गणेश चतुर्थी 2028
गणेश चतुर्थी 2028 लेल सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त आ शहरक अनुसार समय
मुख्य जानकारी
पर्वक तिथि
Wednesday, August 23, 2028
Ganesh Puja (Madhyahna) (दिल्ली)
11:06 AM – 1:41 PM
2028 कें पंचांग संदर्भ
दिन
बुधवार
विक्रम संवत्
2085
शक संवत्
1950
This year Ganesh Chaturthi falls on a Wednesday, 11 days earlier than 2027 (2027-09-04) — typical lunar-calendar drift.
City-Wise Timings for Ganesh Chaturthi 2028
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त | पूजा मुहूर्त |
|---|---|---|---|
| दिल्ली | 5:54 AM | 6:52 PM | 11:06 AM – 1:41 PM |
| मुंबई | 6:21 AM | 7:00 PM | 11:25 AM – 1:57 PM |
| बेंगलुरु | 6:08 AM | 6:36 PM | 11:07 AM – 1:37 PM |
| चेन्नई | 5:57 AM | 6:25 PM | 10:56 AM – 1:26 PM |
| कोलकाता | 5:16 AM | 6:01 PM | 12:46 AM – 10:31 PM |
| पुणे | 6:18 AM | 6:56 PM | 11:21 AM – 1:53 PM |
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गणेश चतुर्थी 2028 आपकी राशि के लिए क्या लाता है?
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गणेश चतुर्थी — क्या करें, क्या न करें
धर्मसिन्धु, निर्णयसिन्धु, एवं समकालीन परम्परा से।
करने योग्य
- Install a clay (mitti) Ganesha idol — not plaster of Paris (POP) which pollutes water.
- Offer modak (steamed sweet dumpling) — Ganesha's favourite, 21 is traditional.
- Recite the Ganapati Atharvashirsha or Sankashtanashana Stotra during puja.
- Immerse the idol in a clean water body (or home tub for POP-free idols) — visarjan ritual.
न करें
- Do not look at the Moon on Ganesh Chaturthi night — invites Mithya Dosha (false-accusation karma).
- Do not use POP (plaster of Paris) idols — environmentally harmful and recently restricted.
- Avoid disrespecting the idol — do not place it on the floor without a clean cloth/asan.
- Do not break the idol forcibly during visarjan — let water dissolve it naturally.
गणेश चतुर्थी 2028 शुभकामनाएँ — साझा करने योग्य संदेश
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Whatever you are about to start this year, may Ganesha clear its path before you arrive. Ganpati Bappa Morya.
Modak in the right hand, a small noise in the left. Wishing your home the kind of Ganesh Chaturthi that brings more visitors than you planned for.
A clay idol that came from the earth and goes back to it — Ganesh Chaturthi is the cleanest start a season can offer. Ganpati Bappa Morya.
Begin the work that you have been postponing. Ganesha removes obstacles only after you have decided what you are walking towards. Ganpati Bappa Morya.
21 modaks, not 1. Bappa knows the difference between offering and gesture. Wishing your kitchen the patience for the longer count.
गणेश चतुर्थी वर्षों में — २०२०-२०३०
पिछले एवं भविष्य के वर्षों की तिथियाँ — एक स्थान पर।
ई तिथि किएक?
मध्याह्न (दोपहर) नियम: ओहि दिन मनाओल जाइत अछि जखन मध्याह्न (दिनक मध्य १/५ भाग) मे चतुर्थी तिथि रहैत अछि। भगवान गणेशक जन्म दोपहर मे भेल छल। एहि काल मे स्थापना (प्रतिष्ठा) आ मुख्य पूजा कएल जाइत अछि।
तिथि निर्धारणक नियम
The tithi must prevail at Madhyahna (midday). Used for festivals like Rama Navami and Ganesh Chaturthi.
Source: Dharmasindhu & Nirnayasindhu – classical Kala-Vyapti system
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- माटि/पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमा
- मोदक (मीठ पकवान)(21)
- दूर्वा घास
- लाल फूल (अड़हुल)
- नारिकेर(1)
पूजाक चरण
- 1
आचमन
दाहिना हाथक हथेलीमे तीन बेर जल लिय, प्रत्येक बेर विष्णु (केशव, नारायण, माधव) क नामक उच्चारण करैत आत्म-शुद्धिक लेल पान कर...
- 2
सङ्कल्प
दाहिना हाथमे जल आ अक्षत लिय, पूजाक तिथि, स्थान आ उद्देश्यक घोषणा करू, फेर जल छोड़ि दिय।
- 3
ध्यान
भगवान गणेशक ध्यान करू – गज-मुख, चारि हाथवला, पाश, अंकुश, मोदक आ आशीर्वाद मुद्रा धारण कएने, कमल पर विराजमान, मूषक जिनकर व...
फल (लाभ)
सभ बाधासभक निवारण (विघ्न नाशन), बुद्धि आ विवेकक प्रदान (बुद्धि प्रदायक), नव कार्यसभमें सफलता, आ सभ धर्मसङ्गत इच्छासभक पूर्ति।
देवता
भगवान गणेश
कथा आ इतिहास
गणेश चतुर्थी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी कें शिव-पार्वती कें ज्येष्ठ पुत्र गणपति कें जन्म कें पर्व अछि। पूरा कथा पढू →कम देखाबू ↑
गणेश चतुर्थी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी कें शिव-पार्वती कें ज्येष्ठ पुत्र गणपति कें जन्म कें पर्व अछि।
पार्वती कैलास पर एकाकिनी छलथि — शिव दीर्घ तपस्या मे छलाह। हुनका अइसन रक्षक चाहल जे पूर्णतः हुनकहि होय। हुनकर अपन शरीर पर लागल हरिद्रा-चन्दन सँ एक सुन्दर बालक कें मूर्ति गढ़ि कय अपन श्वास सँ ओहि मे प्राण फुकलनि। बालक हुनकहि छल। हुनका स्नान-कक्ष कें द्वार पर बैसा कय कहलखिन्ह — किनको प्रवेश नहि देबय।
शिव लौटि कय अज्ञात बालक कें द्वार पर देखलनि। हटय कें कहलखिन्ह; बालक मनाही कयलक। गण हारि गेलाह, ब्रह्मा-विष्णु-इन्द्र सेहो। अन्त मे शिव स्वयं त्रिशूल सँ सन्ध्या समय बालक कें शिर काटि देलखिन्ह।
पार्वती बाहर एलि, पुत्र कें मरल देखि कय सृष्टि सँ कृपा खींचि लेलनि। देवता प्रार्थना कयलनि। शिव कें आदेश सँ उत्तरमुख गज कें शिर अनलक, बालक कें धड़ पर स्थापित कयल गेल, बालक उठल, शिव हुनका गणपति आ विघ्नहर्ता घोषित कयलनि।
दस-दिवसीय उत्सव कें लोकमान्य तिलक 1893 मे सार्वजनिक रूप देलखिन्ह। माटि कें मूर्ति, मोदक, दूर्वा, आ अन्त मे जल मे विसर्जन — सब कथा कें अनुसरण।
कनाय पालन करब
घर में गणेश प्रतिमा (मिट्टी) स्थापित करें। 1.5 / 3 / 5 / 7 / 10 दिन पूजा करें। मोदक, दूर्वा और लाल फूल चढ़ाएँ। जुलूस के साथ विसर्जन करें।
महत्व
नई शुरुआत के देवता, विघ्नहर्ता। सभी कार्यों से पहले पूजित। ज्ञान, समृद्धि और भक्ति की शक्ति का उत्सव।
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