गंगा दशहरा 2030
गंगा दशहरा 2030 का पर्व मंगलवार, मंगलवार, 11 जून 2030. तिथि: jyeshtha shukla 10.
गंगा दशहरा 2030 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
मंगलवार, 11 जून 2030
2030 पंचांग संदर्भ
वार
मंगलवार
विक्रम संवत्
2087
शक संवत्
1952
इस वर्ष गंगा दशहरा मंगलवार को पड़ रहा है, 2029 (2029-06-20) से 9 दिन पहले — सामान्य चन्द्र-पंचांग बदलाव।
Falling on a Tuesday gives the day a Mangal emphasis — courage-related rites and red offerings carry extra weight.
The 2029 observance fell on Wednesday, 2029-06-20 — this year arrives 9 days earlier in the Gregorian calendar, the familiar 11-day shift of the unmodified lunar year.
Looking ahead to 2031, Ganga Dussehra will fall on Saturday, 2031-05-31 (11 days earlier than this year). So planning ritual schedules across years means anchoring to the tithi rather than the Gregorian date.
Astronomical context for Ganga Dussehra 2030
On Tuesday, June 11, 2030, sunrise in Delhi (the reference city for this page) falls at 05:22 IST and sunset at 19:18 IST — a daylight span of 13h 56m. Across the six pan-Indian cities tabulated below, sunrise on this date varies from 04:51 (Kolkata) at the eastern edge to 06:00 (Mumbai) in the west — a 69-minute difference that drives the city-by-city muhurat shift you see in the table.
For Ganga Dussehra 2030, the central rite of उदय तिथि (सूर्योदय) depends on the Jyeshtha Shukla 10 being present during that window on 2030-06-11 — confirmed across 6 reference cities in this year's computation pass. Cities further east (Kolkata, Chennai) see the window open ~15-25 minutes before Delhi; cities west of Delhi (Mumbai, Pune, Bangalore) see it start later by a similar margin.
गंगा दशहरा 2030 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 5:22 AM | 7:18 PM |
| मुंबई | 6:00 AM | 7:15 PM |
| बेंगलुरु | 5:53 AM | 6:45 PM |
| चेन्नई | 5:42 AM | 6:35 PM |
| कोलकाता | 4:51 AM | 6:21 PM |
| पुणे | 5:57 AM | 7:10 PM |
यह तिथि क्यों?
Ganga Dussehra उदय तिथि नियम का पालन करता है – जिस दिन आवश्यक तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो, उस दिन त्योहार मनाया जाता है। यह धर्मसिन्धु का सामान्य नियम है।
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- घी का दीपक
- फूल (कमल, गेंदा, गुलाब)
- कपूर
- अगरबत्ती
- दीपदान के लिए पत्तों की नाव
पूजा के चरण
- 1
पवित्र स्नान
गंगा या किसी निकटवर्ती नदी में पवित्र स्नान करें। नदी उपलब्ध न हो तो स्नान के जल में गंगाजल मिलाएँ। स्नान करते हुए दस पा...
- 2
घाट पर गंगा पूजा
जल के निकट बैठें और छोटी वेदी रखें। जल में फूल, अक्षत, कुमकुम और हल्दी अर्पित करें। गंगा की छोटी मूर्ति पर या गंगा का प्...
- 3
संकल्प
दाहिने हाथ में जल और अक्षत लें। अपना नाम, गोत्र, तिथि (ज्येष्ठ शुक्ल दशमी) और उद्देश्य – दस पापों के निवारण हेतु गंगा ...
फल (लाभ)
गंगा दशहरा दस प्रकार के पापों को नष्ट करता है (शरीर के तीन, वाणी के तीन, मन के तीन, और एक सार्वभौमिक)। इस दिन गंगा स्नान और पूजा से सभी तीर्थों के दर्शन के समान पुण्य मिलता है। यह शुद्धिकरण, पुनर्जन्म चक्र से मुक्ति और पितृ शान्ति प्रदान करता है।
देवता
देवी गंगा, भगवान शिव
कथा एवं इतिहास
गंगा दशहरा गंगा नदी के स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण का उत्सव है। राजा भगीरथ ने हज़ारों वर्ष तपस्या कर गंगा को पृथ्वी पर लाया, जिससे सगर पुत्रों की आत्माओं को मुक्ति मिले। शिव ने गंगा के प्रचण्ड प्रवाह को… पूरी कथा पढ़ें →कम दिखाएँ ↑
गंगा दशहरा गंगा नदी के स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण का उत्सव है। राजा भगीरथ ने हज़ारों वर्ष तपस्या कर गंगा को पृथ्वी पर लाया, जिससे सगर पुत्रों की आत्माओं को मुक्ति मिले। शिव ने गंगा के प्रचण्ड प्रवाह को अपनी जटाओं में धारण किया।
कैसे मनाएँ
गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें। दस वस्तुएँ अर्पित करें (दशहरा = दस पापों का नाश)। गंगा आरती करें। अन्न, वस्त्र और तिल का दान करें। नदी में दीप प्रवाहित करें।
महत्व
गंगा दशहरा दस प्रकार के पापों का नाश करती है। इस दिन गंगा स्नान सभी तीर्थों के स्नान के समान माना जाता है। गंगा की पवित्रता और मोक्षदायिनी शक्ति का उत्सव है।