पुत्रदा एकादशी (पौष) 2028
पुत्रदा एकादशी (पौष) 2028 का पर्व शनिवार, शनिवार, 8 जनवरी 2028.
पुत्रदा एकादशी (पौष) 2028 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
शनिवार, 8 जनवरी 2028
2028 पंचांग संदर्भ
वार
शनिवार
विक्रम संवत्
2085
शक संवत्
1950
इस वर्ष पुत्रदा एकादशी (पौष) शनिवार को पड़ रहा है, 2027 (2027-01-19) से 11 दिन पहले — सामान्य चन्द्र-पंचांग बदलाव।
Falling on a Saturday brings a Shani emphasis — ancestral rites and black-sesame offerings carry extra weight, mitigating Shani's shadow.
The 2027 observance fell on Tuesday, 2027-01-19 — this year arrives 11 days earlier in the Gregorian calendar, the familiar 11-day shift of the unmodified lunar year.
Astronomical context for Putrada Ekadashi (Pausha) 2028
On Saturday, January 8, 2028, sunrise in Delhi (the reference city for this page) falls at 07:15 IST and sunset at 17:40 IST — a daylight span of 10h 25m. Across the six pan-Indian cities tabulated below, sunrise on this date varies from 06:18 (Kolkata) at the eastern edge to 07:15 (Delhi) in the west — a 57-minute difference that drives the city-by-city muhurat shift you see in the table.
For Putrada Ekadashi (Pausha) 2028, the central rite of उदय तिथि (सूर्योदय) depends on the festival tithi being present during that window on 2028-01-08 — confirmed across 6 reference cities in this year's computation pass. Cities further east (Kolkata, Chennai) see the window open ~15-25 minutes before Delhi; cities west of Delhi (Mumbai, Pune, Bangalore) see it start later by a similar margin.
पुत्रदा एकादशी (पौष) 2028 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 7:15 AM | 5:40 PM |
| मुंबई | 7:13 AM | 6:16 PM |
| बेंगलुरु | 6:43 AM | 6:08 PM |
| चेन्नई | 6:33 AM | 5:57 PM |
| कोलकाता | 6:18 AM | 5:07 PM |
| पुणे | 7:08 AM | 6:13 PM |
यह तिथि क्यों?
Putrada Ekadashi (Pausha) उदय तिथि नियम का पालन करता है – जिस दिन आवश्यक तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो, उस दिन त्योहार मनाया जाता है। यह धर्मसिन्धु का सामान्य नियम है।
देवता
भगवान विष्णु (नारायण रूप)
कथा एवं इतिहास
भद्रावती के राजा सुकेतुमान धर्मात्मा थे किन्तु निःसन्तान होने से अति दुःखी थे। निराश होकर वन में भटकते समय उन्होंने तपस्वी ऋषियों से भेंट की जिन्होंने उन्हें पौष शुक्ल एकादशी का व्रत बताया। पूर्ण श्रद… पूरी कथा पढ़ें →कम दिखाएँ ↑
भद्रावती के राजा सुकेतुमान धर्मात्मा थे किन्तु निःसन्तान होने से अति दुःखी थे। निराश होकर वन में भटकते समय उन्होंने तपस्वी ऋषियों से भेंट की जिन्होंने उन्हें पौष शुक्ल एकादशी का व्रत बताया। पूर्ण श्रद्धा से व्रत करने पर रानी ने सुयोग्य पुत्र को जन्म दिया जो प्रसिद्ध राजा बना। यह कथा पद्म पुराण में पौष माहात्म्य के साथ संरक्षित है।
कैसे मनाएँ
एकादशी व्रत रखें — विशेषकर सन्तान-इच्छुक दम्पतियों के लिए। तुलसी से विष्णु पूजा, विष्णु सहस्रनाम और भागवत पुराण के नवम स्कन्ध का पाठ। ब्राह्मणों को दान दें — विशेषकर शिशु वस्त्र, दूध, अन्न। निःसन्तान दम्पति परम्परा से दोनों मिलकर यह व्रत रखते हैं।
महत्व
सन्तान के लिए समर्पित एकादशी — पुत्र-दा का अर्थ "पुत्र देने वाली" (परम्परा में पुत्र-पुत्री समान; नाम शास्त्रीय संस्कृत प्रयोग दर्शाता है)। हिन्दू वर्ष में दो पुत्रदा एकादशी होती हैं — पौष शुक्ल और श्रावण शुक्ल — दोनों सन्तान प्रदायक, किन्तु पौष व्रत उत्तर परम्परा में विशेष शक्तिशाली माना जाता है।
व्रत
एकादशी व्रत – अन्न/दाल वर्जित। द्वादशी प्रातः पारण। दम्पति का साथ व्रत करना पारम्परिक रूप।
पुत्रदा एकादशी (पौष) 2029 खोज रहे हैं?
पुत्रदा एकादशी (पौष) 2029 तिथि व मुहूर्त