालन करता है – जिस दिन आवश्यक तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो, उस दिन त्योहार मनाया जाता है। यह धर्मसिन्धु का सामान्य नियम है।
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- विष्णु मूर्ति या चित्र
- तुलसी का पौधा (तुलसी विवाह हेतु)
- गन्ने की छड़ियाँ
- घी का दीपक
- अगरबत्ती
पूजा के चरण
- 1
विष्णु प्रबोधन (जागरण)
शंख बजाकर, घंटी बजाकर और "उत्तिष्ठ उत्तिष्ठ गोविन्द" का जाप करके भगवान विष्णु को जगाएँ। विष्णु मूर्ति को शयन मुद्रा से उ...
- 2
विष्णु अभिषेक
विष्णु मूर्ति को पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर) और फिर स्वच्छ जल से स्नान कराएँ। सुखाकर पीला रेशमी वस्त्र पहनाएँ। चन...
- 3
एकादशी पूजा
षोडशोपचार से विष्णु पूजा करें। पीले फूल, तुलसी, कुमकुम, अक्षत, धूप और घी का दीपक अर्पित करें। विष्णु सहस्रनाम या चयनित स...
व्रत फल (उपवास के लाभ)
देवउत्थान एकादशी चातुर्मास की समाप्ति और विष्णु के जागरण का प्रतीक है। यह भक्त को संचित पापों से मुक्ति, शुभ कार्यों (विशेषकर विवाह) की पुनः शुरुआत, विष्णु की प्रत्यक्ष कृपा, और बद्रीनाथ दर्शन के समान आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करती है।
देवता
भगवान विष्णु
कथा एवं इतिहास
भगवान विष्णु इस दिन चार माह की योगनिद्रा से जागते हैं। इसे देव प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं। चातुर्मास के बाद विष्णुलोक के द्वार खुलते हैं और सभी शुभ कार्य पुनः आरम्भ होते हैं।
कैसे मनाएँ
एकादशी व्रत रखें। तुलसी विवाह करें – तुलसी और भगवान विष्णु (शालिग्राम) का विवाह संस्कार। तुलसी के चारों ओर दीप जलाएँ। इस दिन के बाद विवाह का मौसम आरम्भ होता है।
महत्व
चातुर्मास की समाप्ति और सभी शुभ कार्यों की पुनः शुरुआत। विवाह का मौसम, गृहप्रवेश आदि शुभ कार्य फिर आरम्भ होते हैं।
व्रत
एकादशी व्रत – अन्न/दाल वर्जित। द्वादशी प्रातः पारण करें।