धनतेरस 2029
धनतेरस 2029 लेल सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त आ शहरक अनुसार समय
मुख्य जानकारी
पर्वक तिथि
Sunday, November 4, 2029
Dhanteras Puja (Pradosh Kaal) (दिल्ली)
5:51 PM – 7:17 PM
2029 कें पंचांग संदर्भ
दिन
रविवार
विक्रम संवत्
2086
शक संवत्
1951
This year Dhanteras falls on a Sunday, 20 days later than 2028 (2028-10-15) — typical lunar-calendar drift.
City-Wise Timings for Dhanteras 2029
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त | पूजा मुहूर्त |
|---|---|---|---|
| दिल्ली | 6:35 AM | 5:34 PM | 5:51 PM – 7:17 PM |
| मुंबई | 6:40 AM | 6:03 PM | 6:20 PM – 7:46 PM |
| बेंगलुरु | 6:14 AM | 5:52 PM | 6:09 PM – 7:35 PM |
| चेन्नई | 6:03 AM | 5:41 PM | 5:58 PM – 7:24 PM |
| कोलकाता | 5:42 AM | 4:57 PM | 5:14 PM – 6:40 PM |
| पुणे | 6:35 AM | 6:00 PM | 6:17 PM – 7:43 PM |
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धनतेरस 2029 आपकी राशि के लिए क्या लाता है?
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धनतेरस — क्या करें, क्या न करें
धर्मसिन्धु, निर्णयसिन्धु, एवं समकालीन परम्परा से।
करने योग्य
- Buy one small metal item (preferably silver, copper, or steel) — even a single utensil counts.
- Light a single ghee diya at the main door at sunset — the Yama Deepam tradition.
- Worship Dhanvantari for household health alongside Lakshmi for prosperity.
- Make a small donation in coins to a temple or person in need.
- Stock the kitchen with new spices or grains as symbolic samrudhi (abundance).
- Clean and polish existing silver/gold items in the home — restoring their shine.
न करें
- Do not buy iron or sharp implements (knives, scissors) today.
- Avoid purchasing items in black or dark colors.
- Do not consume alcohol or non-vegetarian food on Dhanteras evening.
- Do not leave the home dark — every entryway should have at least one lamp.
- Avoid buying anything on credit — symbolic of starting the cycle in debt.
- Do not haggle aggressively today — Lakshmi shies away from miserly bargaining.
धनतेरस 2029 शुभकामनाएँ — साझा करने योग्य संदेश
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May Dhanvantari grant your home health, and Lakshmi grant your hands the wisdom to share what they hold. Shubh Dhanteras.
A small steel utensil for the kitchen, a small entry in the new ledger. Wishing your work and your home a prosperous Dhanteras.
The wealth we wish you this Dhanteras is the kind that doesn't need a safe — health, time, and the people who sit at your table.
Buy one small thing that lasts. The Dhanteras tradition is older than capitalism — let your purchase honour that.
Yama Deepam at the front door tonight — a single ghee lamp facing south to deflect a year of small misfortunes. Shubh Dhanteras.
पञ्च-दिवसीय दीपावली पर्व — पर्व क्रम
The five days of Diwali begin with Dhanteras and end with Bhai Dooj — each day with its own deity, ritual, and astrological focus.
धनतेरस वर्षों में — २०२०-२०३०
पिछले एवं भविष्य के वर्षों की तिथियाँ — एक स्थान पर।
ई तिथि किएक?
प्रदोष (साँझ) नियम: ओहि दिन मनाओल जाइत अछि जखन प्रदोष काल (सूर्यास्त सँ लगभग ९६ मिनट बाद धरि) मे त्रयोदशी तिथि रहैत अछि। संध्याकाल मे धन्वंतरि आ कुबेरक पूजा कएल जाइत अछि, आ नव खरीददारी (सोना, बर्तन) केँ पवित्र कएल जाइत अछि।
तिथि निर्धारणक नियम
The tithi must prevail during Pradosh Kaal (evening twilight). This is the primary rule for festivals like Diwali and Dhanteras.
Source: Dharmasindhu & Nirnayasindhu – classical Kala-Vyapti system
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- नव सोना/चाँदीक वस्तु वा धातु कऽ बर्तन।
- दीया (माटिक दीप)(13)
- धतूराक फूल आ फल।
- सिक्का (पुरान आ नव)
- कुमकुम (सिन्दूर)
पूजाक चरण
- 1
धातु क्रय
पूजा सँ पहिने, एकटा नव सोना वा चाँदीक वस्तु किनू, वा कम सँ कम एकटा स्टील/पीतलक बर्तन। ई क्रय घर मे धनक आगमनक प्रतीक अछि।...
- 2
घरक साफ-सफाई आ तैयारी
पूरा घर केँ साफ करू, खास कऽ पूजा स्थल आ मुख्य द्वार केँ। पूजाक चौकी पर एकटा साफ वस्त्र बिछाउ। धन्वन्तरि आ लक्ष्मीक चित्र...
- 3
आचमन आ सङ्कल्प
शुद्धिकरण लेल तीन बेर जल ग्रहण करू। दाहिना हाथ मे जल आ अक्षत लऽ कऽ सङ्कल्प करू, पूजाक उद्देश्य बताबैत।
फल (लाभ)
अकाल मृत्यु सँ रक्षा (अपमृत्यु निवारण), धन्वन्तरि द्वारा उत्तम स्वास्थ्यक प्राप्ति, लक्ष्मी द्वारा धन आ समृद्धिक आकर्षण, दीपावलीक पावनि केर शुभ आरम्भ, आ घरक सभ धातु आ मूल्यवान वस्तु सभक शुद्धिकरण।
देवता
भगवान धन्वन्तरि, देवी लक्ष्मी, कुबेर
कथा आ इतिहास
धनतेरस — धन-त्रयोदशी, कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी — दीपावली कें पाँच-दिवसीय उत्सव कें शुरुआत अछि। पूरा कथा पढू →कम देखाबू ↑
धनतेरस — धन-त्रयोदशी, कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी — दीपावली कें पाँच-दिवसीय उत्सव कें शुरुआत अछि।
पहिल घटना — समुद्र मन्थन सँ धन्वन्तरि कें प्रकटन। भागवत पुराण आ विष्णु पुराण मन्थन कें वर्णन करैत अछि; चौदह रत्न एक-एक प्रकट भेल, अन्त मे धन्वन्तरि सोन कें कलश मे अमृत आ आयुर्वेद लय कय प्रकट भेलाह। ओ दिव्य वैद्य अछि, विष्णु कें अंशावतार।
दोसर घटना — दू दिन बाद कार्तिक अमावस्या कें ओही मन्थन सँ लक्ष्मी कें प्रकटन। धनतेरस पूर्व-तैयारी अछि — घर कें सफाई, धातु-क्रय।
तेसर कथा दक्षिण-दीप कें व्याख्या दैत अछि। स्कन्द पुराण मे राजा हिमा कें पत्नी धनतेरस कें रात्रि सोन-चान्दी द्वार पर राखि कय दीप जलयलनि आ रात भरि गायन कयलनि। यम सर्प रूप मे आबि कय तेज सँ आन्हर भय देहरी पर बैसि गेलाह; प्रहार कें समय निकलि गेल।
सोन खरीदय कें परम्परा तीनू कथा कें सङ्गम सँ निकलल अछि। आयुर्वेद परम्परा एहि दिन कें धन्वन्तरि जयन्ती मानैत अछि।
कनाय पालन करब
सोना, चाँदी, बर्तन या घर के नए सामान खरीदें – खरीदारी का सबसे शुभ दिन। शाम को दक्षिण दिशा में तेरह दीप जलाएँ। स्वास्थ्य के लिए धन्वन्तरि और धन के लिए लक्ष्मी-कुबेर की पूजा करें।
महत्व
धनतेरस दीपावली के पाँच दिवसीय उत्सव का पहला दिन है। "धन" का अर्थ सम्पत्ति और "तेरस" त्रयोदशी। यह स्वास्थ्य, धन और समृद्धि का उत्सव है।
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