पुत्रदा एकादशी (पौष) 2027
पुत्रदा एकादशी (पौष) 2027 का पर्व मंगलवार, मंगलवार, 19 जनवरी 2027.
पुत्रदा एकादशी (पौष) 2027 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
मंगलवार, 19 जनवरी 2027
2027 पंचांग संदर्भ
वार
मंगलवार
विक्रम संवत्
2084
शक संवत्
1949
Falling on a Tuesday gives the day a Mangal emphasis — courage-related rites and red offerings carry extra weight.
Looking ahead to 2028, Putrada Ekadashi (Pausha) will fall on Saturday, 2028-01-08 (11 days earlier than this year). So planning ritual schedules across years means anchoring to the tithi rather than the Gregorian date.
Astronomical context for Putrada Ekadashi (Pausha) 2027
On Tuesday, January 19, 2027, sunrise in Delhi (the reference city for this page) falls at 07:14 IST and sunset at 17:49 IST — a daylight span of 10h 35m. Across the six pan-Indian cities tabulated below, sunrise on this date varies from 06:18 (Kolkata) at the eastern edge to 07:14 (Mumbai) in the west — a 56-minute difference that drives the city-by-city muhurat shift you see in the table.
For Putrada Ekadashi (Pausha) 2027, the central rite of उदय तिथि (सूर्योदय) depends on the festival tithi being present during that window on 2027-01-19 — confirmed across 6 reference cities in this year's computation pass. Cities further east (Kolkata, Chennai) see the window open ~15-25 minutes before Delhi; cities west of Delhi (Mumbai, Pune, Bangalore) see it start later by a similar margin.
पुत्रदा एकादशी (पौष) 2027 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 7:14 AM | 5:49 PM |
| मुंबई | 7:14 AM | 6:23 PM |
| बेंगलुरु | 6:46 AM | 6:14 PM |
| चेन्नई | 6:35 AM | 6:03 PM |
| कोलकाता | 6:18 AM | 5:15 PM |
| पुणे | 7:09 AM | 6:20 PM |
यह तिथि क्यों?
Putrada Ekadashi (Pausha) उदय तिथि नियम का पालन करता है – जिस दिन आवश्यक तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो, उस दिन त्योहार मनाया जाता है। यह धर्मसिन्धु का सामान्य नियम है।
देवता
भगवान विष्णु (नारायण रूप)
कथा एवं इतिहास
भद्रावती के राजा सुकेतुमान धर्मात्मा थे किन्तु निःसन्तान होने से अति दुःखी थे। निराश होकर वन में भटकते समय उन्होंने तपस्वी ऋषियों से भेंट की जिन्होंने उन्हें पौष शुक्ल एकादशी का व्रत बताया। पूर्ण श्रद… पूरी कथा पढ़ें →कम दिखाएँ ↑
भद्रावती के राजा सुकेतुमान धर्मात्मा थे किन्तु निःसन्तान होने से अति दुःखी थे। निराश होकर वन में भटकते समय उन्होंने तपस्वी ऋषियों से भेंट की जिन्होंने उन्हें पौष शुक्ल एकादशी का व्रत बताया। पूर्ण श्रद्धा से व्रत करने पर रानी ने सुयोग्य पुत्र को जन्म दिया जो प्रसिद्ध राजा बना। यह कथा पद्म पुराण में पौष माहात्म्य के साथ संरक्षित है।
कैसे मनाएँ
एकादशी व्रत रखें — विशेषकर सन्तान-इच्छुक दम्पतियों के लिए। तुलसी से विष्णु पूजा, विष्णु सहस्रनाम और भागवत पुराण के नवम स्कन्ध का पाठ। ब्राह्मणों को दान दें — विशेषकर शिशु वस्त्र, दूध, अन्न। निःसन्तान दम्पति परम्परा से दोनों मिलकर यह व्रत रखते हैं।
महत्व
सन्तान के लिए समर्पित एकादशी — पुत्र-दा का अर्थ "पुत्र देने वाली" (परम्परा में पुत्र-पुत्री समान; नाम शास्त्रीय संस्कृत प्रयोग दर्शाता है)। हिन्दू वर्ष में दो पुत्रदा एकादशी होती हैं — पौष शुक्ल और श्रावण शुक्ल — दोनों सन्तान प्रदायक, किन्तु पौष व्रत उत्तर परम्परा में विशेष शक्तिशाली माना जाता है।
व्रत
एकादशी व्रत – अन्न/दाल वर्जित। द्वादशी प्रातः पारण। दम्पति का साथ व्रत करना पारम्परिक रूप।
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